
कोल्हापुर : कोल्हापुर जिले के एक विद्यालय में ‘छात्राएं बिंदी लगाकर विद्यालय में न आएं तथा छात्र भी तिलक न लगाएं’, यह निर्णय लिया गया था । इस निर्णय के विषय में हिन्दुत्वनिष्ठ संगठनों को ज्ञात होते ही उन्होंने अभिभावकों के साथ विद्यालय आकर विद्यालय के प्रधानाध्यापक तथा शिक्षकों से स्पष्टीकरण मांगा । हिन्दुत्वनिष्ठ संगठनों की आक्रामक नीति के कारण अंततः विद्यालय ने छात्राओं को बिंदी लगाकर न आने का, साथ ही छात्रों को तिलक लगाकर न आने का निर्णय वापस लेने की जानकारी दी ।
छात्राएं एक जैसी बिंदियां नहीं लगातीं तथा अनुशासन का पालन नहीं करती, यह कारण बताकर संबंधित विद्यालय के व्यवस्थापन ने विद्यालय में छात्राओं को बिंदी लगाकर विद्यालय में न आने का, साथ ही छात्रों को तिलक लगाकर न आने का आदेश जारी किया था । (धर्मनिरपेक्ष शिक्षाप्रणाली से तैयार शिक्षक तथा प्रधानाध्यापकों को हिन्दू संस्कृति से लेना-देना न होने से वे ऐसा निर्णय लेते हैं ! – संपादक) छात्राओं ने अभिभावकों को इस आदेश के विषय में बताने के उपरांत इससे क्षुब्ध अभिभावक विद्यालय पहुंचे तथा उन्होंने प्रधानाध्यापक को खरी-खरी सुनाते हुए ‘आप छात्र-छात्राओं को किसी भी स्थिति में हिन्दू परंपराओं का पालन करने से तथा संस्कृति संजोने से रोक नहीं सकते; इसलिए आप तुरंत इस निर्णय को वापस लें’, यह मांग की । उसके उपरांत विद्यालय ने यह निर्णय वापस लिया ।
संपादकीय भूमिकाक्या यह पाकिस्तान है, जो बिंदी एवं तिलक लगाने पर रोक लगाई जाती है ? |
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