शंखनाद का महत्त्व

१. शंखनाद के कारण सेना में उत्साह एवं वीरता का संचार, जबकि शत्रु के मन में भय उत्पन्न होना

‘सनातन राष्ट्र शंखनाद महोत्सव’ का बोधचिन्ह है ‘शंखनाद करनेवाला श्रीकृष्ण’ ! श्रीकृष्ण द्वारा उनके पांचजन्य से शंखनाद करने के उपरांत महाभारत के युद्ध का आरंभ हुआ । प्रत्येक दिन के युद्ध का आरंभ एवं युद्धविराम शंखनाद से होता था । शंखनाद के कारण सेना में उत्साह एवं वीरता का संचार होता था तथा उसी समय शत्रु के मन में भय भी उत्पन्न होता था ।

२. महाभारतकालीन शंखनाद तथा शंखों के नाम !

युद्ध के समय भगवान श्रीकृष्ण ने ‘पांचजन्य’, अर्जुन ने ‘देवदत्त’, भीमसेन ने ‘पौंड्र’, युधिष्ठिर ने ‘अनंतविजय’, नकुल ने ‘सुघोष’, सहदेव ने ‘मणिपुष्पक’ तथा भीष्माचार्यजी ने ‘गंगनाभ’ नाम के शंख का नाद किया ।

३. भगवान श्रीकृष्ण द्वारा किया गया शंखनाद होती है ‘धर्म-आज्ञा’ !

श्रीकृष्ण जगत्पालक हैं । वे जगद्गुरु हैं । उनके शंखनाद की तुलना सिंह की दहाड से या अन्य शंखनाद से नहीं हो सकती । ब्रह्मांड के देवतातत्त्वों को युद्ध के लिए तैयार रहने  के लिए देवतापालक श्रीकृष्ण द्वारा किया गया शंखनाद मात्र एक संकेत नहीं है, अपितु वह ‘धर्म-आज्ञा’ है ।

प्रार्थना

भगवान श्रीकृष्ण के चरणों में प्रार्थना है कि  ‘धर्मसंस्थापना के इस कार्य में ‘सनातन राष्ट्र शंखनाद महोत्सव’ भगवान श्रीकृष्ण के पांचजन्य शंख के नाद की भांति कार्य करे !’