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नागपुर, ०९ दिसम्बर (वार्ता) – देश में कुछ निजी इस्लामी संघटनाओं द्वारा चलाए जा रहे अवैध हलाल प्रमाणपत्र के कारण राष्ट्र के समक्ष गंभीर संकट उत्पन्न हुआ है । यह अत्यंत गंभीर विषय है । यह व्यवस्था अब केवल वाणिज्य से संबंधित विषय न रहकर भारत की सार्वभौमत्वता (सभी के लिए समानता) को चुनौती देने वाली तथा राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए घोर संकट उत्पन्न करने वाली बन गयी है । अतः उत्तरप्रदेश की भांति ‘हलाल प्रमाणपत्र’ व्यवस्था पर देशव्यापी प्रतिबंध लगाया जाए, ऐसी मांग भाजपा के विधायक श्री मोहन माटे ने ०९ दिसम्बर को विधानसभा में की । वे औचित्य सूत्र प्रस्तुत करते हुए बोल रहे थे ।
‘हलाल’ प्रमाणपत्र क्या है ?इस्लाम के अनुसार ‘हलाल’ का अर्थ है जो वैध हो । पूर्वकाल में ‘हलाल’ केवल मांस तक सीमित था; परंतु अब कट्टरपथियों को अपनी पृथक अर्थव्यवस्था स्थापित करनी है, इसलिए गृह-उद्योग, औषधि, सौन्दर्य-प्रसाधन इत्यादि विविध वस्तुओं के लिए ‘हलाल’ प्रमाणपत्र अर्थात् ‘यह इस्लामी नियमों के अनुसार अनुमोदित है’, ऐसा प्रमाण प्राप्त करना पडता है । इसके लिए कुछ इस्लामी संगठन कार्यरत हैं । वे जिस प्रमाणपत्र को अनुमोदित करते हैं, उसे ‘हलाल प्रमाणपत्र’ कहा जाता है । देश में समानांतर इस्लामी अर्थव्यवस्था खडी करके वर्तमान अर्थव्यवस्था को दुर्बल बनाने के लिए कट्टरपथियों ने ‘हलाल प्रमाणपत्र’ के माध्यम से यह षड्यंत्र रचा है । |
देवस्थान की कृषिभूमि की रक्षा हेतु अवैध भूमि अधिग्रहण विरोधी विधेयक बनाया जाए !
विधायक श्री मोहन मते ने कहा कि मंदिर परिसर के सरोवर की स्वच्छता तथा उत्सवों के आयोजन के लिए भक्तों को दान के लिए हाथ फैलाने पडते हैं । उनकी स्वामित्व वाली भूमि पर भूमाफिया लाभ कमा रहे हैं । यह छत्रपति शिवाजी महाराज के महाराष्ट्र के लिए शोभनीय नहीं है । अतः देश को धर्माधिष्ठित छत्रपति शिवाजी महाराज की आदर्श-संस्कारयुक्त राष्ट्र की आवश्यकता है । छत्रपति शिवाजी महाराज का आदर्श दृष्टि में रखते हुए देवस्थान तथा उनकी संपत्ती का रक्षण किया जाए । देवस्थानों की सहस्रों एकड कृषिभूमि भूमाफियाओं द्वारा नियंत्रण में लिए (हड़पे) जाने के कारण, उनकी सुरक्षा हेतु गुजरात तथा कर्नाटक राज्य की धारा पर कठोर ‘अवैध भूमि अधिग्रहण विरोधी विधेयक’ तत्काल प्रभाव से लागू किया जाए तथा विशेष अन्वेषण दल स्थापित किए जाएं, ऐसी मांग उन्होंने इस अवसर पर की ।
राजस्थान के कारागृह में आजीवन कारावास का दंड भुगत रहे २ बंदियों का २२ जुलाई को विवाह होगा
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(और इनकी सुनिए…) ‘श्रीकृष्ण मुसलमान थे तथा ५ समय की नमाज पढते थे !’ – Maulana Jarjis Ansari
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हिन्दु विवाह अधिनियम के अनुसार विवाह को वैध ठहराने के लिए केवल विवाह प्रमाणपत्र होना पर्याप्त नहीं है ।– Gujrat High Court