Delhi Blast Turkey Connection : भारत में बम विस्फोट कराने के लिए आतंकवादियों को तुर्कीये से मिल रहे थे आदेश !

  • अयोध्या एवं काशी लक्ष्य !

  • दिवाली में संभव न होने पर अब किया विस्फोट !

  • २६ जनवरी को भी था विस्फोट करने का नियोजन !

नई दिल्ली – आतंकवादी डॉ. उमर नबी एवं डॉ. मुजम्मिल शकील के पासपोर्ट के सत्यापन से उनके तुर्कीये जाने के प्रमाण मिले हैं । जांच में यह भी सामने आया है कि भारत में आतंकवादी आक्रमण का षड्‌यंत्र रचने के आदेश उन्हें तुर्कीये से ही मिल रहे थे । उमर नबी तथा मुजम्मिल शकील के कुछ संदिग्ध ‘टेलीग्राम’ समूहों में सम्मिलित होने के तुरंत पश्चात तुर्कीये के दौरे पर गए थे । तुर्कीये एवं अफगानिस्तान के नंगरहार प्रांत में बैठे ‘हैंडलर’ (संचालक) लगातार डॉ. उमर, साथ ही अन्य आतंकवादियों के संपर्क में थे । बंदी बनाए गए आतंकवादियों का लक्ष्य उत्तर प्रदेश के मंदिर, विशेष रूप से अयोध्या एवं वाराणसी के मंदिर थे । इसमें श्रीराम मंदिर होने की संभावना है ।

मौलवी इरफान मुख्य सूत्रधार

मौलवी इरफान

सूत्रों की जानकारी के अनुसार, तुर्कीये के एक ‘हैंडलर’ ने फरीदाबाद के आतंकवादी समूह से जुडे डॉक्टरों को आदेश दिए थे कि वे भारत भर में अपने-अपने स्थानों पर लक्ष्य तय करके फैल जाएं । इन लक्ष्यों में फरीदाबाद एवं उत्तर प्रदेश के सहारनपुर सम्मिलित थे । उन्होंने तुर्कीये दौरे के उपरांत ही इन दोनों स्थानों का चयन किया था । इससे पहले श्रीनगर से बंदी बनाए गए मौलवी (इस्लाम का धार्मिक नेता) इरफान अहमद को फरीदाबाद समूह का सूत्रधार माना गया है तथा वह भारत से ही अफगानिस्तान के ‘हैंडलर’ के संपर्क में था ।

मौलवी इरफान अहमद ही फरीदाबाद के आतंकवादी समूह का मुख्य सूत्रधार था । वह चिकित्सा महाविद्यालयों के छात्रों को कट्टरपंथी बना रहा था । उच्च शिक्षित छात्रों का बुद्धिविभ्रम करके उन्हें जिहाद के लिए तैयार कर रहा था । वह श्रीनगर के शासकीय चिकित्सा महाविद्यालय में ‘पैरामेडिकल’ (चिकित्सा सेवा से संबंधित सहायता करने वाला) कर्मचारी के रूप में काम करता था ।

इरफान चिकित्सा महाविद्यालय के छात्रों से लगातार संपर्क में था । इसके साथ ही वह नौगाम की एक मस्जिद में इमाम भी था । उसने मुख्य रूप से फरीदाबाद के छात्रों को जिहादी बनाया ।

इरफान पर ‘जैश’ का प्रभाव

इरफान अहमद ‘जैश-ए-मोहम्मद’ आतंकवादी संगठन से प्रभावित था । वह छात्रों को ‘जैश’ से संबंधित एवं ‘जैश’ प्रमुख मसूद अजहर के भाषणों के वीडियो दिखाता था । साथ ही वह सैटेलाइट फोन द्वारा अफगानिस्तान के व्यक्तियों से संपर्क में था । इरफान अहमद तथा डॉ. उमर लगातार संपर्क में थे ।

एक अन्य डॉक्टर को बंदी बनाया गया

इस प्रकरण में दक्षिण कश्मीर के डॉ. तजामुल को बंदी बनाया गया है । वह श्रीनगर के चिकित्सालय में काम करता था ।

अभी भी ३०० किलो अमोनियम नाइट्रेट नहीं मिला

कश्मीर से ३ सहस्र २०० किलो अमोनियम नाइट्रेट फरीदाबाद भेजा गया था । उसमें से २ सहस्र ९०० से अधिक अधिग्रहित कर लिया गया है, परंतु अभी भी ३०० किलो गायब है । उसको ढूंढा जा रहा है । उसमें से कुछ भाग दिल्ली के विस्फोट में प्रयोग होने की भी संभावना है । प्राथमिक जानकारी है कि यह विस्फोटक बांग्लादेश के रास्ते नेपाल तथा फिर भारत के कश्मीर में आया था । यह सामने आया है कि अमोनियम नाइट्रेट एक खाद कंपनी से चोरी करके प्राप्त किया गया था ।

लाल किले के पास का विस्फोट पूर्वनियोजित होने का दावा

प्राथमिक जांच से यह सामने आ रहा है कि लाल किले के पास जिहादी आतंकवादियों द्वारा किया गया बम विस्फोट पूर्वनियोजित था । मूल रूप से इन आतंकवादियों का लक्ष्य दिवाली तथा आने वाला गणतंत्र दिवस था । दिवाली में उन्हें बम विस्फोट करना संभव नहीं हो पाया । उसमें उन पर कार्रवाई होने के कारण उतावलापन में लाल किले के पास विस्फोट किया गया, ऐसी जानकारी मिली है ।

बंदी बनाए गए आतंकवादी डॉ. मुजम्मिल ने पूछताछ में बताया कि जनवरी २०२५ के आरंभ में उसने तथा डॉ. उमर ने लाल किला परिसर की जानकारी जुटाई थी । अगले वर्ष २६ जनवरी को दिल्ली में बडा विस्फोट करने का उनका षड्‌यंत्र था । इसके अलावा, कुछ दिन पूर्व ही हुई दिवाली में भीडभाड वाले बाजार पर आक्रमण करने का भी षड्‌यंत्र था; परंतु वह आखिरी क्षण में निरस्त कर दिया गया । सूत्रों का कहना है कि फरीदाबाद में छापा पडने के उपरांत डॉ. उमर घबरा गया तथा वह चार पहिया वाहन में विस्फोटक लेकर दिल्ली की ओर निकल पडा । उसी से लाल किले के पास विस्फोट हुआ ।

डॉ. मुजम्मिल के मोबाइल फोन की जांच से पता चला है कि उसने इस वर्ष कई बार दिल्ली का दौरा किया था । उसके मोबाइल फोन से दिल्ली के कुछ स्थानों की तस्वीरें भी मिली हैं । वह दिल्ली में किससे मिलने आता था, इसकी जांच की जा रही है ।

कश्मीर में २०० स्थानों पर छापे

बताया जा रहा है कि कश्मीर में जांच एजेंसियों ने २०० स्थानों पर छापे मारे हैं । इसमें शोपियां में ‘जमात-ए-इस्लामी’ संगठन के कार्यकर्ताओं के घरों पर छापे मारे गए । पुलिस ने मौलाना इश्तेफाक को बंदी बना लिया है । अधिग्रहित किए गए विस्फोटक लगभग ३० से ४० दिनों की अवधि में तैयार किए गए थे तथा उन्हें ३-४ चरणों में फरीदाबाद लाया गया था ।

हरियाणा के एक मौलवी को बंदी बनाया गया है, जो ‘अल फलाह विश्वविद्यालय’ में रह रहा था ।

२ वर्षों से विस्फोटक एकत्रित कर रही थी डॉ. शाहीन !

जांच में बताया गया है कि आतंकवादी डॉ. शाहीन शाहीद पिछले २ वर्षों से विस्फोटक सामग्री जमा कर रही थी । पूछताछ में उसने स्वीकार किया कि वह अपने सहयोगी डॉक्टरों के साथ देशभर में आतंकवादी आक्रमण का षड्‌यंत्र रच रही थी ।

डॉ. शाहीन ‘जैश’ की महिला भर्ती शाखा से जुडी थी । उसे महिलाओं की भर्ती का दायित्व दिया गया था । उसका लक्ष्य चिकित्सा शिक्षा लेने वाली छात्राओं पर था; क्योंकि उन पर संदेह उत्पन्न नहीं होता ।

डॉ. शाहीन के भाई डॉ. परवेज से पूछताछ

गिरफ्तार की गई आतंकवादी डॉ. शाहीन का भाई डॉ. परवेज को लक्ष्मणपुरी स्थित उसके घर से हिरासत में लिया गया है तथा उसे पूछताछ के लिए दिल्ली ले जाया गया है । डॉ. शाहीन लगातार डॉ. परवेज के संपर्क में थी ।

मुंबई पर आक्रमण जैसा था षड्‌यंत्र : २०० बम बनाए जाने थे !

हरियाणा के एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने बताया कि आतंकवादी समूह का लक्ष्य २०० से अधिक शक्तिशाली बम बनाने का था । इसलिए २ सहस्र ९०० किलो विस्फोटक, टाइमर एवं बम बनाने की सामग्री लाई गई थी । ये आतंकवादी २६ नवंबर २००८ के मुंबई पर आक्रमण जैसा बडा आक्रमण करने का षड्‌यंत्र रच रहे थे । इसमें कई शहरों में एक साथ बम विस्फोट करना ही नहीं, अपितु सार्वजनिक स्थानों पर ‘एके-५६’ तथा ‘एके-४७’ जैसी राइफलों से अंधाधुंध गोलीबारी करके लोगों की हत्या करना भी समाहित था । इतना ही नहीं, चिकित्सालयों को भी लक्ष्य बनाया जाना था ।

धार्मिक तनाव उत्पन्न करने का प्रयास था !

हरियाणा के वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने बताया कि दिल्ली में धार्मिक तनाव उत्पन्न करने के लिए आतंकवादियों ने लाल किला, इंडिया गेट एवं कॉन्स्टिट्यूशन क्लब, साथ ही उत्तर प्रदेश के धार्मिक स्थलों को लक्ष्य बनाने की योजना बनाई थी । गुरुग्राम एवं फरीदाबाद में भी ऐसे ही लक्ष्य चुने गए थे ।

‘अल फलाह विश्वविद्यालय’ की वेबसाइट हैक करके लिखा, ‘भारत में जिहादियों को स्थान नहीं’ !

हरियाणा के फरीदाबाद स्थित ‘अल-फलाह विश्वविद्यालय’ की वेबसाइट हैक कर ली गई है । वेबसाइट पर लिखा गया है, ‘भारतीय भूमि पर ऐसे इस्लामी विश्वविद्यालय के लिए स्थान नहीं है । यदि आपको भारत में रहना है, तो आपको शांति से रहना चाहिए । अन्यथा इस्लामी जिहाद में समाहित लोगों को भारत छोडकर पाकिस्तान चले जाना चाहिए । इसे एक चेतावनी समझें; क्योंकि हम आपकी देश विरोधी गतिविधियों पर दृष्टि रख रहे हैं । उन्हें बंद करें, अन्यथा हम आपको नष्ट कर देंगे ।’

दिल्ली के विस्फोट के उपरांत पुलिस ने ‘अल-फलाह विश्वविद्यालय’ पर छापा मारकर जांच की थी । पुलिस सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, यहां से १३ लोगों को हिरासत में लिया गया है, जिसमें ७ डॉक्टर, ५ छात्र एवं एक युवती समाहित है । जिस गाडी में विस्फोट हुआ, उसे चलाने वाला डॉ. उमर इसी विश्वविद्यालय में पढाता था । विस्फोट में प्रयोग की गई गाडी बहुत दिनों तक विश्वविद्यालय परिसर में खडी की गई थी ।

दिल्ली बम विस्फोट के पीछे पाकिस्तानी सेना का हाथ ! – पाकिस्तानी पत्रकार ताहा सिद्दीकी का दावा

पाकिस्तानी पत्रकार ताहा सिद्दीकी

पाकिस्तानी पत्रकार ताहा सिद्दीकी ने दावा किया है कि ‘दिल्ली बम विस्फोट एवं पाकिस्तान के इस्लामाबाद में हुए विस्फोट के पीछे पाकिस्तानी सेना का हाथ है ।’ उन्होंने लिखा (पोस्ट किया) है कि दोनों विस्फोटों में आत्मघाती आतंकवादियों का प्रयोग हुआ । पाकिस्तान के सेना प्रमुख आतंकवाद का प्रयोग अपनी विदेश नीति के हिस्से के रूप में कर रहे हैं । इसलिए दक्षिण एशिया में शांति नहीं, अपितु अशांति है ।