
हरिद्वार (उत्तराखंड) : कुंभपर्व से पहले हरिद्वार के ‘हर की पौडी’ घाट पर अब अहिन्दुओं (गैर-हिन्दुओं) की जांच आरंभ हो गई है । यहां प्रत्येक का आधार कार्ड चेक किया जा रहा है तथा यह भी जांच की जा रही है कि कोई अहिन्दू इस क्षेत्र में व्यवसाय तो नहीं कर रहा है ।
Aadhaar Checks at Haridwar Ghats Ahead of Kumbh Mela
📍 Haridwar | Har Ki Pauri
Key Points
• Aadhaar verification begins at ghats to prevent non-Hindus from doing business before Kumbh Mela• Teerth Purohits & sadhus say the step is needed to protect devotees’ faith and… https://t.co/lDXex9E9Pt pic.twitter.com/k0dC90fLMj
— Sanatan Prabhat (@SanatanPrabhat) January 9, 2026
१. घाटों पर रहे तीर्थ पुरोहितों एवं साधु-संतों का कहना है कि ये कडे निर्णय लेना आवश्यक है । कुछ लोग पैसे कमाने के नाम पर श्रद्धालुओं की आस्था को ठेस पहुंचाने वाले काम कर रहे थे, जिससे विवाद तथा झगडे की स्थिति उत्पन्न हो रही थी ।
२. संतों का कहना है कि कुंभपर्व एक अत्यंत पवित्र समारोह है एवं हरिद्वार देवभूमि का प्रवेश द्वार है, इसलिए अहिन्दुओं का कुंभ स्थल तथा घाट क्षेत्र में प्रवेश पूरी तरह से प्रतिबंधित होना चाहिए ।
३. इस मांग का मुस्लिम संगठनों एवं समाज के लोगों द्वारा विरोध भी उतना ही तीव्र है । उनका कहना है कि घाटों पर प्रवेश रोकना एवं पहचान के आधार पर जांच करने का प्रयास संकीर्ण विचारधारा को दर्शाता है । इससे आपसी भाईचारे को हानि पहुंचेगी ।
४. तीर्थ पुरोहित उज्ज्वल पंडित का कहना है कि सभी को आधार कार्ड साथ रखने के लिए कहा गया है । यदि कोई अहिन्दू हर की पौडी या घाट क्षेत्र में व्यवसाय करते हुए पाया जाता है, तो इसकी जानकारी ‘श्री गंगा सभा’ को दी जाएगी तथा उस पर कार्रवाई की जाएगी । घाटों की पवित्रता बनाए रखने के लिए यह कदम उठाया गया है ।
५. ‘श्री गंगा सभा’ का कहना है कि हम कोई नया नियम बनाने के लिए नहीं कह रहे हैं, अपितु लगभग ११० वर्षों से अस्तित्व में रहे नियमों को लागू करने की मांग कर रहे हैं ।
६. महामंडलेश्वर स्वामी रूपेंद्र प्रकाश महाराज ने बताया कि कुंभपर्व ४ पवित्र स्थानों पर आयोजित होता है तथा हरिद्वार देवभूमि का प्रवेश द्वार है । इसलिए अहिन्दुओं को कुंभ एवं घाट क्षेत्र में प्रवेश की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए । यदि कोई श्रद्धालु श्रद्धा भाव से आ रहा है, तो वह अलग विषय है; परंतु आस्था से खेलने वालों के प्रवेश पर प्रतिबंध लगाना आवश्यक है ।
अखाडा परिषद का विरोध !
अखाडा परिषद के अध्यक्ष महंत रवींद्र पुरी का कहना है कि हरिद्वार नगरपालिका कानून में ब्रिटिश काल से कुछ प्रावधान हैं; परंतु वर्तमान कानूनी स्थिति में परिवर्तन हुआ है । महानगरपालिका बनने के उपरांत ज्वालापुर जैसे क्षेत्रों में मुस्लिम समुदाय बडी संख्या में रहता है, ऐसी स्थिति में पूरे हरिद्वार या पूरे कुंभपर्व क्षेत्र में ऐसी मांग व्यावहारिक नहीं मानी जा सकती । यदि सरकार इस मांग पर विचार कर रही है तथा हरिद्वार के मुख्य शहर या कुछ सीमित क्षेत्रों तक इसे लागू करती है, तो यह स्वागत योग्य हो सकता है । परंतु कुंभपर्व क्षेत्र जो ३ जिलों तक फैला हुआ है, वहां इस प्रकार का प्रतिबंध उचित नहीं होगा ।
सच्चे संत किसी भी धर्म के विरुद्ध नहीं बोलते ! – ए.आई.एम.आई.एम.
ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) के प्रदेश अध्यक्ष नैयर काजमी ने कहा कि सच्चे संत या महात्मा कभी भी किसी धर्म के विरुद्ध नहीं बोलते । (क्या मुसलमानों में ऐसा एक भी सच्चा संत या महात्मा है ? – संपादक) ऋषि-मुनियों के नाम का सहारा लेकर ऐसी चीजें की जा रही हैं, जो समाज को विभाजित करने का काम करती हैं । (हिन्दू कभी भी विभाजन के विचार नहीं रखते । भारत के विभाजन के लिए मुसलमान उत्तरदायी होने के उपरांत भी वे पाकिस्तान नहीं गए एवं अब फिर से भारत के दूसरे विभाजन की स्थिति तक पहुंच गए हैं, यह वास्तविकता है ! – संपादक) वर्तमान में राज्य कई बडी समस्याओं का सामना कर रहा है । (मजार जिहाद, लव जिहाद आदि समस्याएं उत्तराखंड में बढ गई हैं, क्या वे यही कहना चाहते हैं ? – संपादक) युवाओं के रोजगार, स्त्रियों के मुद्दों एवं अन्य प्रकरणों से जनता का ध्यान भटकाने के लिए इस प्रकार के विवाद उत्पन्न किए जा रहे हैं ।
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