
कोल्हापुर, २३ अगस्त (वार्ता) – मालेगांव बमविस्फोट, मुंबई में ११ जुलाई २००६ को हुए श्रृंखलाबद्ध बमविस्फोट तथा दाभोलकर हत्या के प्रकरणों का हाल ही में निर्णय हुआ है । ‘इन प्रकरणों में राजनैतिक हस्तक्षेप था’, ऐसा सनसनी उत्पन्न करनेवाला आरोप भूतपूर्व पुलिस आयुक्त मीरा बोरवणकर ने किया था । हम उन्हें विनति करते हैं कि उन्होंने जिन ‘राजनैतिक नेताओं’ पर आरोप किया है, उनके नाम घोषित करें, ऐसा आवाहन सनातन संस्था के राष्ट्रीय प्रवक्ता श्री चेतन राजहंस ने किया । वे कोल्हापुर के प्रेस क्लब में आयोजित पत्रकार परिषद में बोल रहे थे । डॉ. नरेंद्र दाभोलकर की द्वादशवीं स्मृतिदिन के उपलक्ष्य में ‘महाराष्ट्र अंनिस’ की ओर से पुणे के ‘साने गुरुजी स्मारक’ में एक पुस्तक प्रकाशन के समय बोरवणकर ने यह आरोप किया था । इस पत्रकार परिषद से बोरवणकर के आरोपों का श्री राजहंस ने खण्डन किया ।

इस समय महाराष्ट्र मंदिर महासंघ के जिला सहसंयोजक श्री अशोक गुरव, हिन्दू एकता आन्दोलन के जिलाध्यक्ष श्री दीपक देसाई, सनातन संस्था के डॉ. मानसिंग शिंदे, ‘महाराजा प्रतिष्ठान’ के संस्थापक श्री निरंजन शिंदे तथा हिन्दू जनजागृति समिति के श्री शिवानंद स्वामी उपस्थित थे ।
श्री चेतन राजहंस द्वारा प्रस्तुत किए गए महत्त्वपूर्ण सूत्र

डॉ. दाभोलकर हत्या के उपरांत सनातन के साधकों का अन्वेषण के नाम पर हुआ छल कपट राजनैतिक हस्तक्षेप के कारण हुआ क्या ?
श्री राजहंस आगे बोले कि, बोरवणकर का कहना है कि पीडितों को न्याय नहीं मिला । यदि ऐसा है तो फिर वे कौन से राजनैतिक व्यक्ति थे, जिनके कारण उन्हें न्याय नहीं मिला, यह भी उन्हें बताना चाहिए था । ये घटनाएं जिस काल में घटित हुईं, उस समय महाराष्ट्र में किसका शासन था ? दाभोलकर प्रकरण में कांग्रेस के तत्कालीन मुख्यमंत्री पृथ्वीराज चव्हाण ने हत्याकांड के उपरांत अन्वेषण आरंभ होने से पूर्व ही ‘यह हत्या गोडसेवादी प्रवृत्तियों ने की’, ऐसा घोषित किया तथा इसके उपरांत सनातन के सहस्रों साधक, हिन्दुत्वनिष्ठों का अन्वेषण के नाम पर छल किया गया । क्या यह छल राजनैतिक हस्तक्षेप के कारण था ? यह मीरा बोरवणकर कहना चाहती थीं क्या ?
आज कॉ. पानसरे हत्या प्रकरण में डॉ. वीरेंद्रसिंह तावडे को जब जमानत मिल चुकी थी, तब वह निरस्त की जाती है । इसी प्रकार कनिष्ठ न्यायालय अन्य संशयितों को जमानत अस्वीकार देता है, तो उसे प्राप्त करने के लिए वरिष्ठ न्यायालय का द्वार खटखटाना पडता है । अनेक निर्दोषों को केवल संशय के कारण १०-१० वर्ष कारागृह में रहना पडता है ! इसमें वास्तव में किसका हस्तक्षेप है ? किसका दबाव है ? क्या किसी परिवार का दबाव है ? इसका उत्तर कौन देगा ?
आतंकवाद विरोधी दल के तत्कालीन प्रमुख हेमन्त करकरे पर भी राजनैतिक दबाव था, ऐसा उन्होंने कहा । तो क्या उसमें तत्कालीन मुख्यमंत्री विलासराव देशमुख, गृहमंत्री आर.आर. पाटील अथवा केन्द्रीय गृहमंत्री पी. चिदम्बरम् का हस्तक्षेप था, ऐसा बोरवणकर कहना चाहती हैं ? यह उन्हें स्पष्ट करना चाहिए ।
खाकी ने वामपन्थी एवं दक्षिणपन्थी नहीं होना चाहिए !
पुणे में दाभोलकर के स्मृतिदिन के उपलक्ष्य में आयोजित महाराष्ट्र अंधश्रद्धा निर्मूलन समिति (‘अंनिस’) के कार्यक्रम में मीरा बोरवणकर ने कहा कि, खाकी ने हरित, भगवा अथवा श्वेत होना, यह अत्यंत घातक है । हम उन्हें कहना चाहते हैं कि, खाकी ने वामपन्थी एवं दक्षिणपन्थी भी नहीं होना चाहिए । जिस संगठन के कार्यकर्ता नक्सलवादी के रूप में बंदी बनाए गए हैं, जिस संगठन का नाम कांग्रेस के शासनकाल में गृहमंत्री आर.आर. पाटील के समय महाराष्ट्र गुप्तवार्ता विभाग की ‘नक्सलवादियों को सहायता करनेवाले संगठनों की सूची’ में सम्मिलित था, उस संगठन के विषय में वरिष्ठ पुलिस अधिकारी रही बोरवणकर को ज्ञात नहीं था क्या ?
धमकी मिलने के उपरांत मीरा बोरवणकर ने पुलिस शिकायत क्यों प्रविष्ट नहीं की ?
श्री राजहंस आगे बोले कि, हाल ही में प्रशांत कांबळे उर्फ सुनील जगताप नामक कट्टर नक्सलवादी को रायगढ में बन्दी बनाया गया । वह अंनिस का कार्यकर्ता है । यह बोरवणकर को ज्ञात नहीं था क्या ? स्वयं को विवेक का स्वर कहने वाले अंनिस के विषय में हम नहीं, अपितु सातारा के सहायक धर्मादाय आयुक्त ने कठोर टिप्पणी करते हुए उनके ट्रस्ट पर प्रशासक नियुक्त करने तथा विशेष लेखापरीक्षण करने की अनुशंसा की है, यह उन्हें ज्ञात नहीं था क्या ? ऐसे संगठन के व्यासपीठ पर जाना उचित है अथवा अनुचित, यह किसी को भी लग सकता है; परन्तु इसके विषय में भी ‘इस कार्यक्रम में जाना नहीं चाहिए’ ऐसा कहकर मीरा बोरवणकर को २० दूरभाष आए ! उनमें एक धमकी का भी दूरभाष आया, ऐसा वे कहती हैं । भूतपूर्व पुलिस आयुक्त को धमकी आई, इतनी गंभीर घटना घटित होकर भी एक साधारण समाचार तक नहीं आया । बोरवणकर ने इसके विषय में पुलिस आरोप किया है क्या ? दाभोलकर प्रकरण में भी हामिद दाभोलकर ने मेरे पिताजी को ‘तुम्हारा गांधी करेंगे’, ऐसी धमकी मिलने का सनसनीखेज आरोप लगा कर अति प्रचार प्राप्त किया था । वास्तविकता में न्यायालय में इसके विषय में पूछे जाने पर उन्हें कुछ भी बताना नहीं आया । उन्होंने इसके विषय में एक साधारण पुलिस आरोप तक नहीं की, यह स्पष्ट हुआ । ‘इससे जनसामान्य को जो समझना है, वह समझना चाहिए’, ऐसा भी श्री राजहंस ने कहा ।
मीरा बोरवणकर हिन्दुत्वनिष्ठों की भावनाएं कब समझेंगी ? – चेतन राजहंसजिस प्रकार मीरा बोरवणकर को ‘हत्या हुए परिवारों को न्याय मिलना चाहिए’ ऐसा लगता है, उसी प्रकार इस प्रकरण में जो हिन्दुत्वनिष्ठ नाहक पीडित हुए, उनकी भी भावनाएं; विशेषत: पानसरे-दाभोलकर हत्या प्रकरण में सहस्रों सनातन साधकों का छल किया गया, उसे भी उन्होंने समझना चाहिए । शहरी नक्सलवादी के रूप में जिनके कार्यकर्ता पकडे जाते हैं, उनके व्यासपीठ पर मीरा बोरवणकर जाती हैं और वहां जाकर वक्तव्य करती हैं, तो उन्हीं मीरा बोरवणकर से हमारी विनति है कि, वे सनातन के आश्रम में आकर ‘साधकों का छल क्यों हुआ ?’, ‘हम क्यों पीडित हैं’, ये भाव भी समझें । मीरा बोरवणकर हिन्दुत्वनिष्ठों के व्यासपीठ पर आकर कभी बोलेंगी क्या ? हम पर होनेवाले अन्याय के पीछे किसका हस्तक्षेप है, यह भी उन्हें घोषित करना चाहिए, ऐसा आवाहन श्री चेतन राजहंस ने पत्रकार परिषद में किया । |
इस अवसर पर हिन्दू एकता आन्दोलन के जिलाध्यक्ष श्री दीपक देसाई ने कहा, ‘‘मीरा बोरवणकर ने एक दायित्वपूर्ण अधिकारी के रूप में कार्य किया है, इसलिए उन्होंने केवल आरोप नहीं लगाने चाहिए, अपितु वे जो कहती हैं, उसके लिए प्रमाण प्रस्तुत करना अपेक्षित है । केवल वातावरण निर्माण कर किसी को अथवा किसी एक पक्ष को प्रसन्न करने के लिए बोरवणकर ने इस प्रकार की वक्तव्य नहीं करने चाहिए ।’’
Wipro Corporate Jihad : आरोपी शाहिना रफीक को जांच के लिए पुणे बुलाया गया ।
Karnataka Muslim : यदि राज्य में मुसलमानों को ५ मंत्री पद नहीं दिए गए, तो हम अपनी ताकत दिखाएंगे ।
गुणवत्ता एवं अन्नसुरक्षा के विषय में ‘गोकुल’ संघ की ओर से कभी भी समझौता नहीं किया गया है ।
Ramdas Athawale : (और इनकी सुनिए…) ‘अवैध मद्यभट्टियों को अधिकृत करने पर सरकार को राजस्व प्राप्त होगा !’
Corporate Jihad : धर्मांतरण अस्वीकार करने के कारण ‘विप्रो’ (Wipro) की हिन्दू महिला कर्मचारी को सेवामुक्त किया !
Grooming Gangs : सांसद ने ब्रिटिश संसद में उपस्थित किया ‘ग्रूमिंग टोली’ का सूत्र