
१. दिन में ५ से १० कप मात्रा में बार-बार उबाली हुई चाय पीने से पाचनक्षमता में विकार उत्पन्न होता है, जिससे अम्लपित्त, अल्सर, जोडों का दर्द, शरीर में पीडा तथा बवासीर जैसी अनेक बीमारियां होती हैं ।
२. भारत में चाय में चीनी मिलाने का स्तर विश्व में सबसे अधिक है । उसके कारण बैठकर काम करनेवाले व्यक्ति मधुमेह, कॉलेस्ट्रॉल, हृदय की बीमारी, मोटापा जैसी बीमारियों को आमंत्रण दे रहे हैं ।
३. दूध-चीनी रहित चाय भी अधिक मात्रा में पीने से उसके कसैले स्वाद के कारण अतिरिक्त मात्रा में आंतों का कब्ज (मलावष्टंभ), रक्तचाप बढना, पक्षाघात जैसी बीमारियां तथा शुक्राणुओं की संख्या अल्प होने जैसी बीमारियां होती हैं ।
४. दूध, चीनी तथा चाय के पाउडर को एकत्रित कर उबाली जानेवाली चाय कफ, पित्त एवं वात को बढानेवाली, साथ ही गरम गुणवाली होती है ।
५. टपरी पर एल्यूमिनियम के बरतन में चाय उबाली जाती है । खाद्य पदार्थाें को एल्यूमिनियम के साथ होनेवाले लंबे समय का संपर्क ‘स्मृतिविनाश’ जैसी असाध्य बीमारी उत्पन्न करनेवाला होता है ।
६. दिन में २ बार चाय पीने से (१० रुपए की एक कप चाय) पूरे वर्ष में ७३०० रुपए का खर्चा होता है । चाय पीने के कारण इतने पैसों की हानि होती है ।
७. भारत जैसे समशीतोष्ण क्षेत्र में चाय कभी भी बहुत अधिक पीनेवाला पेय पदार्थ नहीं है ।
८. स्वाद में कसैला होने के कारण उससे बवासीर होता है । कुछ लोगों को चाय न पीने से शौच नहीं होता, जो आदत के कारण होता है । शौच का आवेग उत्पन्न करना चाय का काम नहीं है । चाय रक्त की अम्लता बढाता है ।
९. नियमित चाय पीने से हड्डियां खोखली हो जाती हैं, नसें सिकुडने से रक्तचाप बढता है तथा अम्लपित्त का कष्ट बढता है ।
१०. हम चाय के साथ कुछ पदार्थ भी खाते हैं । इन पदार्थाें में नमक हो, तो चाय में विद्यमान चीनी एवं दूध के साथ उस नमक का संपर्क आने से चाय शरीर के लिए मारक सिद्ध होती है ।
११. वास्तव में देखा जाए, तो चाय मदिरा से भी अधिक घातक है ।
– वैद्या (श्रीमती) मुक्ता लोटलीकर, पंचम आयुर्वेद, पुणे. (२४.९.२०२५)
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