श्री प्रीतम नाचनकर, विशेष संवाददाता, सनातन प्रभात

मुंबई, १५ अगस्त – ‘पीओपी’ से प्रदूषण होने की एक भी शोध-रिपोर्ट उपलब्ध नहीं है । इसके बाद भी गणेशोत्सव के समय ‘पीओपी’ की मूर्तियों से प्रदूषण होने का षड्यंत्र कांग्रेस ने कई वर्षों तक चलाया । ९ जून २०२५ को मुंबई उच्च न्यायालय द्वारा ‘पीओपी’ की मूर्तियों पर लगी रोक समाप्त किये जाने के निर्णय से ‘हिंदुओं के त्योहारों से प्रदूषण होने’ कांग्रेस के ‘फेक नैरेटिव’ (झूठे कथानक) का पर्दाफाश हुआ । मूर्तियों से प्रदूषण न होने का निष्कर्ष निकलने के बाद भी महाराष्ट्र में पीओपी की श्री गणेश मूर्तियों के विसर्जन के लिए करोडो रुपये अनावश्यक रूप से व्यय करके कृत्रिम तालाब बनाए जाएंगे ।

पीओपी मूर्तियों पर लगी रोक को समाप्त करने का घटनाक्रम
मार्च २०२५ में महाराष्ट्र सरकार ने ‘पीओपी’ की मूर्तियों से प्रदूषण होता है या नहीं, इसका अध्ययन करने के लिए परमाणु वैज्ञानिक डॉ. अनिल काकोडकर की अध्यक्षता में विशेषज्ञ समिति बनाई थी । इस समिति ने जून २०२५ में प्रस्तुत रिपोर्ट में स्पष्ट किया कि पीओपी से प्रदूषण नहीं होता । समिति की रिपोर्ट के आधार पर ही मुंबई उच्च न्यायालय ने प्लास्टर ऑफ पेरिस की मूर्तियों पर लगी रोक समाप्त करने का महत्वपूर्ण निर्णय लिया ।
छोटे आकार की पीओपी मूर्तियों को तालाब में विसर्जन करने का कारण ही क्या ?
गणेश मूर्तियों के विसर्जन के विषय में महाराष्ट्र सरकार ने मुंबई उच्च न्यायालय में प्रस्तुत शपथपत्र में ५ फुट तक की मूर्तियों को कृत्रिम तालाबों में विसर्जित करने की नीति बताई थी । इस पर न्यायालय ने जुलाई २०२५ में ६ फुट ऊंचाई तक की मूर्तियों को कृत्रिम तालाब में विसर्जित करने के निर्देश दिए । मूल प्रश्न यह है कि यदि ‘पीओपी’ से प्रदूषण नहीं होता, यह माननीय उच्च न्यायालय ने स्पष्ट किया है, तो पीओपी की मूर्तियों के विसर्जन के लिए कृत्रिम तालाबों की आवश्यकता ही क्या है ? – यही प्रश्न धर्मप्रेमी हिन्दू उठा रहे हैं ।
प्रदूषण का नहीं, बल्कि ‘पीओपी’ के निस्तारण का प्रश्न ।
वास्तव में ‘पीओपी’ की मूर्तियों से प्रदूषण का प्रश्न है ही नहीं । ‘पीओपी’ को पानी में घुलने में अधिक समय लगने की समस्या है । इस समस्या को देखते हुए पीओपी का शीघ्र निस्तारण कैसे हो, इस पर शोध करने के लिए महाराष्ट्र प्रदूषण नियंत्रण मंडल के सदस्य सचिव की अध्यक्षता में १ अगस्त २०२५ को एक विशेषज्ञ समिति बनाई गई है। पीओपी का शीघ्र निस्तारण कैसे किया जाए, इस पर अध्ययन कर यह समिति सरकार को रिपोर्ट प्रस्तुत करेगी ।
संपादकीय भूमिकामुंबई उच्च न्यायालय के निर्णयों की भी अनदेखी करने की यह घटना है । इससे यह स्पष्ट होता है कि भारत की व्यवस्था ही हिन्दू धर्मशास्त्र विरोधी है । इसका धर्मनिष्ठ हिन्दुओं द्वारा प्राणप्रण से विरोध करना समय की आवश्यकता है । |
जेजुरी में रसायनयुक्त भंडारे (हल्दी) के विक्रय के विरुद्ध भाजपा विधायक विक्रम पाचपुते आक्रामक !
Wipro Corporate Jihad : आरोपी शाहिना रफीक को जांच के लिए पुणे बुलाया गया ।
Muzaffarnagar Shocking Incident : चिकित्सकों ने ८ सहस्र रुपये लेकर अस्थि जोडी; परंतु शेष धनराशि न मिलने के कारण उसे पुनः तोडने का आरोप !
Islam Friendly Gym : केरल में ‘इस्लाम-फ्रेंडली’ व्यायामशाला को लेकर विवाद
पान मसाला, गुटखा एवं मिलावटी खाद्य पदार्थों का डेढ करोड रुपये से अधिक मूल्य का भंडार हस्तगत
बरकतउल्ला विश्वविद्यालय का नाम ‘वाग्देवी भोजपाल विश्वविद्यालय’ होगा!