‘एनसीईआरटी’ की पुस्तक में विभाजन की भयावहता को सम्मिलित किया गया है !

विभाजन के लिए कांग्रेस, जिन्ना तथा माउंट बैटन दोषी होने का उल्लेख

(‘एनसीईआरटी’ का अर्थ है ‘नॅशनल कौन्सिल ऑफ एज्युकेशनल रिसर्च अँड ट्रेनिंग’ ‘राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद’)

नई दिल्ली – राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद ने कक्षा ६ से ८ तथा ९ से १२ के लिए २ नए प्रकरण सम्मिलित किए हैं । ये दोनों प्रकरण देश के विभाजन की भयावहता पर आधारित हैं । इन प्रकरणों में कहा गया है कि मोहम्मद अली जिना ने विभाजन की मांग की, कांग्रेस ने इसे स्वीकार किया तथा व्हॉइसरॉय माउंट बैटन ने इसे कार्रवाई में लाया ।

यह जानकारी ‘विभाजन के अपराधी’ विषय में जोडी गई है । ये प्रकरण पाठ्यक्रम का भाग नहीं हैं, यह पूरक सामग्री है, जो बच्चों को विशिष्ट विषयों को समझाने के लिए सिद्ध है । इसे बच्चों को पत्रके, चर्चाओं तथा वाद-विवाद के माध्यम से पढ़ाया जाता है । हाल ही में, ‘ऑपरेशन सिंदूर’ को भी एक विशेष अध्याय के रूप में जोडा गया है ।

देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू, वायसराय माउंटबेटन और मोहम्मद अली जिन्ना

विभाजन स्वीकार करो या अराजकता का सामना करो ! – नेहरू

इस अध्याय में देश के प्रथम प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू के एक भाषण का एक अंश सम्मिलित है । इसमें नेहरू ने कहा था, ‘हम ऐसी स्थिति में पहुंच गए हैं जहां हमें या तो विभाजन स्वीकार करना होगा या निरंतर संघर्ष तथा अराजकता का सामना करना होगा ।’ (नेहरू ने विभाजन किया ; हालांकि, तब से देश में निरंतर संघर्ष तथा अराजकता दोनों चल रही है तथा चलती रहेगी, अर्थात विभाजन से भारत को कुछ भी प्राप्त नहीं हुआ, बल्कि देश को नुकसान हुआ है एवं अभी भी हो रहा है । यह कांग्रेस तथा गाँधी-नेहरू का पाप है ! – संपादक)

विभाजन के दुष्पपरिणामों का उल्लेख

इस अध्याय में बताया गया है कि १९४७ से १९५० के समय, विभाजन ने भारत की एकता को छिन्न-भिन्न कर दिया, शत्रुतापूर्ण सीमाएं बनाईं, सामूहिक हत्याएं तथा विस्थापन का कारण बना, धार्मिक अविश्वास को बढ़ाया, पंजाब एवं बंगाल की अर्थव्यवस्थाओं को नष्ट कर दिया तथा जम्मू-कश्मीर को सामाजिक, आर्थिक एवं जनसांख्यिकीय पतन के मार्ग पर लाया , जिसे बाद में आतंकवाद ने अधिक बद्तर बना दिया ।

विभाजन का दुःख कभी भुलाया नहीं जा सकता ! – प्रधानमंत्री मोदी

विशेष अध्याय की प्रस्तावना में विभाजन पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विचार भी प्रस्तुत किए गए हैं । इसमें मोदी कहते हैं, “विभाजन का दुःख कभी भुलाया नहीं जा सकता । लोगों की मूर्खता एवं घृणित हिंसा के कारण हमारे लाखों बहन-भाई विस्थापित हुए तथा कई लोगों ने अपनी जान गंवाई । इस संघर्ष एवं बलिदान की स्मृति में, भारतवासी १४ अगस्त को ‘विभाजन विभीषिका (भयपट) स्मृति दिवस’ के रूप में मनाएंगे ।”