Sunburn : युवा पीढी को नशा के गड्ढे में धकेलने वाले विवादास्पद ‘सनबर्न उत्सव’ को प्रतिबंधित किया जाए ! – नशा विरोधी संघर्ष अभियान

छायाचित्र में बाएं से श्री राजेश सावंत, संबोधित करती हुई श्रीमती धनश्री केळशीकर तथा प्रा. विट्ठल सोनटक्के

मुंबई – ‘सनबर्न उत्सव’ भारत में सदैव विवादास्पद रहा है । गोवा में प्रतिबंधित होने के उपरांत इस वर्ष मुंबई के शिवडी में १९ से २१ दिसम्बर की कालावधि में इस कार्यक्रम का आयोजन किया गया है । यह तथाकथित ‘उत्सव’ महाराष्ट्र की संस्कृति, परंपरा तथा अस्मिता को कलंकित करने वाला है । व्यसन–वृद्धि कराने वाले ऐसे कार्यक्रमों पर स्थायी प्रतिबंध लगाया जाना चाहिए । युवा पीढी को अमली पदार्थों के गड्ढे में ढकेलने वाला इस कार्यक्रम को मुंबई में प्रतिबंधित किया जाए तथा इस कार्यक्रम को देश में प्रतिबंधित किया जाए – ऐसी मांग ‘ नशा विरोधी संघर्ष अभियान’ की श्रीमती धनश्री केळशीकर ने की ।

८ दिसम्बर के दिन मुंबई मराठी पत्रकार संघ में ‘नशा विरोधी संघर्ष अभियान’ की ओर से आयोजित पत्रकार परिषद में वे बोल रही थीं ।  इस अवसर पर नशा विरोधी संघर्ष अभियान के प्रा. श्रीपाद सामंत, कीर्ति महाविद्यालय के प्रा. विट्ठल सोनटक्के, ‘मुक्त श्वास फाउंडेशन’ के संयोजक श्री राजेश सावंत, अधिवक्ता आशुतोष पांडे तथा हिन्दू जनजागृति समिति की अधिवक्ता (श्रीमती) मृण्मयी खोडवेकर उपस्थित थीं ।

नशाप्रवृत्त ‘सनबर्न’ के विषय में शून्य सहनशीलता क्यों नहीं ? – श्रीमती धनश्री केळशीकर

इस महोत्सव को निरस्त किए जाने की मांग जनसाधारण की ओर से प्रकट हो रही है । पूर्व में गोवा तथा बेंगळूरु में ‘सनबर्न उत्सव’ में अमली पदार्थों के अतिसेवन से युवकों की मृत्यु भी हुई है । पहले से ही ‘अमली पदार्थ–तस्करी’ के विषय में संवेदनशील मुंबई में युवकों के जीवन तथा स्वास्थ्य पर संकट उत्पन्न होने की संभावना इस उत्सव से बढ़ गई है । महाराष्ट्र सरकार ने भी अमली पदार्थों के विषय में ‘शून्य सहनशीलता’ की नीति घोषित की है । यह कार्यक्रम हुआ एवं अमली पदार्थों के सेवन से किसी का स्वास्थ्य बिगडा, तो उसका समस्त दायित्व सरकार पर आएगा । शिवडी पुलिस से प्राप्त पत्र के अनुसार अभी तक इस कार्यक्रम को अनुमति न प्रदान होने पर भी इस कार्यक्रम के लिए टिकट–विक्रय चल रहा है, यह आपत्तिजनक है ।

राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग को इसको त्वरित ध्यान में लेना चाहिए ! – प्रा. श्रीपाद सामंत

‘सनबर्न उत्सव’ से युवा पीढी के स्वास्थ्य एवं सुरक्षितता पर गंभीर संकट उत्पन्न होने की संभावना है । मानवाधिकार–सुरक्षा हेतु तत्काल हस्तक्षेप किए जाने के संबंध में हमने राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के समक्ष शिकायत की है । विशेषतः इस कार्यक्रम में बडे स्तर पर अमली पदार्थों के उपयोग तथा वितरण के प्रकरण पूर्व में उजागर हुए हैं । राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग इस प्रकरण को तत्काल ध्यान में ले तथा संबंधित शासकीय विभागों को जांच करने के निर्देश दे ।

हिन्दू जनजागृति समिति की अधिवक्ता (श्रीमती) मृण्मयी खोडवेकर ने कहा, ‘‘हिन्दू जनजागृति समिति वर्ष २०१३ से निरंतर ‘सनबर्न उत्सव’ का विरोध कर रही है । इसी कारण एक बार गोवा सरकार ने यह कार्यक्रम निरस्त किया था । हमारी महाराष्ट्र सरकार से ह्रदयपूर्ण मांग है कि अमली पदार्थों के वितरण हेतु कुख्यात यह कार्यक्रम त्वरित निरस्त किया जाए ।’’

इस अवसर पर कीर्ति महाविद्यालय के प्रा. विट्ठल सोनटक्के तथा ‘मुक्त श्वास फाउंडेशन’ के संयोजक श्री राजेश सावंत ने भी इस उत्सव को निरस्त करने की मांग की ।

अमली पदार्थ–तस्करी, कर–डुबाना, फिर भी ‘सनबर्न’ को अनुमति क्यों ?

वर्ष २००९, २०१४ तथा २०२० में ‘सनबर्न उत्सव’ के आयोजकों ने गोवा राज्य का ६ करोड २९ लाख रुपये कर–बकाया रखा था । इस विषय में सितम्बर २०२५ में मुंबई उच्च न्यायालय ने ‘सनबर्न उत्सव’ की १ करोड १० लाख रुपये सुरक्षा–निधि अधिग्रहित करने का आदेश दिया था ।
पूर्ण रूप से शासन का कर–अपव्यय करने वाले तथा युवा पीढी को नशाप्रवृत्ति के लिए प्रोत्साहित करने वाले ‘सनबर्न उत्सव’ को प्रशासन ने अनुमति क्यों प्रदान की ? – यह प्रश्न नशा विरोधी संघर्ष अभियान में उपस्थित लोगों ने किया ।

संपादकीय भूमिका 

महाराष्ट में निर्धन कृषकों को ऋणमुक्ति नहीं ; परंतु नशा–प्रवृत्ति बढाने वाले ‘सनबर्न उत्सव’ का करोड़ों का दंड (क्षमा) मुक्त किया गया, यह अत्यंत खेदजनक है !