‘ऑपरेशन सिंदूर’ में ‘लश्कर-ए-तैयबा’ के आतंकवादी तैयार करने वाला प्रशिक्षण केंद्र ध्वस्त – LeT Hafiz Abdul Rauf

‘लश्कर-ए-तैयबा’ के कमांडर ने ही स्वीकार किया

लश्कर-ए-तैयबा के आतंकवादी हाफिज अब्दुल रऊफ

इस्लामाबाद (पाकिस्तान) – भारतीय सैन्य कार्रवाई में ‘मरकज-ए-तैयबा’ अक्षरशः मलबे के ढेर में परिवर्तित हो गया है । ६ तथा ७ मई २०२५ को जो हुआ, वह अत्यंत बडा आक्रमण था । वह स्थान अब मस्जिद नहीं रहा । आज वहां बैठना भी संभव नहीं है । सब कुछ नष्ट हो गया है । ऐसी स्वीकृति लश्कर-ए-तैयबा के आतंकवादी हाफिज अब्दुल रऊफ ने एक सार्वजनिक सभा में बोलते हुए दी । यह स्पष्टता पाकिस्तान के लिए बडी राजनयिक चुनौती सिद्ध हो सकता है; क्योंकि अनेक दिनों से अस्वीकार किए जा रहे आरोप अब किसी गुप्तचर संस्था ने नहीं, अपितु सीधे लश्कर-ए-तैयबा के कमांडर ने ही स्वीकार किए हैं ।

आतंकवाद का मुख्य अड्डा

१. रऊफ आतंकवादियों के प्रशिक्षण एवं पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में स्थित लॉन्च पैड्स (घुसपैठ के लिए आतंकवादियों को एकत्र करने का स्थान) से उन्हें भारत भेजने की कार्रवाइयों में सीधे सम्मिलित था । ‘मरकज-ए-तैयबा’ को पाकिस्तान दीर्घकाल से धार्मिक एवं धर्मार्थ केंद्र के रूप में प्रस्तुत कर रहा था; परंतु भारत ने निरंतर यह कहा था कि वह लश्कर-ए-तैयबा का मुख्य आतंकवादी अड्डा है । इसी स्थान पर आतंकवादियों को प्रशिक्षण दिया जाता था ।

२. भाषण में रऊफ ने एक और दावा किया । उसने बताया कि पाकिस्तान में जिहाद के लिए खुला वातावरण है तथा वहां आतंकवादियों की भर्ती एवं प्रशिक्षण विश्व में सबसे सरल है । उसका कहना है कि देश (प्रशासन) द्वारा ऐसा निर्णय लिए जाने के कारण ही यह संभव हो पा रहा है ।

३. रऊफ ने चीन की खुलकर प्रशंसा करते हुए दावा किया कि पहलगाम के उपरांत भारत-पाकिस्तान तनाव के समय चीन ने पाकिस्तान को तत्काल गुप्त जानकारी प्रदान की थी ।

संपादकीय भूमिका 

‘ऑपरेशन सिंदूर’ समाप्त नहीं हुआ है, ऐसा भारत सरकार ने कई बार कहा है । पाकिस्तान में इन आतंकवादियों का समूल नाश करने के लिए भारत को यह ऑपरेशन पुनः प्रारंभ करना आवश्यक है !