‘मंदिर-रक्षा चर्चासत्र’ में दैवी अनुभूति सुनकर धर्मप्रेमी मंत्रमुग्ध !

भारत मंडपम्, दिल्ली – श्रीराम मंदिर के लिए हिन्दुओं द्वारा न्यायालय के बाहर की गई लडाई अभूतपूर्व है; परंतु हम अधिवक्ताओं ने उस विषय में न्यायालय में जो लडाई लडी, वह हम सभी के लिए श्रीराम द्वारा उनके अस्तित्व की दी गई अनुभूति ही है । श्रीराम की कृपा के कारण ही ऋषितुल्य ज्येष्ठ अधिवक्ता केशव परासरन्जी ने ९२ वर्ष की आयु में भी यह लडाई दृढता से लडी । उनमें दुर्दम्य श्रद्धा निर्माण करनेवाले भी श्रीराम ही हैं ! मैं अधिवक्ता परासरन्जी से वर्ष २०१७ में जुडा; परंतु इस संपूर्ण अभियोग के कारण मेरा दृढ मत हो गया कि ‘जीवन में ‘संयोग’ कभी नहीं होते, अपितु केवल दैवी कृपा ही होती है’, ऐसा भावपूर्ण प्रतिपादन सर्वोच्च न्यायालय के वरिष्ठ अधिवक्ता श्रीधर पोतराजूजी ने किया ।
वे ‘भारत मंडपम्’ में चल रहे ‘सनातन राष्ट्र शंखनाद महोत्सव’ में १३ दिसंबर को आयोजित ‘मंदिर-रक्षा चर्चासत्र’ में बोल रहे थे । इस चर्चासत्र में तंजावुर, तमिलनाडु के श्री सोमनाथ ज्योतिर्लिंग के दिव्य अंशों को संजोकर रखनेवाले परिवार के वेदप्रचाररत्न वेद कुलपति श्री. जी.के. सीतारामन्जी, कर्नाटक के श्रीराम सेना के संस्थापक श्री. प्रमोद मुतालिकजी एवं मंदिर महासंघ की ओर से हिन्दू जनजागृति समिति के महाराष्ट्र तथा छत्तीसगढ समन्वयक श्री. सुनील घनवट ने सहभाग लिया । प्रख्यात न्यूज एंकर श्वेता त्रिपाठीजी ने इस अवसर पर सूत्रसंचालन किया ।
अधिवक्ता पोतराजूजी द्वारा बताए गए विशिष्ट सूत्र !

१. अभियोग की निरंतर ४० दिन तक सुनवाई चल रही थी ।
२. अधिवक्ता परासरन् बताते थे कि उन्हें उनके एक कंधे पर श्रीकृष्ण एवं दूसरे कंधे पर श्रीराम बैठे हैं और ‘वे ही न्यायालय में सबकुछ सुझा रहे हैं’, ऐसा प्रतीत होता था ।
३. विरोधी पक्ष द्वारा ‘एक बार बनाई मस्जिद सदा मस्जिद ही रहती है’, ऐसा कहने पर उसका प्रतिवाद कैसे करना है, इस विषय में हम संभ्रम में थे; परंतु तभी अधिवक्ता परासरन् ने दृढता से कहा, ‘एक बार बनाया गया मंदिर सदा मंदिर ही रहता है !’
४. अभियोग के समय सह-अधिवक्ता योगेश्वरन् एवं भक्तिवर्धन सिंह जिस ग्रंथ पर भी हाथ रखते थे, वहां संबंधित प्रश्नों के उत्तर देनेवाले प्रमाण मिलते थे ।
५. इस अभियोग में अचानक पुरातत्व विभाग ने ‘ग्राउंड पेनिट्रेटिंग रडार’ परीक्षण करने की मांग की । उससे भी यही सिद्ध हुआ कि ‘वहां भूमि के नीचे मंदिर था ।’ इस अभियोग की प्रत्येक बात राम ही करवा रहे थे ।
६. यह अभियोग हिन्दुओं के अस्तित्व का प्रश्न था । ‘सनातन संस्कृति जीवित है’, यह सिद्ध करने की लडाई थी ।

अब हिन्दू राष्ट्र की स्थापना के लिए कार्य करना है ! – वेदप्रचाररत्न वेद कुलपति श्री. जी.के. सीतारामन्जी, तमिलनाडु
मेरी अनेक पीढियों ने श्री सोमनाथ ज्योतिर्लिंग के इन अंशों को संजोकर रखा एवं उनकी नित्य पूजा की । मुझे भी यह क्या है, यह ज्ञात नहीं था, फिर भी मैं १८ वर्ष तक उनका पूजन करता रहा । उसके उपरांत इन अंशों में विद्यमान चुंबकीय शक्ति के विषय में अनुसंधान करने के लिए मैंने इन अंशों को अनेक प्रयोगशालाओं में भेजा था; परंतु मेरे गुरुस्वरूप शंकराचार्य विजयेंद्र सरस्वतीजी ने मुझे रोका । उन्होंने कहा, ‘ये सोमनाथ ज्योतिर्लिंग के अंश हैं ।’ ३० जनवरी २०२६ से ‘आर्ट ऑफ लिविंग’ के संस्थापक गुरुदेव श्री श्री रविशंकरजी के मार्गदर्शन में इन अंशों की भारतभर में दर्शन यात्रा रामेश्वरम् से आरंभ होगी । मैंने गत ३० वर्षों में ३६० विद्यार्थियों को वेद सिखाया । अब बेटा वेदपाठशाला का कार्य देख रहा है, इसलिए मुझे अब ‘हिन्दू राष्ट्र’ की स्थापना के कार्य में सहभागी होना है । जिन्हें इन श्री सोमनाथ ज्योतिर्लिंगों के दर्शन चाहिए हों, वे हमसे संपर्क करें, हम उनके पास आकर वह व्यवस्था करेंगे ।
मंदिर संस्कृति की रक्षा के लिए कार्यरत ‘मंदिर महासंघ’ ! – सुनील घनवट, हिन्दू जनजागृति समिति

मंदिर महासंघ का कार्य मंदिर की परंपराओं की रक्षा, मंदिरों की रक्षा, मंदिरों-मंदिरों में समन्वय, मंदिरों का संगठन तथा मंदिर ही धर्मशिक्षा के केंद्र – इस पंचसूत्री के अनुसार चल रहा है । गत ३ वर्षों में मंदिर महासंघ के माध्यम से १५ सहस्र मंदिरों के प्रतिनिधियों का संगठन हुआ है तथा २,३०० से अधिक मंदिरों में वस्त्र संहिता (ड्रेस कोड) लागू की गई है । मुंबई के मंदिरों में लागू होने के उपरांत केवल भारत ही नहीं, ऑस्ट्रेलिया जैसे देश में भी वस्त्र संहिता लागू हुई । वर्ष २००८ में महाराष्ट्र की तत्कालीन कांग्रेस सरकार ने साढे ४ लाख मंदिरों को अधिग्रहित करने के लिए कानून बनाया था; परंतु महासंघ द्वारा किए संगठित विरोध के कारण उस कानून को बस्ते में डालना पडा । आज भी कर्नाटक की कांग्रेस सरकार ने मंदिरों पर कर लगाने के लिए विधानसभा एवं विधान परिषद में कानून पारित किया था; परंतु महासंघ के विरोध के कारण राज्यपाल ने उस पर हस्ताक्षर नहीं किए । मंदिरों की रक्षा हेतु एक होना, हमारा धर्मकर्तव्य ही है ।
मंदिरों की रक्षा के लिए शासकों को भी सहयोग करना चाहिए ! – प्रमोद मुतालिकजी, संस्थापक, श्रीराम सेना

कर्नाटक के चिकमंगळूरु से ३० कि.मी. की दूरी पर स्थित दत्तपीठ में श्री गुरु दत्तात्रेय ने साधना की थी; परंतु टीपू सुल्तान ने वहां बाबा बुडन दरगाह स्थापित कर दी । उसके उपरांत वहां के सैकडों एकड परिसर का मजारों, कब्रिस्तानों, दफनभूमि, दरगाह एवं गोमांस भक्षण के कारण इस्लामीकरण हो गया था; परंतु गत ३० वर्षों में विश्व
हिन्दू परिषद, श्रीराम सेना तथा हिन्दुत्वनिष्ठ संगठनों द्वारा किए आंदोलनों तथा लडी गई न्यायालयीन लडाई के कारण ९० प्रतिशत परिसर दत्त भक्तों को मिल गया है । अब केवल शुक्रवार को नमाज पढने के लिए मौलवी आता है । वह भी शीघ्र ही न्यायालय के आदेश से बंद हो जाएगा । मंदिरों की रक्षा हेतु आज के शासकों को भी सहयोग करना चाहिए ! वल्लभभाई पटेल ने एक शासकीय आदेश निकालकर धर्मांधों द्वारा तोडे श्री सोमनाथ मंदिर को पुनः बनवाया, उसी प्रकार आज सभी मंदिरों की रक्षा होनी चाहिए । मैं हिन्दुओं से आवाहान करता हूं कि वे इसके पश्चात धर्मांधों का सामना करने के लिए लडने की तैयारी रखें ।
Temple Bonds : केन्द्र सरकार ‘टेम्पल बॉन्ड्स’ योजना लाने की तैयारी में !
Corporate Jihad : धर्मांतरण अस्वीकार करने के कारण ‘विप्रो’ (Wipro) की हिन्दू महिला कर्मचारी को सेवामुक्त किया !
मद्रास उच्च न्यायालय ने विद्यालय की भूमि पर चर्च के अनाधिकृत निर्माण पर रोक लगाई।
मृतक के नाम पर अभियोग चलाकर मंदिर प्रशासन के विरुद्ध अचलपुर के तहसीलदार के द्वारा दिया गया आदेश न्यायालय ने किया निरस्त ।
महाराष्ट्र में २ जून से आंदोलन, घंटानाद, महाआरती एवं हस्ताक्षर अभियान आरंभ होगा ।
सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. जयंत आठवलेजी के चरणों में कोटि-कोटि प्रणाम !