दीपावली का आनंद द्विगुणित करनेवाली सनातन की ग्रंथमाला : हिन्दू संस्कार एवं परंपरा

त्योहार मनाने की उचित पद्धतियां एवं अध्यात्मशास्त्र
- त्योहार धर्मशास्त्रानुसार ही क्यों मनाने चाहिए ?
- चैत्र शुक्ल प्रतिपदा सारे संसार का ही वर्षारंभ क्यों है ?
- दशहरा, मकर संक्रांति आदि का क्या महत्त्व है ?
धार्मिक उत्सव एवं व्रतों का अध्यात्मशास्त्र
- उत्सव एवं व्रतों का क्या महत्त्व है ?
- उत्सव में अनुचित प्रकार रोकने हेतु क्या करें ?
- चातुर्मास (चौमासे) में अधिक व्रत क्यों होते हैं ?
सात्त्विक रंगोलियां (लघुग्रंथ)
केवल सुंदर दिखनेवाली रंगोलियों की अपेक्षा देवताओं के तत्त्व आकृष्ट एवं प्रक्षेपित करनेवाली रंगोलियां लाभदायक होती हैं । देवताओं की उपासना हेतु तथा त्योहार, जन्मदिन आदि प्रसंगों में बनाई जानेवाली रंगोलियां इस लघुग्रंथ में प्रस्तुत हैं ।
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सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. जयंत आठवलेजी के ओजस्वी विचार
कोटि कोटि प्रणाम !
सनातन धर्म के मूर्तिमान स्वरूप सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. आठवलेजी के श्री चरणों में कोटि-कोटि वंदन !
संपादकीय : गुरुभ्यो नमः ।
प.पू. भक्तराज महाराजजी द्वारा अपने शिष्य डॉ. आठवलेजी के प्रति व्यक्त गौरवोद्गार !
इरोड (तमिलनाडु) में ‘महासुदर्शन याग’ एवं ‘आयुष्य होम’ भावपूर्ण वातावरण में संपन्न !