PM Modi China President Meet : विश्वास, आदर एवं संवेदनशीलता द्वारा दोनों देशों के मध्य सम्बन्ध बढ़ाने के लिए वचनबद्ध ! – प्रधानमंत्री

  • चीन के शंघाई सहयोग संगठन के शिखर सम्मेलन में प्रधानमंत्री मोदी का चीन से संवाद

  • जिनपिंग की ट्रम्प पर अप्रत्यक्ष टीका

नई देहली / बीजिंग – दोनों देशों के मध्य सम्बन्ध परस्पर विश्वास पर आधारित होने चाहिए । भारत-चीन सम्बन्ध सशक्त करने की आवश्यकता है । सीमा व्यवस्थापन के विषय में हमारा करार हुआ है । परस्पर विश्वास, आदर एवं संवेदनशीलता के आधार पर हमारे सम्बन्ध आगे बढ़ाने के लिए हम वचनबद्ध हैं, ऐसा वक्तव्य प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने किया । शंघाई सहयोग संगठन के शिखर सम्मेलन के लिए प्रधानमंत्री मोदी चीन के तियानजिन नगर में हैं । उस पृष्ठभूमि पर प्रधानमंत्री मोदी एवं चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के मध्य ३१ अगस्त की प्रातःकाल द्विपक्षीय चर्चा हुई । उस समय प्रधानमंत्री बोल रहे थे ।


अमेरिका ने भारत पर लगाए हुए अत्यधिक आयातशुल्क की पृष्ठभूमि पर प्रधानमंत्री मोदी का पूरे ७ वर्ष पश्चात किया गया चीन का दौरा अत्यंत महत्त्वपूर्ण माना जा रहा है । लगभग एक घण्टा चली हुई इस बैठक में सीमावाद, कैलास मानसरोवर, व्यापार एवं परस्पर सम्बन्ध सशक्त करना, ऐसे सूत्रों पर चर्चा हुई । दोनों नेताओं की अंतिम भेंट अक्तूबर २०२४ में रूस के काझान में हुए ‘ब्रिक्स शिखर सम्मेलन’ में हुई थी ।

प्रधानमंत्री मोदी द्वारा प्रस्तुत महत्त्वपूर्ण सूत्र !

१. कैलास मानसरोवर यात्रा पुनः प्रारंभ हुई है ।
२. दोनों देशों के मध्य प्रत्यक्ष उड़ानें भी पुनः प्रारंभ हो रही हैं ।
३. हमारा सहयोग दोनों देशों के २.८ अरब लोगों के हित से जुड़ा हुआ है । वह संपूर्ण मानवजाति के कल्याण का मार्ग भी खोलेंगे ।

‘ड्रॅगन’ (चीन) एवं ‘हाथी’ (भारत) का साथ आना, यह दोनों देशों के लिए उचित विकल्प ! – जिनपिंग

शी जिनपिंग

प्रधानमंत्री मोदी से चर्चा करते हुए चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग बोले कि,

१. चीन एवं भारत ये दो प्राचीन संस्कृतियां हैं । हम विश्व के दो सर्वाधिक जनसंख्या वाले देश हैं तथा हम ‘ग्लोबल साउथ’ (दक्षिण गोलार्ध) के महत्त्वपूर्ण सदस्य भी हैं ।

२. अपने लोगों का जीवन सुधारने का, विकासशील देश के रूप में एकता का, तथा मानवीय समाज की प्रगति को प्रोत्साहित करने का ऐतिहासिक दायित्व हम दोनों पर है ।


३. अच्छे पड़ोसी तथा सौहार्दपूर्ण सम्बन्ध वाले मित्र बनना, एक-दूसरे की सफलता को सक्षम करने वाले भागीदार बनना, तथा ‘ड्रॅगन’ तथा ‘हाथी’ का साथ आना, यह दोनों देशों के लिए उचित विकल्प है ।

४. आज विश्व शताब्दी में एक ही बार होने वाले परिवर्तनों से का साक्षी हो रहा है । अन्तरराष्ट्रीय परिस्थितियां अस्थिर तथा अराजकसदृश हैं । इस वर्ष चीन-भारत राजनैतिक सम्बन्धों का ७५वां वर्ष दिवस भी है । दोनों पक्षों ने सम्बन्धों को नीतिगत ऊंचाई एवं दीर्घकालीन दृष्टिकोण से देखना तथा संभालना आवश्यक है ।

५. बहुपक्षीयता को बनाए रखने के लिए प्रयास करने चाहिए । इस वक्तव्य से जिनपिंग ने ट्रम्प का नाम लिए बिना टीका की ।

६. बहुध्रुवीय विश्व में एवं अन्तरराष्ट्रीय सम्बन्धों में लोकतंत्र को सुदृढ़ करने के लिए साथ मिलकर कार्य करने की आवश्यकता है तथा वह दायित्व हमें निभाना चाहिए ।

शांघाई सहयोग संगठन के विषय में थोड़ी सूचना !

शांघाई सहयोग संगठन के १० देश सदस्य हैं । इनमें चीन एवं भारत के अतिरिक्त बेलारूस, ईरान, कजाकस्तान, किर्गिस्तान, पाकिस्तान, रूस, ताजिकिस्तान एवं उज़्बेकिस्तान इन देशों का समावेश है । इसके अतिरिक्त अनेक संवाद भागीदार तथा निरीक्षक देश हैं ।