२० दिनों में नवीन प्रतिवेदन प्रस्तुत करने के निर्देश !

धाराशिव – जनपद के तुळजाभवानी मंदिर के गर्भगृह की कर्णशिलाओं में दरारें पड़ी होने के आधार पर मंदिर का शिखर उतारने के विषय में भारतीय पुरातत्त्व विभाग के अधिकारियों में मतभेद उत्पन्न हुए हैं । नागपुर, मुंबई एवं छत्रपति संभाजीनगर के ३ अधिकारियों ने अपनी-अपनी राय प्रस्तुत की हैं, किन्तु अधिकृत लिखित प्रतिवेदन राज्य पुरातत्त्व विभाग को प्राप्त नहीं हुआ है । इस कारण मंदिर का शिखर उतारा जाएगा या नहीं, इस निर्णय पर बड़ा संदेह निर्माण हुआ है ।
सांस्कृतिक मंत्री ने आय.आय.टी. के विशेषज्ञों को सम्मिलित करने का आदेश दिया !
इस परिस्थिति पर सांस्कृतिक मंत्री आशीष शेलार ने १९ अगस्त को बैठक ली । इस बैठक में उन्होंने आय.आय.टी. (भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान) के विशेषज्ञों को परीक्षण में सम्मिलित करके २० दिनों में नवीन प्रतिवेदन प्रस्तुत करने के निर्देश दिये । भारतीय पुरातत्त्व विभाग के अधिकारियों ने क्या प्रतिवेदन दिया ? इस प्रश्न पर शेलार ने मौन धारण किया है, ऐसा पुजारी मंडल के अध्यक्ष श्री. विपीन शिंदे ने कहा ।
विकास योजना को लेकर विवाद !
तुळजाभवानी मंदिर के गर्भगृह तथा कर्णशिलाओं को सुदृढ़ करने का कार्य मंदिर के ५० करोड रुपये के निधि से किया जा रहा है । दूसरी ओर मंदिर विकास के लिए राज्य सरकार ने १ सहस्र ८६० करोड रुपये की योजना को अनुमती दी है । इस कारण यह कार्य किस योजना में सम्मिलित है, इस विषय में भ्रम है । (नियम बनाते समय ही उनमें निहित सभी सूक्ष्मताओं को स्पष्ट करना क्यों आवश्यक है, यह इससे ज्ञात होता है ! – संपादक) गर्भगृह तथा कर्णशिलाओं का कार्य सरकार की योजना का ही भाग है, ऐसा माना जा रहा है । इस विषय में धाराशिव के जिलाधिकारी कीर्ति किरण पुजार ने कहा कि, वर्तमान में चल रहे जीर्णोद्धार कार्य में शिखर का भाग सम्मिलित करके कार्य किया गया, तो प्रति ४-५ वर्षों में जीर्णोद्धार की आवश्यकता नहीं होगी । वर्ष १९९३ के भूकंप के उपरांत मंदिर को सुदृढ करने हेतु आवश्यक परिवर्तन करना हितकारी है । इसका अर्थ यह नहीं कि मंदिर का संपूर्ण स्वरूप परिवर्तित किया जाएगा ।
भक्तों ने आपत्ति जताई !
मंदिर का विकास किस दिशा में किया जाए ? इस विषय पर २ सहस्र से अधिक जनों ने आपत्ति अभिलिखित की है, ऐसा कहा जा रहा है । धाराशिव के ठाकरे गुट के विधायक कैलास पाटिल ने कहा कि तुळजाभवानी महाराष्ट्र की कुलस्वामिनी है । इस कारण इस मंदिर के संबंध में की गई जांच के सभी प्रतिवेदन घोषित किये जाने चाहिए ।
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