
बीजिंग (चीन) – चीन ने अरुणाचल प्रदेश में जन्मी भारतीय महिला पेमा वांग थोंगडोक के साथ शंघाई हवाई अड्डे पर किए गए दुर्व्यवहार के सभी आरोपों को अस्वीकार कर दिया है । चीन के विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता माओ निंग ने कहा कि भारतीय महिला के साथ कोई दुर्व्यवहार (जबरदस्ती), पकड कर रखना या उत्पीडन जैसा व्यवहार नहीं किया गया । हमने उन्हें आराम, पानी और भोजन की सुविधा भी दी । (यदि ऐसा ही था, तो भारतीय महिला को हवाई अड्डे पर १८ घंटे प्रतीक्षा क्यों करायी गयी —इस पर चीन से उत्तर मांगना चाहिए – संपादक)
🇨🇳 China now denies mistreatment of an Indian woman from Arunachal Pradesh.
To teach the expansionist Chinese 🐲 a lesson, its true face must be exposed before the world.
🇮🇳 India must prepare firmly – diplomatically, politically & strategicallypic.twitter.com/5pX3ujQPLP https://t.co/O03P1RJMqQ
— Sanatan Prabhat (@SanatanPrabhat) November 26, 2025
चीन के इस वक्तव्य पर भारतीय विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रंधीर जायसवाल ने कहा कि अरुणाचल प्रदेश भारत का अभिन्न हिस्सा है । चीन चाहे जितना मना करे, सत्य बदला नहीं जा सकता । हमने पेमा की बंदी (हिरासत) का विषय चीन के समक्ष कडे शब्दों में उठाया । चीनी अधिकारी अब तक यह नहीं बता पाए कि महिला को क्यों रोका गया । चीन के अपने नियम २४ घंटे तक वीजा के बिना ‘ट्रांज़िट’ की अनुमति देते हैं । (‘ट्रांज़िट’ का अर्थ है—२४ घंटे तक बिना वीजा किसी देश के हवाई अड्डे पर रुकने की अनुमति, जब किसी यात्री को आगे की फ्लाइट पकडने के लिए वहां ठहरना पडे ।)
संक्षेप में समझें यह घटना !
ब्रिटेन में रहने वाली भारतीय महिला पेमा २१ नवंबर को जापान जा रही थीं । उनकी फ्लाइट चीन के शंघाई में ३ घंटे के लिए रुकी थी । उस समय चीनी आव्रजन (आप्रवासन)अधिकारियों ने पेमा का जन्मस्थान अरुणाचल प्रदेश देखकर उनका भारतीय पासपोर्ट अवैध घोषित किया तथा उसे अपने अधिकार में ले लिया ।
पेमा ने आरोप लगाया, “मेरे पास वैध वीजा होने के बाद भी मुझे जापान जाने वाली फ्लाइट में नहीं चढने दिया गया । कई आव्रजन अधिकारी और ‘चाइना ईस्टर्न एयरलाइंस’ के कर्मचारी मेरी हंसी उडाते रहे । यह १८ घंटे का बहुत कष्टदायक अनुभव था ।”
अंत में पेमा ने ब्रिटेन में रहने वाले एक मित्र के माध्यम से शंघाई स्थित भारतीय दूतावास से संपर्क किया । इसके बाद भारतीय अधिकारियों ने उन्हें रात की फ्लाइट में बिठाकर शंघाई से बाहर निकलने में सहायता की ।
चीन दावा करता आया है कि अरुणाचल प्रदेश उसका ‘दक्षिण तिब्बत’ है, जबकि भारत स्पष्ट रूप से कहता है कि अरुणाचल प्रदेश हमेशा से भारत का अभिन्न राज्य रहा है ।
संपादकीय भूमिकाविस्तारवादी चीनी ड्रैगन को सबक सिखाने हेतु उसका चेहरा दुनिया के सामने उजागर करना आवश्यक है। इसके लिए अब भारत को कमर कसनी चाहिए। |
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