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नई दिल्ली – भटकते कुत्तों के प्रकरण में सभी राज्यों तथा केंद्रशासित प्रदेशों को अधिसूचनाएं भेजी गई थीं । तथापि प्रतिज्ञापत्र प्रस्तुत नहीं किया गया । आपके अधिकारी समाचारपत्र नहीं पढते या सामाजिक माध्यमों को नहीं देखते क्या ? सर्वत्र इस विषय पर चर्चा हुई थी । विश्व में भारत की छवि बिगड रही है । यह जानते हुए भी उन्होंने कोई पहल नहीं की । अब सभी राज्यों के मुख्य सचिवों को ३ नवम्बर के दिन न्यायालय में उपस्थित रहना होगा, अन्यथा हम न्यायालय को ही विधानसभा सभागृह में स्थापित करेंगे — ऐसे शब्दों में सर्वोच्च न्यायालय ने देश के राज्यों तथा केंद्रशासित प्रदेशों को भटकते कुत्तों के प्रकरण में फटकार लगाई ।
भटकते कुत्तों के प्रकरण में राज्यों द्वारा अब तक प्रतिज्ञापत्र प्रस्तुत न किए जाने के कारण सर्वोच्च न्यायालय ने उपर्युक्त शब्दों में अप्रसन्नता व्यक्त की है । बंगाल तथा तेलंगाणा ने प्रतिज्ञापत्र प्रस्तुत किया है, अतः उनके मुख्य सचिवों को उपस्थित रहने की आवश्यकता नहीं होगी ।
अगस्त माह में सर्वोच्च न्यायालय ने सभी राज्यों तथा केंद्रशासित प्रदेशों को अधिसूचनाएं जारी की थीं । उसी समय दिल्ली-एन.सी.आर. (राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र) में भटकते कुत्तों को पकडकर उनका निर्बीजकरण तथा लसीकरण कर उन्हें उसी क्षेत्र में पुनः छोडने के निर्देश दिए गए थे ।
.. अन्यथा दंड लगाया जाएगा !
न्यायमूर्तियों ने विशेष रूप से दिल्ली सरकार से प्रश्न किया कि दिल्ली ने अब तक प्रतिज्ञापत्र क्यों प्रस्तुत नहीं किया ? मुख्य सचिव को इसका स्पष्टीकरण देना होगा, अन्यथा दंड लगाया जाएगा एवं कठोर कदम उठाए जाऐंगे ।
कुत्तों के आक्रमण देश की छवि बिगाडते हैं !
न्यायालय ने सुनवाई के समय कहा कि अगस्त के आदेश के पश्चात् देशभर में भटकते कुत्तों के आक्रमण की अनेक घटनाऐं घटी हैं । छोटे बच्चों पर होनेवाले आक्रमण चिंताजनक हैं । हाल ही में पुणे में एक बालक पर कुत्ते ने आक्रमण किया, उससे पूर्व एक बालिका के संबंध में भी ऐसी ही घटना घटी थी तथा अब भंडारा जिले में २० कुत्तों ने आक्रमण किया है । इन घटनाओं से देश की अंतरराष्ट्रीय छवि कलुषित हो रही है । अभी भी राज्य सरकारों द्वारा प्रतिज्ञापत्र प्रस्तुत नहीं किए गए हैं । दो महीने व्यतीत हो चुके हैं और अब तक उत्तर नहीं दिया गया है ।
संपादकीय भूमिका
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