शिवजी को बिल्वपत्र अर्पित करने की पद्धति का अध्यात्मशास्त्रीय आधार

तारक एवं मारक उपासना-पद्धति के अनुसार बिल्वपत्र कैसे चढाएं ?

बिल्वपत्र तारक शिवतत्त्व का वाहक है और बिल्वपत्र का डंठल मारक शिवतत्त्व का वाहक है ।

१. शिवजी के तारक रूप के उपासक

सामान्य उपासक की प्रकृति तारक स्वरूप की होती है, इसलिए शिवजी के तारक रूप की उपासना ही उनकी प्रकृति के समरूप तथा आध्यात्मिक उन्नति के लिए पोषक होती है । शिवजी के तारक तत्त्व के लाभ के लिए, बिल्वपत्र चढाते समय ध्यान दें कि उसका डंठल शिवलिंग की दिशा में और अग्रभाग अपनी ओर हो ।

२. शिवजी के मारक रूप के उपासक

शाक्तपन्थी शिव के मारक रूप की उपासना करतेहैं । ये उपासक शिव के मारक तत्त्व का लाभ लेने हेतु बिल्वपत्र चढाते समय ध्यान दें कि उसका अग्रभाग देवता की दिशा में और डंठल अपनी ओर हो ।

शिवलिंग में आहत (शिवलिंग पर जल के गिरने से निर्मित) नाद के + अनाहत (सूक्ष्म) नाद के, इन दो पवित्र कणों के साथ-साथ चढाए गए बिल्वपत्र के पवित्रकों को अर्थात तीनों पवित्र कणों को आकर्षित करने हेतु तीन पत्तियोंवाला बिल्वपत्र शिव को चढाया जाता है । बिल्वपत्र को औंधे रख, उसका डंठल अपनी ओर कर शिवलिंग पर चढाते हैं ।

– श्रीमती प्रियांका सुयश गाडगीळ (विवाह पूर्व की कु. प्रियांका लोटलीकर)