विदेश से दान इकट्ठा करने के कानून का दुरुपयोग –

नई दिल्ली – विदेश से दान इकट्ठा करके कानून का दुरुपयोग कर स्वयंसेवी संस्थाओं के माध्यम से आतंकवाद को निधि पहुंचाने का षड्यंत्र उजागर हुआ है । गुप्त रूप से कार्य करने वाली (खुफिया) एजेंसियों की जानकारी के अनुसार कनाडा, ब्रिटेन और ऑस्ट्रेलिया में सक्रिय खालिस्तानी और इस्लामिक आतंकवादी कई स्वयंसेवी संस्थाओं का दुरुपयोग कर रहे हैं । इन संस्थाओं के नाम पर मिली दानराशि आतंकवादी गतिविधियों और जिहाद के प्रचार के लिए प्रयोग की जा रही है । कई स्वयंसेवी संस्थाएं जो ‘सिख कल्याण’ या मानवाधिकार के नाम पर पंजीकृत हैं, उन्होंने प्राप्त दान कट्टरपंथी संगठनों और भारत-विरोधी अभियानों में लगाया, ऐसा उन पर आरोप है । इनमें ‘खालसा एड’, ‘सिख रिलीफ’, ‘वर्ल्ड सिख ऑर्गनाइजेशन’ जैसी संस्थाएं सम्मिलित बताई गई हैं । कुछ ने ‘शहादत (हुतात्मा) दिवस’ जैसे कार्यक्रमों को निधि दी । इन कार्यक्रमों में ‘बब्बर खालसा इंटरनेशनल’ तथा ‘खालिस्तान टाइगर फोर्स’ जैसे खालिस्तानी आतंकवादी संगठनों के आतंकवादियों के छायाचित्रों का उपयोग किया तथा उनका उत्साह बढाया। कनाडा और ब्रिटेन की सरकारों ने ऐसी संदिग्ध स्वयंसेवी संस्थाओं पर निगरानी बडा दी है । भारतीय एजेंसियां भी ऐसे लेनदेन की जांच कर रही हैं ।
१. गुप्तचर (खुफिया) एजेंसियों की जानकारी के अनुसार ऐसी संस्थाओं को पाकिस्तान की गुप्तचर (खुफिया) संस्था आई.एस.आइ. के नियंत्रण में होने वाले इंटर-सर्विसेस वेलफेयर फंड से भी दान मिला । यह राशि ‘आपत्ति सहायता’ के नाम पर भेजी गई ,परन्तु वास्तविकता में वह आतंकवादियों तक पहुंचाई गई ।
२. जांच में यह भी पता चला कि कुछ निधि हवाला मार्ग और क्रिप्टो वालेट्स के माध्यम से खालिस्तानी समर्थकों तक भेजी गई ।
३. इन संस्थाओं ने सामुदायिक कार्यक्रमों के माध्यम से युवाओं में कट्टरतावादी विचारधारा पनपाई । कई गुरुद्वारों और सामुदायिक केंद्रों ने वहां आने वाले युवाओं में खालिस्तानी विचारधारा का विस्तार करने के लिए डिजिटल माध्यमों का उपयोग किया ।
इस्लामी स्वयंसेवी संस्थाओं का दुरुपयोग –
गुप्तचर (खुफिया) एजेंसियों की रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि कनाडा और ब्रिटेन की कुछ इस्लामी स्वयंसेवी संस्थाओं का उपयोग आतंकवादियों के वित्तपोषण के लिए हुआ । इन संस्थाओं के माध्यम से हमास, लश्कर-ए-तोयबा और अल-कायदा तक धन भेजा गया । अनाथों के शिक्षा और सहायता कार्य के नाम पर जमा किए गए पैसे अनेक स्तरों से जमात-उद-दा’वा और फलाह-ए-इंसानियत जैसी कट्टरतावादी संस्थाओं तक पहुंचा ए गए । इसके अतिरिक्त इन संस्थाओं के बैंक खातों से आतंकवादियों के अन्य खर्चों के लिए भी पैसे दिए गए ।
हमास के आतंकवादियों को भी वित्तपोषण
कुछ इस्लामी संस्थाओं ने गाजा के लोगों, रोहिंग्या और कश्मीर के लोगों को सहायता देने के नाम पर एन्क्रिप्टेड क्राउडफंडिंग के सहारे धन इकट्ठा किया । एकत्र की गई धनराशि का कुछ हिस्सा हमास और इस्लामिक स्टेट-खुरासान जैसे आतंकवादी संस्थाओं को भेजा गया ।
संपादकीय भूमिकाऐसी संस्थाओं पर पाबंदी लगाकर उनके पदाधिकारियों को मृत्युदंड (फांसी) दिया जाना चाहिए। |
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