१. इस्लामिक विचारक ‘जिहाद’ शब्द का अर्थ यह बताते हैं कि वास्तव में जिहाद किसी अन्य के विरोध में नहीं है, अपितु ‘स्वयं में अंतर्निहित बुरी बातों को नष्ट करने के लिए आरंभ किया गया प्रयास है !’ (संदर्भ – टीवी ९ जालस्थल समाचार १३ अप्रैल २०२१)
२. इस्लाम में ‘जिहाद’ शब्द को पवित्र माना जाता है; परंतु वर्तमान समय में पूरे विश्व में जिहाद के नाम पर जो आतंकवाद, निर्दाेष लोगों की हत्याएं तथा आर्थिक हानि चल रही है, उसे देखते हुए जिहाद के इस अर्थ पर विश्वास करना कठिन है !
– एक हिन्दुत्वनिष्ठ
३. जिहाद का अर्थ है ‘तलवार के बल पर, आगजनी तथा स्त्रियों के साथ बलात्कार करते हुए काफिरों की (गैरमुसलमानों की) अंधाधुंध हत्याएं कर उनकी संपत्ति लूटना तथा उनकी स्थित एवं अन्य संपत्ति को हडपना !’ वास्तव में देखा जाए, तो एक पंथ के रूप में इस्लाम का अध्यात्म के साथ बिल्कुल कोई संबंध नहीं है । जिहाद का एकमात्र उद्देश्य है ‘काफिरों का सामूहिक हत्याकांड कर उन्हें नष्ट करना तथा पूरे विश्व में इस्लाम का साम्राज्य स्थापित करना !’ उसके कारण उनके सभी भद्रतापूर्ण प्रयास ‘सैन्य बल खडा करने तथा काफिरों के साथ निरंतर लडाईयां करने’ की दिशा में होते हुए दिखाई देते हैं ।
– (पत्रिका ‘मासिक अभय भारत’, १५ जून से १४ जुलाई २०१०)
‘किला जिहाद’
हिन्दुओं के मुगलों के विरुद्ध पराक्रम के सर्वाेच्च आदर्श स्थान तथा पाच सल्तनतों को धूल चटानेवाले छत्रपति शिवाजी महाराज के विभिन्न गढ-किलों पर मजारें अथवा कब्र बनाकर धीरे-धीरे उसका प्रचलन बढाकर वहां उर्स आदि उत्सव मनाना, उस क्षेत्र में अपना स्थान बनाना, धर्मांधों की बस्ती बढाना आदि काम कर धर्मांध ‘किला जिहाद’ के माध्यम से भी ‘जिहाद’ चला रहे हैं ।
‘बुर्का जिहाद’
अलग ‘फैशन’ के नाम पर मुसलमान लडकियों द्वारा हिन्दू लडकियों को हिजाब एवं बुर्का पहनने के लिए प्रेरित करना ‘बुर्का जिहाद’ ही है !
इस्लाम की दृष्टि से ‘काफिर’ कौन है ?
• जो अल्लाह पर विश्वास नहीं रखते ।
• जो पैगंबर मोहम्मद को नहीं मानते तथा जो मूर्तिपूजक होते हैं ।
• जो इस्लाम छोडकर अन्य धर्म को मानते हैं ।
• जिनकी इस्लाम के साथ अन्य धर्म पर श्रद्धा है ।
(साभार – ‘माय इंडिया माय ग्लोरी’ जालस्थल)
‘लैंड जिहाद’
देश के सामरिक समुद्री किनारों, सीमावर्ती क्षेत्रों आदि हिन्दूबहुल क्षेत्रों का अधिकतर भाग नियोजनबद्ध ढंग से मुसलमानबहुल बनाना, इसके लिए हिन्दुओं की भूमि अथवा घरों को आर्थिक प्रलोभन देकर, धोखाधडी से अथवा बलपूर्वक खरीदकर वहां मुसलमानों की वस्ती बढाना एवं हिन्दुओं को वहां से पलायन करने पर मजबूर करना, इसे ‘लैंड (भूमि) जिहाद’ कहते हैं ! देशभर में इस्लामिस्तान बनाने का मुसलमानों का षड्यंत्र है । वर्तमान में ‘मिनी पाकिस्तान’ के नाम से जो क्षेत्र जाने जाते हैं, वे उसी व्यापक षड्यंत्र की पूर्वतैयारी है ।
स्वास्थ्य से खिलवाड करनेवाला धर्मांधों का विकृत ‘थूक जिहाद’
मुसलमान जो कुछ वस्तुएं, खाद्यपदार्थ अथवा उत्पाद बेचते हैं, उन पर वे थूकते हैं; ऐसा ध्यान में आया है । क्या यह काफिरों को तुच्छ समझने का ही कृत्य नहीं है ? संतश्रेष्ठ जगद्गुरु तुकाराम महाराजजी पर एक म्लेंच्छ १०८ बार थूका था तथा उसके कारण उन्होंने १०८ बार स्नान किया था, यह कथा प्रचलित है ।





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संपादकीय : गुरुभ्यो नमः ।