The Jaipur Dialogues Shatrubodh : ‘हंगर इंडेक्स’ तथा ‘हैप्पीनेस इंडेक्स’ में भारत को निचले पायदान पर दिखाना शत्रु राष्ट्रों के षड्‌यंत्र !

  • ‘जयपुर डायलॉग्स २०२५’ के परिसंवाद में ‘शत्रुबोध’ विषय पर दूसरे दिन भी तीखी चर्चा !

  • वक्ताओं ने भारत-विरोधी कथानकों की खुले आम पहचान कराई !

  • हिन्दू जनजागृति समिति के राष्ट्रीय प्रवक्ता रमेश शिंदे ने भी किया मार्गदर्शन !

(‘हंगर इंडेक्स’ वह आंकडा है जो विश्व के देशों में भूख के अनुपात को दर्शाता है । इसमें किसी देश का रैंक (क्रमांक) जितना नीचे होता है, उतनी ही अधिक वहां के लोग भूखे रहते हैं, साथ ही वहां बच्चों की मृत्यु दर भी अधिक होती है ।)
(‘हैप्पीनेस इंडेक्स’ अर्थात विश्व के देशों में लोग अपने जीवन में कितने हद तक खुशी और संतोष प्राप्त करते हैं, यह अनुपात दर्शाता है । यह संख्या जितनी कम होती है, उतने ही वहां के लोग असंतुष्ट एवं दुखी माने जाते हैं ।)

बाएं से: राजेश कुमार सिंह, विनोद कुमार, शांतनु गुप्ता, अभिजीत जोग, आनंद रंगनाथन, गर्वित भारद्वाज, उदय माहुरकर एवं अनुपम मिश्रा

जयपुर (राजस्थान) – ‘राष्ट्रवादियों के महाकुंभ’ के रूप में जाने जानेवाले ‘जयपुर डायलॉग्स २०२५’ परिसंवाद में, दूसरे दिन ‘शत्रुबोध’ विषय पर विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञों ने भारत पर होने वाले आंतरिक एवं बाह्य आक्रमणों पर गहन चर्चा की । लेखक तथा विचारक आनंद रंगनाथन, प्रमुख फिल्म समीक्षक राजेश कुमार सिंह, राजनीतिक विश्लेषक शांतनु गुप्ता, शोधकर्ता विनोद कुमार, पूर्व मुख्य केंद्रीय सूचना आयुक्त उदय माहुरकर, गर्वित भारद्वाज एवं वरिष्ठ पत्रकार अनुपम मिश्रा ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ से लेकर चीन-पाक संबंधों में नई गतिविधियों तक कई विषयों पर प्रकाश डालते हुए भारत को सजग रहने का आह्वान किया । कार्यक्रम को हिन्दू जनजागृति समिति के राष्ट्रीय प्रवक्ता श्री. रमेश शिंदे ने भी संबोधित किया ।

प्रमुख चर्चा एवं वक्ताओं के विचार

‘लुटियंस (दिल्ली के साम्यवादी पत्रकार) बनाम नेशनलिस्ट (राष्ट्रवादी पत्रकार) – कौन जीत रहा है ?’ इस विषय पर सत्र में प्रसिद्ध पत्रकार सुशांत सिन्हा, आनंद नरसिम्हन, प्रदीप भंडारी, भाऊ तोरसेकर तथा हर्ष कुमार ने तथाकथित ‘लुटियंस’ मीडिया द्वारा चलाए जा रहे मोदी विरोधी अभियान पर प्रहार किया । उन्होंने कहा कि पिछले ११ वर्षों में भारत में बडा परिवर्तन आया है; भारत को ‘हंगर इंडेक्स’ तथा ‘हैप्पीनेस इंडेक्स’ में पाकिस्तान जैसे देशों से भी नीचे दिखाना शत्रु राष्ट्रों की चाल है ।

कार्यक्रम में उपस्थित श्रोताओं का मार्गदर्शन करते वक्ता

‘लॉ-फेयर शत्रुबोध’ इस सत्र में अयोध्या प्रकरण के सुप्रसिद्ध अधिवक्ता विष्णु शंकर जैन, सर्वोच्च न्यायालय के सुप्रसिद्ध अधिवक्ता अश्विनी उपाध्याय, विजय सरदाना, सामाजिक कार्यकर्ता नाजिया इलाही खान एवं पत्रकार अजित भारती ने न्याय व्यवस्था में विसंगतियों को सामने रखा । इस चर्चा का संचालन ‘जयपुर डायलॉग्स’ के अध्यक्ष संजय दीक्षित ने किया । (लॉ-फेयर का अर्थ है : कानून का उपयोग अपना वर्चस्व स्थापित करने या कोई विशेष कथानक रचने के लिए करना ।)

चर्चासत्र : ‘आई लव मुहम्मद’ के विरुद्ध (बनाम) बुलडोजर न्याय !

इस चर्चासत्र में नाजिया, साहिल एवं नीरज अत्री ने बताया कि धर्मनिरपेक्षता का अर्थ हिन्दू देवी-देवताओं का अपमान करना नहीं है । उन्होंने स्पष्ट किया कि ‘आई लव मुहम्मद’ प्रकरण में उत्तर प्रदेश सरकार का रुख सही था । उन्होंने मत व्यक्त किया कि राज्य में कई अवैध कार्यों में मुस्लिम घटक सम्मिलित होने के कारण ‘बुलडोजर कार्रवाई’ न्यायसंगत है । उन्होंने ममता बनर्जी एवं ओवैसी पर भी लक्ष्य साधा तथा कहा कि ‘घुसपैठियों के वोटों पर टिकी सरकारें भारत के लिए संकट हैं ।’

कार्यक्रम में उपस्थित गणमान्य व्यक्ति

आज भी समाचार पत्रों की शक्ति कायम !

तेजतर्रार हिन्दुत्ववादी विचारक अभिषेक तिवारी, शेफाली वैद्य, आनंद रंगनाथन एवं प्रखर श्रीवास्तव ने कहा कि आज भी ‘प्रिंट मीडिया’ ही सबसे विश्वसनीय माध्यम है । उन्होंने यह भी मत व्यक्त किया कि ‘वक्फ’ जैसे संस्थानों को सीमित किए बिना विकास नहीं होगा ।

धर्माधारित आरक्षण असंवैधानिक !

‘५० प्रतिशत से ऊपर आरक्षण देना अच्छा, बुरा या भद्दा ?’ इस विषय पर सत्र में अधिवक्ता विष्णु शंकर जैन, ‘ब्रहत फाउंडेशन’ के अध्यक्ष पंकज सक्सेना तथा प्रसिद्ध हिन्दुत्ववादी पत्रकार अजित भारती ने विचार रखे । इस चर्चा का सार यह था कि ‘संविधान में धर्माधारित आरक्षण को स्थान नहीं है; परंतु बंगाल एवं कर्नाटक में मुसलमानों को ओबीसी आरक्षण देकर वोट बैंक की राजनीति चलती है । कुछ तथाकथित ‘दलित नेता’ हिन्दू देवी-देवताओं का अपमान करते हैं, फिर भी हिन्दू धर्म नहीं छोडते’, इस बात पर बल (जोर) दिया गया ।

हलाल मांस नहीं चाहिए, अतः हिन्दू खाटिक (कसाई) समाज को जागरूक करें ! – रमेश शिंदे

व्यासपीठ पर बाईं ओर से श्री देवदत्त माझी, डॉ. ओमेंद्र रत्नू, श्री संदीप बालकृष्ण, श्री रमेश शिंदे एवं श्री जय आहूजा

भारत में ‘हलाल अर्थव्यवस्था’ (Halaal Economy) इस शत्रूबोध के अंतर्गत हुए चर्चासत्र को हिन्दू जनजागृति समिति के श्री रमेश शिंदे के साथ श्री जय आहूजा, डॉ. ओमेंद्र रत्नू तथा श्री देवदत्त माझी ने संबोधित किया ।

इस अवसर पर श्री रमेश शिंदे ने कहा कि :

१. प्रत्येक स्थान के मुसलमान हलाल उत्पादों की मांग करते हैं; परंतु एक भी हिन्दू ‘हलाल उत्पाद नहीं चाहिए’, इस प्रकार ईक्षा नहीं दर्शाता एवं न ही ऐसी मांग करता है । यदि किसी मुसलमान से कहा जाए कि ‘तुझे ५० रुपये कम दाम में झटका मांस देता हूं’, तो भी वह उसे अस्वीकार कर देता है । इसके विपरीत, हिन्दू को झटका हो या हलाल, इससे कोई लेना-देना नहीं होता ।

२. दूसरी ओर, हिन्दू मांस का व्यापार करने के लिए तैयार ही नहीं होते । इसमें उन्हें कुछ कठिनाइयां होने का पता चला । यदि यह व्यवसाय किया, तो विवाह के लिए लडकियां नहीं मिलतीं । कुछ स्थानों पर यह एक अनुचित धारणा भी है कि जानवरों को मारने पर हमें पाप लगता है । इसलिए जो हिन्दू व्यापारी मांस बेचते हैं, वे मुसलमानों द्वारा मारे गए जानवर ही लाकर उनका मांस बेचते हैं ।

३. खाटिक समाज के कई लोग अशिक्षित एवं धर्मशिक्षित न होने के कारण उनका इस विषय पर मार्गदर्शन होना आवश्यक है । जब इस्लाम नहीं था, तब भी लोग मांसाहार करते ही थे । तब यदि हिन्दू लोग जानवरों की हत्या करते थे, तो क्या उन्हें पाप नहीं लगता था ? इसलिए इस संदर्भ में हिन्दुओं को मार्गदर्शन देना आवश्यक है ।

४. इस संपूर्ण भयावहता को आंकडों के रूप में देखें, तो केवल मुर्गी तथा बकरी के मांस का कुल व्यापार १० सहस्र (हजार) करोड रुपये का है। इसमें से अधिकांश मांस का उत्पादन हलाल पद्धति से होता है ।

‘हिन्दू राष्ट्र समन्वय समिति’ के माध्यम से हिन्दुत्वनिष्ठ संगठन किस प्रकार एकत्रित होकर हिन्दू धर्म की रक्षा का कार्य कर रहे हैं, इस विषय में भी श्री शिंदे ने इस अवसर पर जानकारी दी ।

इस समय चिकित्सक (आधुनिक वैद्य) डॉ. रत्नू ने कहा कि हलाल मांस स्वास्थ्य की दृष्टि से हानिकारक है तथा झटका मांस सुरक्षित है ।