
भारत मंडपम्, दिल्ली – ‘कुछ वर्ष पहले भारत में हिन्दू स्वयं को हिन्दू मानने में संकोच करते थे और दबे स्वर में हिन्दू राष्ट्र का समर्थन करते थे; पर आज समय बदल गया है । इसलिए अब भारत में खुलकर घोषणा की जाती है कि ‘भारत हिन्दू राष्ट्र है । भारत में तलवार और शारीरिक हिंसा के बल पर हिन्दुओं का धर्मांतरण किया गया । ‘काफिरों को मारना और उनकी महिलाओं से बलात्कार करना’, इसके लिए उनमें धार्मिक विश्वास उत्पन्न किया जाता है । उनके लिए यह धर्मयुद्ध है । लाल किले के पास हुआ बमविस्फोट भारत की सार्वभौमिकता (संप्रभुता) पर एक जिहादी आक्रमण था । इस बमविस्फोट के आरोपी सुशिक्षित और अपने इरादों के पक्के थे । ऐसे धर्मांध लोग धार्मिक मानसिकता के कारण उत्पन्न होते हैं । दिल्ली बमविस्फोट के आरोपी मरने के उद्देश्य से ही गए थे । इसलिए उनके साथ कठोर दंड की भाषा करने से कोई लाभ नहीं होगा । आतंकवादियों की इन जिहादी गतिविधियों को वैचारिक स्तर पर छाती ठोककर युद्ध के रूप में स्वीकार किया जाना चाहिए’, ऐसे विचार विश्व हिन्दू परिषद के अंतर्राष्ट्रीय कार्याध्यक्ष, अधिवक्ता आलोक कुमारजी ने ‘स्वराज्य का स्मरण और शौर्य जागरण’ विषय पर बोलते हुए व्यक्त किए ।
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