‘नशाविरोधी संघर्ष अभियान’ की मांग
(झारी में से शुक्राचार्य का अर्थ है: वह व्यक्ति जिसे किसी बडे संकट अथवा अनुचित कार्य के समय हस्तक्षेप कर उसे रोकना चाहिए था; परंतु उस व्यक्ति ने दुर्लक्ष किया, ऐसे व्यक्ति के लिए प्रयुक्त उपरोधिक कटाक्ष !)

मुंबई, १९ दिसंबर (वार्ता) – नशाविरोधी संघर्ष अभियान, साथ ही अनेक सामाजिक संगठनों और स्थानीय नागरिकों के प्रचंड विरोध को अनदेखा कर मुंबई में ‘सनबर्न फेस्टिवल’ को अनुमति प्रदान की गई । यह प्रश्न केवल संगीत महोत्सव का नहीं, अपितु नशा, विधि, बाल सुरक्षा तथा प्रशासन की भूमिका का है । विविध संगठनों द्वारा अनेक आंदोलनों, प्रदर्शनों एवं ज्ञापनों के उपरांत भी व्यसनाधीनता को प्रोत्साहन देने वाले कार्यक्रमों को निर्बाध अनुमति मिलती है, यह निषेधार्ह है । देश को नशे की गर्त में जाने से रोकने के स्थान पर ऐसे कार्यक्रमों को अनुमति देने वाले ‘झारी के शुक्राचार्य’ को खोजकर उन पर कार्यवाही करना आवश्यक है, ऐसी मांग ‘नशाविरोधी संघर्ष अभियान’ की श्रीमती धनश्री केळशीकर ने की । मुंबई मराठी पत्रकार संघ में ‘नशाविरोधी संघर्ष अभियान’ की ओर से १९ दिसंबर के दिन आयोजित पत्रकार वार्ता में वे बोल रही थीं । इस अवसर पर ‘मोकळा श्वास फाउंडेशन’ के संयोजक श्री. राजेश सावंत उपस्थित थे ।
श्रीमती धनश्री केळशीकर ने कहा :
१. अभियान की ओर से ५० से अधिक महाविद्यालयों में प्रबोधन कर सैकड़ों विद्यार्थियों तक यह विषय पहुंचाया गया । मुंबई के पुलिस आयुक्त, ‘नार्कोटिक्स विभाग’ के उपायुक्त, मुंबई पोर्ट ट्रस्ट के वरिष्ठ अधिकारी, यातायात पुलिस से प्रत्यक्ष भेंट कर इस कार्यक्रम को निरस्त करने की मांग की गई; परंतु इस संपूर्ण प्रशासनिक यंत्रणा से हमें अत्यंत अल्प प्रतिसाद प्राप्त हुआ, यह स्तब्ध करने वाला है ।
२. नार्कोटिक्स विभाग के अधिकारियों से ‘मद्यपान कर वाहन चलाने’ (ड्रंक एंड ड्राइव) के प्रकरणों पर विशेष ध्यान देने की मांग की गई, तब यह उत्तर मिला कि ‘अब लोग ‘ओला’, ‘उबेर’ से आते हैं, अतः वह प्रश्न ही उपस्थित नहीं होता’ ।
३. राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग द्वारा पुलिस एवं राज्य के मुख्य सचिव को इस कार्यक्रम के विषय में भेजे गए सूचना-पत्र (नोटिस) का सामान्य उत्तर देने की औपचारिकता भी नहीं दिखाई गई । कुल मिलाकर यह सर्व प्रकरण संदेहास्पद है ।
🚫🔥 “Banish Sunburn permanently from India!” – Nasha-Virodhi Sangharsh Abhiyan
The controversial Sunburn Festival, earlier forced out of Goa & Pune, is now planned in Sewri, Mumbai (Dec 19–21).
✊ On Dec 18, a strong public protest demanded its immediate cancellation and… pic.twitter.com/KYlu6TdeDL
— Sanatan Prabhat (@SanatanPrabhat) December 19, 2025
नशीले पदार्थों के सामाजिक दुष्प्रभावों के प्रति प्रशासन की संवेदनहीनता ! – राजेश सावंत, संयोजक, ‘मोकळा श्वास फाउंडेशन’
नशीले पदार्थ तथा साइकोट्रोपिक (मस्तिष्क एवं मन पर प्रभाव करने वाले) पदार्थ अधिनियम के अंतर्गत १६ वर्ष से न्यून आयु के बालकों की कार्यक्रम में उपस्थिति अपराध है । पूर्व के ‘सनबर्न फेस्टिवल’ के स्थानों पर हुई मृत्यु, नशीले पदार्थों के तस्करों का मिलना, कर-वंचना के आरोप, इन विषयों पर कोई प्रतिबंधात्मक कार्यवाही होती हुई दिखाई नहीं देती, यह सर्वाधिक गंभीर है । प्रशासन का यह शिथिल प्रतिसाद नशे के सामाजिक दुष्प्रभावों के प्रति पूर्ण संवेदनहीनता दर्शाता है । नशा केवल वाहन चलाना नहीं है, अपितु हिंसा, लैंगिक अपराध, मृत्यु, स्वास्थ्य संकट तथा अपराध की एक शृंखला है । मानवाधिकार आयोग के सूचना-पत्र की अवहेलना क्यों ? अल्पायु बालकों का संरक्षण कौन करेगा ? दोषियों पर कार्यवाही क्यों नहीं होती ? ऐसे अनेक प्रश्न इस माध्यम से उपस्थित होते हैं ।
नशाविरोधी संघर्ष अभियान की सरकार से मांगें !
१. सनबर्न से संबंधित समस्त अनुमतियों की जानकारी सार्वजनिक की जाए । २. नशीले पदार्थ तथा साइकोट्रोपिक पदार्थ अधिनियम के अंतर्गत ‘सनबर्न फेस्टिवल’ के अन्वेषण (जांच) हेतु स्वतंत्र अन्वेषण यंत्रणा नियुक्त की जाए । ३. मानवाधिकार आयोग को इस कार्यक्रम के विषय में संपूर्ण विवरण प्रस्तुत किया जाए । ४. इस कार्यक्रम के विरोध में होने वाले प्रदर्शनों पर लगा प्रतिबंध तत्काल हटाया जाए । ५. अल्पायु बालकों को इस स्थान पर प्रवेश न दिया जाए । |

गुणवत्ता एवं अन्नसुरक्षा के विषय में ‘गोकुल’ संघ की ओर से कभी भी समझौता नहीं किया गया है ।
Delhi Hotel Fire : दिल्ली के होटल में लगी भीषण आग में २१ लोगों की मृत्यु
Hindu Kesari : प्रबल प्रताप सिंह जुदेव प्रतिष्ठित ‘हिन्दू केसरी’ पुरस्कार से सम्मानित।
Ramdas Athawale : (और इनकी सुनिए…) ‘अवैध मद्यभट्टियों को अधिकृत करने पर सरकार को राजस्व प्राप्त होगा !’
Corporate Jihad : धर्मांतरण अस्वीकार करने के कारण ‘विप्रो’ (Wipro) की हिन्दू महिला कर्मचारी को सेवामुक्त किया !
Grooming Gangs : सांसद ने ब्रिटिश संसद में उपस्थित किया ‘ग्रूमिंग टोली’ का सूत्र