Haridwar Non-Hindu Ban : हरिद्वार की धार्मिक पहचान की रक्षा करना सरकार का दायित्व है ! – मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी

  • हरिद्वार में गंगा नदी के घाटों पर अहिंदुओं के प्रवेश पर प्रतिबंध

  • वर्ष २०२७ में होने वाले कुंभ पर्व की पृष्ठभूमि में उत्तराखंड सरकार की तैयारियां सावधानीपूर्वक चल रही हैं !

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी

देहरादून (उत्तराखंड) – हरिद्वार एक पवित्र नगर है एवं इसकी धार्मिक पहचान की रक्षा करना सरकार का दायित्व है । उत्तराखंड सरकार हरिद्वार एवं समीपस्त क्षेत्रों में अहिंदुओं (हिंदुओं के अतिरिक्त) के प्रवेश से संबंधित नियमों की गंभीरता से समीक्षा कर रही है । यह जानकारी मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने एक समाचार संस्था को दिए साक्षात्कार में दी । मुख्यमंत्री ने आगे कहा कि देवभूमि उत्तराखंड की आध्यात्मिक छवि बनी रहे, इसके लिए सरकार सभी विकल्पों पर विचार कर रही है । वर्ष २०२७ में हरिद्वार में होने वाले कुंभ पर्व की तैयारियों की पृष्ठभूमि में यह चर्चा चल रही है ।

१. मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सूचित किया कि हरिद्वार नगर निगम के नियमों के अनुसार पहले से ही गंगा नदी के घाटों पर अहिंदुओं के प्रवेश पर प्रतिबंध है । इसमें प्रसिद्ध ‘हर की पौडी’ भी सम्मिलित है । इतिहास में भी ऐसे निर्णयों के उदाहरण मिलते हैं । वर्ष १९१६ में पंडित मदन मोहन मालवीय ने ब्रिटिश प्रशासन के साथ किए गए समझौते के माध्यम से गंगा के प्राकृतिक प्रवाह एवं तीर्थक्षेत्र की पवित्रता को बनाए रखने का प्रयास किया था ।

२. हरिद्वार से ऋषिकेश तक के क्षेत्र में स्थित सभी १०५ घाटों पर प्रवेश नियमों को अधिक कठोर करने का प्रस्ताव रखा गया है । इस संबंध में संत समाज एवं श्री गंगा सभा के साथ सरकार की चर्चा सावधानी पूर्वक चल रही हैं ।

३. निरंजनी अखाडे के आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी कैलाशानंद गिरी ने इस पहल का समर्थन करते हुए इसे एक आवश्यक निर्णय सूचित किया है ।

४. प्रतिवर्ष अनुमानित ४ करोड श्रद्धालु हरिद्वार आते हैं एवं प्रमुख स्नान पर्वों के समय यह संख्या अधिक बढ जाती है । वर्तमान पर्वकाल में घाटों पर अहिंदू पर्यटकों की उपस्थिति को लेकर विवाद उत्पन्न होने से इस विषय पर अधिक चर्चा हो रही है ।