Bangladesh Temples Under Attack : बांगलादेश में पाकिस्तान की आय.एस्.आइ. हिन्दुओं के मन्दिरों को कर रही है लक्ष्य !

  • बांगलादेश के पत्रकार सलाहुद्दीन शोएब चौधरी ने उजागर की सूचना

  • लष्कर-ए-तोयबा के आतंकवादियों का प्रयोग

(आय.एस्.आइ. – पाकिस्तान की इंटर सर्विस इण्टेलिजेन्स – आंतरसेवा गुप्तचर संस्था)

सलाहुद्दीन शोएब चौधरी

ढाका (बांगलादेश) – बांगलादेश में गत वर्षभर से मोहम्मद युनूस के नेतृत्ववाले अंतरिम शासनकाल में हिन्दुओं पर आक्रमण रुके नहीं हैं । विशेषतः बांगलादेश में कट्टरपंथ बढाने में पाकिस्तान की गुप्तचर संस्था आय.एस्.आइ. की महत्त्वपूर्ण भूमिका है । युनूस शासन ने आय.एस्.आइ. को अपनी गतिविधियां स्वतंत्र रूप से करने की अनुमति दी है । उसका लाभ उठाकर आय.एस्.आइ. बांगलादेश के हिन्दुओं के मन्दिरों को लक्ष्य कर रही है । इसके लिये वह लष्कर-ए-तोयबा के आतंकवादियों का प्रयोग कर रही है । बांगलादेश के प्रसिद्ध पत्रकार सलाहुद्दीन शोएब चौधरी ने यह दावा किया है कि बांगलादेश अब आय.एस्.आइ. की गतिविधियों का अड्डा बन रहा है ।

हिन्दू मन्दिर प्रत्यक्ष लक्ष्य !

शोएब चौधरी के अनुसार बांगलादेश अपने सार्वभौमत्व एवं धार्मिक सौहार्द के लिये अत्यन्त गंभीर संकट का सामना कर रहा है । विशेषतः देश के हिन्दु समाज को योजनाबद्ध रूप से भयभीत किया जा रहा है एवं उनके मंदिरों को लक्ष्य बनाया जा रहा है । इस समग्र अभियान के केंद्र में पाकिस्तान की आय.एस्.आइ. ही गुप्तचर संस्था है । आय.एस्.आइ. ने लष्कर-ए-तोयबा के माध्यम से हिन्दुओं पर आक्रमण तथा भारतविरोधी आतंकवादी गतिविधियों का बांगलादेश में विस्तार आरंभ कर दिया है ।

युनूस के सत्तारूढ होने पर परिवर्तित चित्र

शोएब चौधरी ने कहा कि १६ अगस्त को ही सैफुल इस्लाम नामक एक इस्लामी कट्टरतावादी ने फेसबूक पर सीताकुंड पर्वत पर मस्जिद निर्माण का उल्लेख किया है । उसे लष्कर-ए-तोयबा तथा हरकत-उल्-जिहाद-अल्-इस्लामी से सम्बद्ध आतंकवादी हारुन इजहार से सहायता मिल रही है । इजहार का परिवार भी आतंकवादी घटनाओं में सम्मिलित रहा है ।

सीताकुंड पर लक्ष्य

आतंकवादी इजहार एवं उसके सहकारी ११वीं शताब्दी के सीताकुंड चंद्रनाथ धाम पर दृष्टि गडाये हुए हैं । यह दक्षिण एशिया के हिन्दु एवं बौद्ध धर्मावलम्बियों का एक पवित्र तीर्थस्थान है । प्रतिवर्ष फरवरी मास में यहां शिवचतुर्दशी के अवसर पर सहस्रों भक्त एकत्र होते हैं । चंद्रनाथ मंदिर समुद्रतल से १ सहस्र फूट ऊंचे पर्वत पर स्थित है । हिन्दू पुराणकथाओं के अनुसार इसी स्थान पर देवी सती का दाया कर (हाथ) गिरा था । बांगलादेश के कट्टरतावादी समूह बारम्बार चंद्रनाथ पर्वत पर अधिकार जमाने एवं उसके शिखर पर मस्जिद बनाने का प्रयास करते आये हैं । यहां षडयंत्र पूर्वक हिन्दुओं का अपमान करने तथा उनकी परम्पराओं का अनादर करने के लिये अनेक गतिविधियां की जाती रही हैं । यहां हिन्दू भक्तों पर आक्रमण करने का भी अनेक बार प्रयास हुआ है ।

अनेक मन्दिर आय.एस्.आइ. के लक्ष्य पर !

पाकिस्तानी आय.एस्.आइ. की योजनाएं केवल सीताकुंड तक सीमित नहीं हैं । चटगांव का मेधास मुनी आश्रम, बंदरबन जनपद का स्वर्ण मंदिर तथा कॉक्स बाजार के महेशखली स्थित आदिनाथ मंदिर भी उनके लक्ष्य पर हैं । ये सभी प्राचीन एवं पवित्र हिन्दु तीर्थस्थान दक्षिण एशिया की आध्यात्मिक धरोहर से गहरे जुडे हुए हैं, जिन पर पाकिस्तान की कुदृष्टि है ।

शरीयत कानून की मांग

आतंकवादी इजहार ने हाल के दिनों में बांगलादेश में शरीयत कानून लागू करने के अपने अभियान को तीव्र किया है । इसमें उसे जमात-ए-इस्लामी, इस्लामी आंदोलन बांगलादेश तथा हिफाजत-ए-इस्लाम जैसी कट्टरतावादी संस्थाओं का समर्थन प्राप्त है । वह अल्-कायदा से सम्बद्ध अन्सार-अल्-इस्लाम के प्रमुख जशीमुद्दीन रहमानी का समीपस्थ है ।

आय.एस्.आइ. की भर्ती और तस्करी

आय.एस्.आइ. रोहिंग्या तथा बिहार से आये लोगों की तीव्र गति से भर्ती कर रही है । भर्ती के पश्चात् इन युवकों को नेपाल एवं पाकिस्तान के प्रशिक्षण शिविरों में भेजा जाता है । युनूस शासनकाल में आय.एस्.आइ. को बांगलादेश में शस्त्र एवं मादक द्रव्य लाने की स्वतंत्रता मिल चुकी है । इससे प्राप्त धन का प्रयोग आतंकवादी अभियानों में किया जा रहा है ।

हिन्दु धर्म एवं भारतीय संस्कृति के विरुद्ध पाकिस्तान का छेडा हुआ अखंड युद्ध !

चौधरी के अनुसार बांगलादेश को जिहादियों का गढ बनाकर भारत की पूर्व सीमा को अस्थिर करना पाकिस्तान की बडी योजना है । युनूस शासनकाल में बांगलादेश कट्टर इस्लामी एवं आतंकवादी शक्तियों के लिये एक लॉन्च पॅड (आतंकवादियों को प्रशिक्षित कर नियोजित स्थलों पर भेजना) बन रहा है । यह हिन्दु धर्म तथा भारतीय संस्कृति के विरुद्ध पाकिस्तान द्वारा छेडे गये अखंड युद्ध का ही एक अंग है ।

संपादकीय भूमिका 

भारत बांगलादेश के हिन्दुओं तथा मंदिरों की रक्षा के लिये कब प्रयास करेगा अथवा पाकिस्तान की भांति वहां के हिन्दुओं को भी उपेक्षित छोड देगा ?