NSA Ajit Doval : नेपाल, बांग्लादेश एवं श्रीलंका में हुए सत्तापरिवर्तन बुरे सरकारों के उदाहरण !

भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोवाल का प्रतिपादन

भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोवाल

नई देहली – किसी राष्ट्र की सच्ची शक्ति उसकी सरकार की शक्ति में होती है । हाल ही में नेपाल, बांग्लादेश एवं श्रीलंका में हुए सत्तापरिवर्तन बुरे सरकारों के उदाहरण हैं, ऐसा प्रतिपादन भारत सरकार के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोवाल ने किया । ‘राष्ट्रीय एकता दिवस’ के उपलक्ष्य में आयोजित व्याख्यान में वे ऐसा बोल रहे थे ।

अजित डोवाल द्वारा रखे गए सूत्र

१. बुरी सरकारों के कारण सदैव ही महान साम्राज्यों, लोकतंत्रों एवं राजतंत्रों का पतन हुआ है । जब सरकार तानाशाह बन जाती हैं तथा संस्थाएं दुर्बल होने लगती हैं, तब देश का पतन आरंभ होता है ।

२. जब सरकारें दुर्बल, स्वार्थी अथवा भ्रमित होते हैं, उस समय उसके परिणाम एक जैसे ही होते हैं । संस्था राष्ट्र की रीढ होते हैं तथा उसका निर्माण एवं पालनपोषण करनेवाले लोग उसकी नींव सशक्त बनाते हैं ।

३. एक सुरक्षा अधिकारी की दृष्टि से मैं शासन की ओर केवल एक प्रशासन के रूप में नहीं देखता, जबकि राष्ट्रीय सुरक्षा एवं विकास के लिए बनी एक व्यवस्था के रूप में देखता हूं । किसी संस्कृति का राष्ट्र-राज्य में रूपांतरण करना एक कठिन कार्य है तथा वह केवल सशक्त शासन से ही संभव है । सरकार सामान्य अपेक्षाओं की उस पार जाएं ।

४. सरकार अब नई परिस्थिति से लड रही है । इसमें आया सबसे बडा परिवर्तन है सामान्य मनुष्य की बढती हुई जागरूकता ! सामान्य मनुष्य अब अधिक महत्त्वाकांक्षी है, उसकी अपेक्षाएं बढी हैं तथा राज्य को उत्तरदायी होना चाहिए ।

सरदार पटेल के दृष्टिकोन की पुनरावृत्ति की आवश्यकता !

वर्ष २०२५ में सरदार पटेल के दृष्टिकोण के पुनरावृत्ति की आवश्यकता है । उन्होंने यह दिखा दिया कि केवल एक सशक्त एवं निष्पक्ष शासन व्यवस्था ही विभिन्नता से सजे इस राष्ट्र को एकत्रित रख सकती है । भारत वर्तमान समय में केवल एक परिवर्तन से ही नहीं, अपितु बडे स्तर के परिवर्तन से गुजर रहा है, जहां शासनव्यवस्था, सामाजिक रचना एवं वैश्विक व्यवस्था में गति से परिवर्तन आ रहा है । ऐसी स्थिति में सरदार पटेल के दृष्टिकोण अधिक प्रासंगिक बनाते हैं ।

डोवाल ने बुरे सरकारों के बताए ३ कारण !

अ. तानाशाही प्रवृत्ति : भेदभाव करनेवाले कानून, न्याय मिलने में लगनेवाला विलंब तथा मानवाधिकारों का उल्लंघन

आ. संस्थात्मक पतन : भ्रष्ट अथवा असंवेदनशील सेना, नौकरशाही एवं सुरक्षा संरचना

इ. आर्थिक असफलता : अन्न, पानी का अभाव, महंगाई एवं करों का बोझ