कश्मीर के हजरतमल दरगाह में अशोक चिन्ह हटाए जाने के प्रकरण पर मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला का धर्मांध वक्तव्य

श्रीनगर (जम्मू–कश्मीर) – यहां के हजरतमल दरगाह में स्थित एक अतिथिगृह पर अंकित अशोक चिन्ह कुछ धर्मांध मुसलमानों ने तोडकर हटा दिया । इस घटना का तीव्र विरोध हो रहा था, उसी समय जम्मू–कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने इस घटना का एक प्रकार से समर्थन किया । अब्दुल्ला ने कहा कि दरगाह में ‘राष्ट्रीय चिन्ह’ लगाने की आवश्यकता ही क्या थी ?
विपक्षी दल ‘पीडीपी’ की प्रमुख तथा भूतपूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने भी उमर के वक्तव्य का समर्थन किया । (कश्मीर को निगलने का प्रयास करनेवाले इन सभी राजनैतिक नेताओं को आजीवन कारावास में डालना चाहिए । अन्यथा ‘हिन्दु भारत’ के हाथों से कश्मीर निकल जाएगा, यही सत्य है ! – संपादक)

दूसरी ओर लद्दाख के उपराज्यपाल कविंदर गुप्ता ने कहा कि हजरतमल दरगाह के नूतनीकरण फलक पर अशोक चिन्ह की तोडफोड होने से बहुत दुःख हुआ है । अशोक चिन्ह हमारे सार्वभौमत्व तथा राष्ट्रीय अभिमान का प्रतीक है । ऐसे कृत्यों से हमारी राष्ट्रीय भावनाएं आहत होती हैं और उन्हें सहन नहीं किया जाएगा । दुष्कर्म करनेवालों पर कठोर कार्रवार्ई की जाएगी ।
क्या है प्रकरण ?
हजरतमल दरगाह में एक नवीन अतिथिगृह की हाल ही में आधारशिला रखी । इसमें वहां के फलक पर अशोक स्तंभ यह राष्ट्रीय प्रतीक स्थापित किया गया था । ४ सितम्बर को कुछ कट्टरपंथी मुसलमानों ने ‘अशोक स्तंभ यह मूर्ति के समान वस्तु है । यह इस्लाम विरोधी है’ ऐसा कहते हुए उसे पत्थरों से तोडकर हटा दिया ।
संपादकीय भूमिकाभारत का विभाजन हुए ७८ वर्ष हो गए, तथापि विभाजन कराने वाली धर्मांध शक्तियों के वंशज आज भी एक राज्य के मुख्यमंत्री हैं । यह तथ्य राष्ट्र के लिए लज्जाजनक है । |
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