जामा मस्जिद पूर्व में जैन मंदिर एवं चक्रधर स्वामी की जन्मभूमि होने का दावा

  • भरूच (गुजरात) में जामा मस्जिद के विरुद्ध संतों का अनशन

  • पुरातत्व संरक्षित स्मारक होने के उपरांत भी अवैध निर्माण का आरोप

भरूच (गुजरात) – यहां पायनियर स्कूल के सामने स्थित जामा मस्जिद के विरुद्ध अखिल भारतीय संत समिति के संतों ने आंदोलन प्रारंभ किया है । संतों का दावा है कि इस स्थान पर प्राचीन जैन मंदिर था तथा यहीं चक्रधर स्वामी का जन्म हुआ था । आरोप लगाया गया है कि यह वास्तु भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) के संरक्षण में होने के उपरांत भी, नियमों का उल्लंघन कर यहां अवैध निर्माण किया गया है ।प्रकरण की गंभीरता को देखते हुए भरूच के पुलिस अधीक्षक (SP) घटनास्थल पर पहुंचे । उन्होंने पुरातत्व विभाग के अधिकारियों एवं संत समिति के प्रतिनिधियों के साथ चर्चा कर सर्वेक्षण का आश्वासन दिया । अखिल भारतीय संत समिति ने शक्तिनाथ मैदान में आंदोलन किया । संतों ने घोषणा की है कि जब तक पुरातत्व विभाग कठोर कार्रवाई नहीं करता, तब तक वे जल भी ग्रहण नहीं करेंगे । वर्ष १९०५ में पुरातत्व विभाग ने इस वास्तु को अपने नियंत्रण में लेकर इसे ‘संरक्षित स्मारक’ घोषित किया था । अखिल भारतीय संत समिति के अध्यक्ष संत अविचल देवाचारी के अनुसार, कुछ लोग कानून का उल्लंघन कर इस ऐतिहासिक स्थल की मूल पहचान परिवर्तित करने का प्रयास कर रहे हैं ।

‘जीवित स्मारक’ की संकल्पना

आंदोलन में सम्मिलित स्वामी मुक्तानंद ने बताया कि देश में पुरातत्व विभाग के संरक्षण में लगभग ३,८०० स्मारक हैं, जिनमें से लगभग ८२० ‘जीवित स्मारक’ के रूप में पहचाने जाते हैं । नियमानुसार, जीवित स्मारक में एक कील ठोकना भी अवैध है । इसके उपरांत भी इस मस्जिद में वजूखाना (नमाज से पूर्व हाथ-पैर धोने का स्थान) बनाया गया है । यहां पंखे, लाइट, बोर्ड एवं मदरसे से संबंधित सामग्री रखी गई है, जो कानून का उल्लंघन है । उन्होंने स्पष्ट किया कि जीवित स्मारक होने पर वहां सप्ताह में केवल एक दिन ही पूजा या नमाज की अनुमति होती है ।

२ दिनों में सर्वेक्षण आरंभ होगा !

स्वामी मुक्तानंद ने बताया कि ५ जनवरी से अनिश्चितकालीन अनशन प्रारंभ किया गया था, जिसके पश्चात प्रशासन ने तत्काल संज्ञान लिया । पुलिस अधीक्षक अक्षय राज की मध्यस्थता में हुई बैठक में निम्नलिखित निर्णय लिए गए । अगले २-३ दिनों में सर्वेक्षण प्रारंभ होगा, जिसमें संत समाज के प्रतिनिधि भी सम्मिलित होंगे । यहां की अस्थायी व्यवस्थाएं ८ से १० दिनों में हटा दी जाएंगी, जबकि स्थायी अवैध निर्माण अगले २ महीनों के भीतर हटा दिए जाएंगे ।