सर्वोच्च न्यायालय ने केरल के पादरी को दिया गया आजीवन कारावास का दंड किया स्थगित !

मुख्य न्यायाधीश गवई एवं न्यायाधीश विनोद चंद्रन् की खंडपीठ ने दिया निर्णय

नई देहली – केरल के कैथॉलिक पादरी एडविन पिगारेज को एक अल्पायू लडकी के साथ किए गए बलात्कार के प्रकरण में सुनाया गया दंड सर्वोच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश भूषण रामकृष्ण गवई एवं न्यायाधीश विनोद चंद्रन् की खंडपीठ ने स्थगित कर उसे जमानत दे दी है । उच्च न्यायालय ने उसे २० वर्ष के कठोर कारावास का दंड सुनाया था; परंतु पादरी पिगारेज ने १० वर्ष कारावास भुगता है, इसे ध्यान में लेकर इस दंड को स्थगित रखने का निर्णय लिया गया । मुख्य न्यायाधीश गवई एवं न्यायाधीश चंद्रन की खंडपीठ ने कहा कि आरोपी ने १० वर्ष दंड भुगता है, जो उच्च न्यायालय द्वारा दिए गए दंड से लगभग आधी है । उसके द्वारा किए गए अपील पर सुनवाई होने के लिए समय लगनेवाला है; इसलिए यह दंड स्थगित कर उसे जमानत दी गई है ।

कुछ दिन पूर्व मुख्य न्यायाधीश भूषण रामकृष्ण गवई एवं न्यायाधीश विनोद चंद्रन् की खंडपीठ ने ही खजुराहो (मध्यप्रदेश) के श्री वामन मंदिर के प्रकरण में निर्णय देते हुए ‘अब जाईए तथा भगवान को ही कुछ करने के लिए कहिए’, ऐसी टिप्पणी करने से सामाजिक माध्यमों पर उनकी आलोचना की गई थी ।

क्या है प्रकरण ?

वर्ष २०१४ से २०१५ की अवधि में केरल के एर्नाकुलम् के चर्च की प्रिस्बेटरी में पादरी पिगारेज द्वारा ८ वीं कक्षा में पढनेवाली एक अल्पायू लडकी पर बार-बार अत्याचार किए जाने का आरोप था । स्थानीय सत्र न्यायालय ने उसे पॉक्सो कानून तथा भारतीय आपराधिक धारा ३७६ के अंतर्गत दोषी मानकर आजीवन कारावास का दंड सुनाया था, उसके उपरांत केरल उच्च न्यायालय ने यह दंड अल्प कर उसे २० वर्ष का कारावास सुनाया ।