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नई दिल्ली – मध्य प्रदेश के धार स्थित भोजशाला माता वाग्देवी मंदिर में आगामी बसंत पंचमी पर पूजन करने हेतु सर्वोच्च न्यायालय में याचिका प्रविष्ट की गई है । इस वर्ष शुक्रवार, २३ जनवरी को वसंत पंचमी है ।
ए.एस.आई. ने अपनी सर्वेक्षण रिपोर्ट में 98 दिनों के विस्तृत अध्ययन के पश्चात स्पष्ट रूप से अंकित किया है कि संपूर्ण परिसर माँ सरस्वती के एक हिंदू मंदिर का परिसर है। pic.twitter.com/dcYInFyikE
— Vishnu Shankar Jain (@Vishnu_Jain1) January 19, 2026
नमाज पठन पर प्रतिबंध की मांग
हिन्दू पक्ष ने सर्वोच्च न्यायालय से २३ जनवरी को होने वाली बसंत पंचमी के दिन भोजशाला में मुसलमानों द्वारा नमाज पठन किए जाने पर प्रतिबंध लगाने की मांग की है । याचिका में यह भी मांग की गई है कि ‘उस दिन भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण एवं शासन को कडी सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने के निर्देश दिए जाएं । इस प्रकरण पर त्वरित सुनवाई करने का अनुरोध हिन्दू पक्ष द्वारा किया गया है ।
‘हिन्दू फ्रंट फॉर जस्टिस’ की याचिका
यह याचिका ‘हिन्दू फ्रंट फॉर जस्टिस’ की ओर से अधिवक्ता विष्णु शंकर जैन द्वारा प्रविष्ट की गई है । याचिका में उल्लेख किया गया है कि, भोजशाला परिसर में माता वाग्देवी, अर्थात श्री सरस्वती देवी का मंदिर है जिसका निर्माण ११ वीं शताब्दी में परमार राजा ने करवाया था । इस स्थान पर पूर्व में हिन्दू पूजन करते थे; किंतु ७ अप्रैल २००३ को भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग ने एक आदेश प्रसारित किया । इस आदेशानुसार हिन्दुओं को प्रत्येक मंगलवार एवं बसंत पंचमी के दिन पूजन करने की अनुमति दी गई, जबकि मुसलमानों को प्रत्येक शुक्रवार को दोपहर १ से ३ बजे के समय में नमाज पठन की अनुमति दी गई । ‘यदि बसंत पंचमी शुक्रवार के दिन आती है, तो क्या किया जाए ?’, इस विषय पर भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग ने अभी तक मौन धारण किया हुआ है ।
संपादकीय भूमिकाभोजशाला में पूर्व में ही न्यायालय के आदेशानुसार पुरातत्व विभाग ने सर्वेक्षण किया है तथा उसमें देवताओं की मूर्तियां एवं अन्य हिन्दू अवशेष प्राप्त होने का तथ्य उद्घाटित हुआ है । अतः अब न्यायालय को भोजशाला हिन्दुओं के नियंत्रण में देकर इस विवाद को स्थायी रूप से समाप्त करना चाहिए ! |
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