संसार की सभी भाषाओं में केवल संस्कृत भाषा में ही सर्वत्र एक जैसे उच्चारण होना

सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. जयंत आठवलेजी के ओजस्वी विचार

सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. आठवलेजी

‘लिखते समय जैसे अक्षर का रूप महत्त्वपूर्ण होता है, वैसे ही उसे बोलते समय उसका उच्चारण भी महत्वपूर्ण होता है । संसार की सभी भाषाओं में केवल संस्कृत भाषा में इसे महत्त्व दिया गया है । इसी कारण भारत में वेदों का उच्चारण सभी जगह एक जैसा और प्रभावशाली होता है ।’

– सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. जयंत आठवले, संस्थापक संपादक, ʻसनातन प्रभातʼ नियतकालिक