सनातन राष्ट्र शंखनाद महोत्सव देहली २०२५

सनातन राष्ट्र-स्थापना के कार्य में योगदान दें ! – प.पू. युधिष्ठिरलाल महाराज, पीठाधिश्वर, शदाणी दरबार, छत्तीसगढ

भारत मंडपम्, देहली : सनातन संस्था हिन्दुओं को सर्वांगीण धर्मशिक्षा देकर धर्मजागृति एवं संस्कृति संवर्धन का जो कार्य कर रही है, वह अद्वितीय है । सनातन संस्था के कार्य के कारण राष्ट्र बलशाली होगा । आज यहां सनातन राष्ट्र शंखनाद महोत्सव में उपस्थित प्रत्येक धर्मप्रेमी को यहां से आगे अपने-अपने क्षेत्र में सनातन राष्ट्र की स्थापना का कार्य करने का सुसंकल्प लेना चाहिए ! उसके लिए आवश्यक संगठन खडा करना एवं क्रियाशील होना ही इस महोत्सव की सच्ची फलोत्पत्ति होगी, ऐसा आवाहन छत्तीसगढ के ‘शदाणी दरबारा’के नौंवे पीठाधीश्वर प.पू. युधिष्ठिरलाल महाराज ने किया । महोत्सव के समापन के समय हुई ‘सनातन राष्ट्र संकल्प संतसभा’ में वे ऐसा बोल रहे थे । इस अवसर पर उन्होंने विस्थापित हिन्दुओं के पुनर्वास के लिए और अधिक प्रयास करने का आवाहन भी किया ।
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— Sanatan Prabhat (@SanatanPrabhat) December 14, 2025
चरित्रवान लोग ही युद्ध जीत सकते हैं ! – पू. पवन सिन्हा गुरुजी, संस्थापक, पावन चिंतनधारा आश्रम

भारत मंडपम्, देहली – चरित्रवान लोग ही धर्मयुद्ध कर सकते हैं । जिनके पास चरित्र नहीं है, वे युद्ध नहीं जीत सकते । भारत के पास चरित्र होने के कारण पाकिस्तान के विरुद्ध के अनेक छोटे-बडे युद्धों में भारत को सफलता मिली । चरित्रनिर्माण सरल नहीं है तथा चरित्र का शिक्षा से कोई भी संबंध नहीं है । अनेक उच्च विद्याविभूषित लोग भ्रष्टाचारी हैं । वर्तमान शिक्षा युवकों में चरित्रनिर्माण नहीं कर सकती । उसके लिए शिक्षकों के पास समय नहीं है । देश में अनेक विद्यालय हैं, तब भी युवकों का चरित्र संकीर्ण हो रहा है । चरित्रनिर्माण के लिए समाज एवं राष्ट्र के प्रति प्रेम होना आवश्यक है । उसके लिए बच्चों को अच्छी शिक्षा देनेसहित उनके सामने अच्छे आदर्श भी रखने आवश्यक हैं । उसके लिए उनमें जागृति लानी पडेगी, ऐसा मार्गदर्शन ‘पावन चिंतनधारा आश्रम’के संस्थापक पू. पवन सिन्हा गुरुजी ने ‘सनातन राष्ट्र शंखनाद महोत्सव’को संबोधित करते हुए किया ।
‘सनातन राष्ट्र एवं युवकों में जागृति’ विषय पर बोलते हुए उन्होंने कहा, ‘‘हमारे देश में महाराणा प्रताप, छत्रपति शिवाजी महाराज, स्वामी विवेकानंद जैसे अनेक चरित्रवान महापुरुषों ने जन्म लिया । छत्रपति शिवाजी महाराज तलवार चलाने में निपुण थे, इसलिए नहीं; अपितु वे चरित्रवान थे, इसलिए विश्व में उनकी मान्यता है । लोग उनका आदर्श लेते हैं, उन्हें सम्मान देते हैं, उन्हें छत्रपति कहते हैं तथा उनका जयघोष करते हैं । अतः हमें युवापीढी के सामने फिल्मजगत के नायक को नहीं, अपितु राष्ट्रपुरुषों का आदर्श सामने रखना आवश्यक है ।’’
हिन्दुओं को अपने खोए हुए भूप्रदेश वापस जीतने के प्रयत्न करने चाहिए ! – स्वामी विज्ञानानंदजी, सह महामंत्री, विश्व हिन्दू परिषद

भारत मंडपम, देहली – जो राष्ट्र हिन्दू जीवनपद्धति अपनाएगा, वह हिन्दू राष्ट्र बनेगा । स्वतंत्रता के पहले भारत समृद्ध भारत था । सूर्य के उदय से अस्त तक का पूरा भूप्रदेश हिन्दुओं के अधिपत्य में था । गतकाल में हमने सभी प्रदेश खो दिए है । आज हिन्दुओं की सत्ता भारत के कुछ ही राज्यों में है । इसलिए उन्हें केवल दांडिया, होली अथवा दिवाली जैसे त्यौहारों में उलझने की अपेक्षा शेष प्रदेश जीतने के लिए प्रयत्न करने चाहिए । इससे हमारा देश केवल हिन्दू राष्ट््र ही नहीं, किंतु ‘रिपब्लिक हिन्दू रा राष्ट्र’ बनेगा, ऐसा प्रतिपादन विश्व हिन्दू परिषद के सह महामंत्री स्वामी विज्ञानानंदजी ने ‘सनातन राष्ट्र शंखनाद महोत्सव’ में उद्बोधन करते समय किया ।
‘हिन्दुओं का सांस्कृतिक घोषणापत्र’, इस विषय पर बोलते समय स्वामीजी ने कहा ‘‘हिन्दू अत्यंत सहिष्णु बन गए हैं । शास्त्र बताता है, ‘शत्रु शरणागत भाव से भी आया, तो भी उसपर कभी दया नहीं करनी चाहिए ।’ शत्रु जैसा होगा, वैसा ही उसके साथ व्यवहार करना चाहिए; तो ही हमारे समाज और राष्ट्र की रक्षा होगी । यही धर्म है । इसलिए राष्ट्र की रक्षा के लिए पहले शत्रुबोध होना आवश्यक है । युवकों को वीरता और साहस निर्माण करनेवाली शिक्षा मिलनी चाहिए । हम विविध भाषाएं बालते होंगे अथवा विविध ग्रंथों का वाचन करते होंगे, तब भी संगठित रहना, यही हिन्दू राष्ट्र का खरा सिद्धांत है ।’’
आगामी आपातकाल में रक्षा हेतु ईश्वर के भक्त बनें ! – सद्गुरु नीलेश सिंगबाळजी, धर्मप्रचारक, हिन्दू जनजागृति समिति

भारत मंडपम्, देहली : जब पृथ्वीवर अधर्म प्रबल होता है, उस समय शांति उत्पन्न होने हेतु युद्ध करना ही पडता है, उसी को ‘आपातकाल’ कहते हैं । वह बताकर नहीं आता, अपितु एक सुनिश्चित कालचक्रके अनुसार आता है । पिछले २-३ वर्षाें से पूरे विश्व में युद्धजन्य स्थिति उत्पन्न हुई है । अनेक राष्ट्र युद्ध के दहलीज पर हैं । तीसरा विश्वयुद्ध कब आरंभ होगा, यह बताया नहीं जा सकता । पूर्व सेनाप्रमुख विपीन रावत के बताए अनुसार इस काल में भारत को केवल सीमाओं पर युद्ध नहीं लडना पडेगा, अपितु ढाई स्तर पर (चीन, पाकिस्तान तथा भारत में स्थित आंतरिक शत्रु) लडाई लडनी पडेगी । वर्तमान समय में भारतविरोधी शक्तियां विभिन्न माध्यमों से देश में अशांति फैलाने का प्रयास कर रही हैं ।
विभिन्न संत, द्रष्टा एवं सप्तर्षियों द्वारा की गई भविष्यवाणी सत्यव सिद्ध होती हुई दिखाई दे रही है । उनके बताए अनुसार आपातकाल में युद्ध, बाढ, भूकंप, महामारी इत्यादि के प्रकोप से युक्त घोर आपातकाल आएघा तथा उसमें प्रचंड मनुष्यहानि होगी । भले ही ऐसा हो, तब भी ‘नमे भक्त: प्रण्यशति ।’ अर्थात ‘मेरे भक्त का नाश नहीं होगा’, यह भगवान का वचन है । अतः आपातकाल से रक्षा होने हेतु हमें विभिन्न सुरक्षात्मक उपायों के साथ आध्यात्मिक साधना कर ईश्वर का भक्त बनना आवश्यक है, ऐसा मार्गदर्शन हिन्दू जनजागृति समिबति के धर्मप्रचारक सद्गुरु नीलेश सिंगबाळजी ने किया । ‘आगामी आपातकाल एवं सुरक्षात्मक उपाय’, इस विषय पर वे ऐसा बोल रहे थे ।
हिन्दू अपने वास्तविक शत्रु को पहचान कर छत्रपति शिवाजी महाराज के शौर्यपूर्ण मार्ग से कार्यरत हों ! – उदय माहूरकर, संस्थापक, सेव कल्चर सेव भारत फाऊंडेशन
‘सनातन राष्ट्र शंखनाद महोत्सव’के समापन सत्र में सनातन संस्थापर स्तुतिसुमनों की वर्षा

भारत मंडपम्, देहली (संवाददाता) : हिन्दुओं को अपने वास्तविक शत्रु को पहचानना चाहिए । उसके लिए उन्हें कुछ कृतियां करनी चाहिए तथा छत्रपति शिवाजी महाराज के जीवन की घटनाओं से बोध लेकर उनके द्वारा अपनाए गए शौर्ययुक्त मार्ग से कार्य करना चाहिए, ऐसा मार्गदर्शन ‘सेव कल्चर सेव भारत फाऊंडेशन’ के संस्थापक तथा पूर्व सूचना आयुक्त श्री. उदय माहूरकर ने किया । ‘सनातन राष्ट्र शंखनाद महोत्सव’ की ‘सनातन राष्ट्र संकल्प संतसभा’ में ‘चक्रवर्ती सम्राट छत्रपति शिवाजी महाराज’, इस विषय पर वे ऐसा बोल रहे थे । समापन के इस सत्र में उपस्थित अनेक संतों ने, साथ ही श्री. माहूरकर ने सनातन संस्था के कार्य का गौरवपूर्ण उल्लेख किया ।
श्री. माहूरकर ने आगे कहा कि,
छत्रपति शिवाजी महाराज ने औरंगजेब को ५ बार क्षमापत्र भेजे तथा ५ बार संधि की; परंतु जब इस संधि की ३ शर्तें जब स्वराज स्थापना के उनके लक्ष्य में बाधा बनने लगी, तब महाराज ने संधि तोड दी । अफजलखान के योजनाबद्ध वध के कारण पूरे भारत में छत्रपति शिवाजी महाराज का दबदबा स्थापित हुआ । सूरत लूट ने के उपरांत महाराज ने सिंधुदुर्ग एवं रायगढ आदि गढ-किलों का निर्माण कर राष्ट्रहित साधा । औरंगजेब के कारावास में भी महाराज ने वहां के राजपूतों को अपना बना लिया था । छत्रपति शिवाजी महाराज की इसी यशस्वी राजनीति हमने अपनाई, तो सनातन राष्ट्र की स्थापना दूर नहीं है ।
सनातन संस्था भारत की एकमात्र सात्त्विक संस्था !
श्री. उदय माहूरकर ने कहा, ‘‘सनातन संस्था वास्तव में भारत की पहले क्रम की एकमात्र सात्त्विक संस्था है । सनातन संस्था द्वारा देहली में आकर ‘सनातन राष्ट्र शंखनाद महोत्सव’ का आयोजन करना अत्यंत महत्त्वपूर्ण घटना है । दिखाऊ पद्धति से हिन्दुत्व का कार्य करनेवाली जो फर्जी संस्थाएं हैं, यह उन आसुरी शक्तिओं पर प्राप्त की गई एक प्रकार की विजय ही है, ऐसा कहना पडेगा !’’ |
श्री. माहूरकर द्वारा रखे गए अन्य महत्त्वपूर्ण सूत्र
१. भारत की स्वतंत्रता के समय बैरिस्टर जीना ने अलग पाकिस्तान मेंगा; परंतु उनके द्वारा ‘भारत के मुसलमानों के साथ कैसा व्यवहार किया जाए ?’, इस संबंध में दूसरा विकल्प रखा, उसे भी गांधी एवं नेहरू ने स्वीकार किया । उसके कारण पंथ पर आधारित स्वतंत्र देश बनकर भी दूसरा विकल्प चुने जाने के कारण भारत हिन्दू राष्ट्र नहीं बन पाया । यह हिन्दुओं के साथ किया गया बडा द्रोह था ।
२. इस देश में गांधी के विचारों के विषय में व्यापक चर्चा होनी चाहिए । गांधी के ‘संपूर्ण अहिंसा’ तथा ‘हिन्दुओं की बलि चढाकर हिन्दू-मुसलमान एकता’ के उनके विचार राष्ट्रघातक थे ।
३. हिन्दुओं को भावनाशील हिन्दुत्व के साथ, अपितु उससे अधिक महत्त्व क्रियाशील हिन्दुत्व को देना चाहिए !
४. देश को प्रधानमंत्री श्री. नरेंद्र मोदी जैसा राष्ट्ररक्षा हेतु कठोर निर्णय लेनेवाला नेतृत्व मिलना हमारा सौभाग्य ही है !
क्षणिकाएं
१. या सत्रात संतगण एवं मान्यवराें के करकमलों से श्री. मदन गुप्ता द्वारा लिखे गए कन्नड भाषा के ग्रंथ ‘अपूर्व भारतम्’ का लोकार्पण किया । इस ग्रंथ में प्राचीन वैज्ञानिक भारत कैसा था, इस विषय में विवेचन है ।
२. विश्व हिन्दू परिषद के सह-महामंत्री पू. विज्ञानानंद महाराज ने उनके मार्गदर्शन का आरंभ स्वयं शंखनाद कर किया ।
३. महोत्सव का समापन संपूर्ण ‘वन्दे मातरम् ।’गाकर किया गया ।
The Sanatan Rashtra Shankhnad Mahotsav concludes with divine resonance! 🐚
This Mahotsav was a success due to the grace of Bhagwan Shri Krushna, the blessings of Saints and the guidance of Sachchidananda Parabrahman Dr Athavale! 🙏
We express our heartfelt gratitude to all who… pic.twitter.com/C7krUSy5jP
— Sanatan Sanstha (@SanatanSanstha) December 14, 2025

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