SC Banke Bihari : धनवानों के लिए देव के विश्राम में हस्तक्षेप क्यों किया जाता है ?

वृंदावन (उत्तरप्रदेश) स्थित बांके बिहारी मंदिर में देव के विश्राम के समय को लेकर सर्वोच्च न्यायालय का प्रश्न !

वृंदावन (उत्तरप्रदेश) – यहां के श्री बांके बिहारी मंदिर में भक्तों की सुविधा हेतु दर्शन की अवधि बढ़ाए जाने पर आपत्ति क्यों नहीं की जाती है ? वर्तमान में देव के विश्राम के समय में वास्तव में उन्हें कहां विश्राम दिया जाता है ? इस अवधि में सामान्य दर्शनार्थियों के लिए दर्शन वर्जित होते हैं ; परंतु धन देने वाले धनवान भक्तों को पूजा करने की अनुमति दी जाती है , ऐसा क्यों ? ऐसा प्रश्न सर्वोच्च न्यायालय ने उपस्थित किया । मंदिर के व्यवस्थापन हेतु सर्वोच्च न्यायालय द्वारा नियुक्त समिति ने प्रतिदिन लगभग ढाई घण्टे दर्शन का समय बढ़ाया है तथा मंदिर के सेवादार इसका विरोध कर रहे हैं ।

१. मंदिर की मूल व्यवस्थापन समिति की ओर से अधिवक्ता श्याम दीवान ने न्यायालय में युक्तिवाद (तर्क) करते हुए दर्शन की अवधि बढ़ाने पर आपत्ति दर्शाई । उन्होंने कहा कि, दर्शन की अवधि में परिवर्तन नहीं किया जा सकता ; क्योंकि यह दीर्घकाल से चली आ रही परम्परा है । दर्शन के समय में परिवर्तन करने से भगवान के जागने तथा शयन (सोने) का समय भी परिवर्तित हो जाता है । भगवान के विश्राम के लिए एक निश्चित समय होता है तथा उसमें हस्तक्षेप नहीं किया जा सकता ।

२. मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने पूछा कि, देव के विश्राम के समय में उन्हें नियमानुसार विश्राम कहां दिया जाता है ? इस अवधि में सामान्य भक्तों के लिए दर्शन बंद होते हैं , दोपहर १२ बजे मंदिर बंद किया जाता है ; किन्तु फिर भी भगवान को क्षण भर भी शांती नहीं दी जाती । इस काल में प्रभावशाली लोग बड़ी धनराशि देकर पूजा करते हैं तथा उन्हें अनुमति दी जाती है ।

३. इस पर अधिवक्ता श्याम दीवान ने कहा कि, इस स्वरूप की सीधी आपत्ति नहीं है ; किन्तु न्यायालय की शंका विचारणीय हो सकती है तथा उसकी जांच की जा सकती है । तथापि , दर्शन का समय बदलना उचित नहीं है ।

सर्वोच्च न्यायालय द्वारा सूचना-पत्र (नोटिस)

मंदिर की पुरानी व्यवस्थापन समिति द्वारा प्रविष्ट की गई याचिका में, सर्वोच्च न्यायालय द्वारा नियुक्त समिति पर सेवकों की मनमानी पद्धति से नियुक्ति करने का आरोप भी लगाया गया है । इस याचिका पर सर्वोच्च न्यायालय ने नियुक्त समिति , उत्तरप्रदेश शासन तथा मथुरा वृंदावन विकास प्राधिकरण को सूचना-पत्र जारी किया है । इस प्रकरण की आगामी सुनवाई जनवरी के प्रथम सप्ताह में होगी ।