भारतीय मुसलमानों द्वारा प्रत्येक उत्पाद एवं वस्तु इस्लाम के अनुसार वैध अर्थात ‘हलाल’ होने की मांग की जा रही है । उसके लिए प्रत्येक प्रतिष्ठान को ‘हलाल सर्टिफिकेट (प्रमाणपत्र)’ लेना अनिवार्य किया जा रहा है । इसके द्वारा बडी चतुराई से भारत में धार्मिकता के आधार पर चलाई जा रही ‘इस्लामी अर्थव्यवस्था’ लागू की गई है । ‘हलाल’ के माध्यम से इकट्ठा किए जानेवाले पैसों का उपयोग आतंकियों के अभियोग लडने के लिए किया जाता है, अतः सभी स्तरों पर ‘हलाल जिहाद’ की व्यवस्था का लोकतांत्रिक पद्धति से विरोध किया जाना चाहिए ।

‘हलाल प्रमाणपत्र’ के माध्यम से वर्तमान में हलाल अर्थव्यवस्था केवल ८ वर्षाें में ही ३ ट्रिलियन तक जा पहुंची है । भारत की अर्थव्यवस्था को इस स्तर पर पहुंचने में ७५ वर्ष लगे । पूरे विश्व की अर्थव्यवस्था में इतने बडे स्तर पर हलाल अर्थव्यवस्था का प्रभाव स्थापित हुआ है । यदि यह ऐसा ही चलता रहा, तो आनेवाले कुछ वर्षाें में अन्य सभी व्यापारियों की अर्थव्यवस्था समाप्त हो जाएगी । इसके लिए अब सभी व्यापारियों को संगठित होकर ‘हलाल जिहाद’ का संकट रोकना चाहिए !
– श्री. रमेश शिंदे, राष्ट्रीय प्रवक्ता, हिन्दू जनजागृति समिति
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