जब तक षड्यंत्रकारियों को दंड नहीं मिलता, तब तक इसे ‘न्याय’ नहीं कहा जा सकता !” – शंकराचार्य अमृतानंद देवतीर्थ (सुधाकर द्विवेदी)

मुंबई, ३१ जुलाई (वार्ता.) – ‘मालेगांव २००८ बम विस्फोट प्रकरण की पूरी जांच ‘महाराष्ट्र आतंकवाद विरोधी पथक’ का अपराध था । संपूर्ण प्रकरण ही झूठा था । न्यायालय ने निर्णय में कहा है कि मेरे नाशिक स्थित घर में बम रखा गया था ! यह निर्णय १७ वर्षों के बाद मिला है । जब तक षड्यंत्रकारियों को दंड नहीं मिलता, तब तक इसे न्याय नहीं कहा जा सकता । हमें सतानेवालों को नहीं पकडा जाता, तब तक हमारी लडाई जारी रहेगी’, ऐसा वक्तव्य मालेगांव विस्फोट प्रकरण में निर्दोष घोषित किए गए शंकराचार्य अमृतानंद देवतीर्थ (उपनाम सुधाकर द्विवेदी) ने मीडिया से चर्चा में दिया ।

“भगवे (धार्मिक रंग) को आतंकवादी कहना कांग्रेसियों का षड्यंत्र है !”

उन्होंने आगे कहा, ‘‘आतंकवादी’ शब्द द्वारा हमें कलंकित किया गया । हिन्दू आतंकवादी नहीं होता, वह क्रांतिकारी होता है । गत १७ वर्षों का हमारा समय जो चला गया, उसे कौन लौटाएगा ? कौन उसकी भरपाई करेगा ? न्यायालय के निर्णय से अब स्पष्ट हो गया है कि ‘हिन्दू आतंकवाद’ नाम की कोई संकल्पना ही नहीं है । भगवे को आतंकवादी कहना कांग्रेसियों का षड्यंत्र था । भगवे (धर्म) की विजय हुई ।