प.पू. सरसंघचालक डॉ. मोहनजी भागवत का आश्वासन !

मथुरा (उत्तर प्रदेश) – संतों का सान्निध्य प्राप्त करना तथा उनके उपदेशों में से न्यूनतम एक बात भी आचरण में लाने का संकल्प करना आवश्यक है । ऐसा करते हुए यदि हम जीवन का निर्माण करते रहे और सभी को जोडते रहे, तो आगामी २० से ३० वर्षों में भारत विश्वगुरु बनेगा । संपूर्ण विश्व को सुख तथा शांति प्रदान करने वाला नवीन मार्ग भारत दिखाएगा । भारत हिन्दू राष्ट्र एवं धर्म राष्ट्र बनेगा । कोई भी इसे परिवर्तित नहीं कर सकेगा । भारत के जन्म के पीछे का उद्देश्य यही है तथा वह स्पष्ट रूप से समक्ष है । अब सज्ज होने की ही आवश्यकता है, ऐसा विधान प.पू. सरसंघचालक डॉ. मोहनजी भागवत ने यहां किया । वे वृंदावन स्थित सुदामा कुटी आश्रम के संस्थापक संत सुदामा दास महाराज के १० दिवसीय शताब्दी महोत्सव के उद्घाटन प्रसंग पर बोल रहे थे ।
प.पू. सरसंघचालक डॉ. मोहनजी भागवत द्वारा किया गया मार्गदर्शन

आसुरी शक्तियां एकता के कारण दुर्बल होंगी !
समाज की सभी आसुरी शक्तियां धीरे-धीरे दुर्बल होंगी । धार्मिक समाज तथा सनातन समाज के लोग जैसे-जैसे एकत्र आएंगे, वैसे-वैसे इन शक्तियों का ह्रास होगा । विगत ५० वर्षों में हिन्दू समाज जैसे अधिक संगठित हुआ, वैसे-वैसे इन शक्तियों के खंड (टुकड़े) हुए हैं ।
सुलतानों के शासन में हिन्दू समाज नष्ट नहीं हुआ !
सुलतान तथा बादशाह के शासनकाल में हिन्दू समाज ने लगभग ५०० वर्षों तक जीवन व्यतीत किया । यदि समाज नष्ट होने वाला होता, तो वह तभी नष्ट हो गया होता । तथापि हिन्दू समाज टिका रहा और आज पुनः हिन्दुओं के देश के रूप में आगे अग्रसर हो रहा है ।
राष्ट्र धर्म के लिए ही निर्मित हुआ !
भारत राष्ट्र की निर्मिती धर्म के लिए ही हुई है । कालक्रमानुसार विश्व का धर्मज्ञान से मार्गदर्शन करना एवं स्वयं के आचरण से धर्ममय जीवन कैसे जियें, यह दिखाना ही हमारा कर्तव्य है । जब वानरवीर सज्ज होते हैं, तब प्रभु श्रीराम अवतरित होते हैं तथा जब पांडव युद्ध के लिए सिद्ध होते हैं, तब श्रीकृष्ण स्वयं सारथी बनते हैं । अनेक बार हमारी ही सज्जता अपूर्ण होने के कारण कार्य अधूरा रह जाता है ।
भेदभावमुक्त भारत की आवश्यकता !
देश को भेदभावमुक्त भारत की आवश्यकता है । हिन्दू समाज कभी भी दूसरों के शौर्य अथवा सामर्थ्य के कारण पराजित नहीं हुआ । जब भी पराजय हुई, तब वह फूट पडने के कारण हुई । किसी भी प्रकार का भेदभाव न रखते हुए परस्पर मैत्री बढानी चाहिए । हिन्दू समाज सामाजिक है तथा भाषा, पंथ, जाति जैसी विविधताओं से वह निर्मित है । जिन्हें हिन्दू माना जाता है, उन सभी के साथ मैत्री होनी चाहिए ।
भक्ति ही वास्तविक शक्ति है !
हम सृष्टि के घटक हैं । सृष्टि से अपनत्व भक्ति से निर्माण होता है । जुडना, अर्थात भक्ति । सत्संग महत्त्वपूर्ण है; क्योंकि जो जुडे हुए हैं, उनके सान्निध्य में रहने से हमारा जीवन बनता जाता है । भक्ति ही वास्तविक शक्ति है । तपश्चर्या करने वाले संतों की छाया में हम खडे हैं, इस कारण हमारा अस्तित्व कोई भी नष्ट नहीं कर सकता । धर्म के प्रकाश से संपूर्ण विश्व को आलोकित करना हमारा ध्येय है ।
‘शिप रीसाइक्लिंग’ (जहाज पुनर्चक्रण) में भारत विश्व में नंबर १ पर !
पंढरपुर के श्री विठ्ठल की मूर्तियों के रासायनिक विलेपन पर न्यायालय ने रोक लगाई !
भारत से चल रहे सीमाविवाद में हम ब्रिटेन को मध्यस्थ बनाना नहीं चाहते ! – Balen Shah
भारत हिंदू राष्ट्र ही है ! – UM Pralhad Joshi
देश के मंदिरों के लिए एक स्वतंत्र ‘सनातन संरक्षण मंडल’ या समिति का गठन किया जाना चाहिए ! – Shankaracharya Sadanand Saraswati
(और इनकी सुनिए…) “भारत के विरुद्ध युद्ध छेडे बिना कोई विकल्प नहीं बचेगा !” – Khawaja Asif