कोतवडे (जिला रत्नागिरी) स्थित श्री महालक्ष्मी मंदिर के समीप का ‘हलाल चिकन केंद्र बंद !

ग्रामवासियों की एकजुटता का प्रभाव

कोतवडे, ९ जनवरी (वार्ता) – यहां ग्रामदेवी श्री महालक्ष्मी देवी के स्वयंभू एवं जागृत देवस्थान के निकट प्रारंभ किए गए ‘हलाल चिकन केंद्र’ को बंद करने की मांग ग्राम वासियों ने ग्राम पंचायत से की थी । ६ जनवरी को ग्राम वासियों ने सरपंच संतोष बारगोडे से भेंट कर उन्हें एक निवेदन सौंपा था । गांव के कुछ नागरिकों ने व्यक्तिगत रूप से भी दुकान बंद करने के संबंध में ग्राम पंचायत को पत्र भेजे थे । सरपंच संतोष बारगोडे द्वारा इस विषय में सकारात्मक कार्रवाई का आश्वासन दिए जाने के अनुसार कार्रवाई की गई एवं मंदिर के पास स्थित ‘हलाल चिकन केंद्र’ को बंद कर दिया गया । इस निर्णय के लिए ग्राम वासियों ने ग्राम पंचायत का आभार व्यक्त किया है तथा श्री महालक्ष्मी देवी के चरणों में कृतज्ञता व्यक्त की है ।

श्री महालक्ष्मी माता पूरे गांव की श्रद्धा का केंद्र हैं । ग्राम देवी का स्थान एवं मंदिर की पवित्रता किसी भी प्रकार के विवाद या राजनीति से निश्चित रूप से श्रेष्ठ है । “ग्राम वासियों की श्रद्धा को ध्यान में रखते हुए ग्राम पंचायत को इस चिकन केंद्र को अनुमति नहीं देनी चाहिए, तथा मंदिर के निकट ‘हलाल चिकन केंद्र’ नहीं होना चाहिए,” ऐसी मांग का निवेदन ग्रामवासियों ने ग्राम पंचायत को दिया था ।

इस निवेदन की जानकारी गांव के कुछ युवकों ने विभिन्न निवासी संकुलों में जाकर दी थी । अनेक ग्रामवासियों ने इस निवेदन पर हस्ताक्षर भी किए थे ।

मंदिर परिसर में मदिरा एवं मांस क्यों नहीं होना चाहिए ?

क्या खाना है या क्या नहीं खाना है, यह प्रत्येक व्यक्ति का व्यक्तिगत प्रश्न है, तथापि मंदिर परिसर में मांस या मदिरा की बिक्री को निषिद्ध माना जाता है । इसका कारण यह है, कि भक्त मंदिर में पवित्र भावना से आते हैं । संबंधित देवता का तत्व अधिक सक्रिय होने के कारण मंदिर एवं उसके समीप का वातावरण अधिक सात्विक होता है ।

मद्य एवं मांस तमोगुणी माने जाते हैं, जिससे मंदिर की सात्त्विकता पर प्रतिकूल प्रभाव पड सकता है । इसलिए चाहे मंदिर हो या घर का देवघर, वहां शुद्ध होकर ही जाना चाहिए-ऐसा निर्देश धर्मशास्त्र में दिया गया है ।

संपादकीय भूमिका 

  • धर्महानि को रोकने के लिए संगठित हुए ग्राम वासियों को बधाई !
  • प्रत्येक मंदिर की पवित्रता बनाए रखने के लिए हिंदुओं को इसी प्रकार संगठित होना आवश्यक है !