Bangladeshi infiltrators : पिंपरी-चिंचवड पुलिस द्वारा पकडे गए ४८ बांग्लादेशी अभी भी भारत में ही कैसे ?

  • महाराष्ट्र राज्य सूचना अधिकार कार्यकर्ता महासंघ के महासचिव प्रदीप नाईक ने उठाया प्रश्न !

  • घुसपैठियों के प्रकरण को ‘राष्ट्रीय सुरक्षा’ के स्तर पर देखा जाए, यह श्री. प्रदीप नाईक ने व्यक्त की अपेक्षा !

महाराष्ट्र राज्य सूचना अधिकार कार्यकर्ता महासंघ के महासचिव प्रदीप नाईक

पुणे – महाराष्ट्र राज्य सूचना अधिकार कार्यकर्ता महासंघ के महासचिव प्रदीप नाईक ने सूचना के अधिकार के अंतर्गत पुणे जिले के पिंपरी-चिंचवड पुलिस प्रशासन से बांग्लादेशी घुसपैठियों के विषय में जानकारी मांगी थी । इससे प्राप्त सूचना के अनुसार पुणे में पुलिस आयुक्तालय की स्थापना से लेकर अभी तक ४८ बांग्लादेशी नागरिकों को घुसपैठ करने के आरोप में बंदी बनाया गया है; परंतु उनमें से एक भी घुसपैठी को बांग्लादेश वापस नहीं भेजा गया है, ऐसा उत्तर पुलिस प्रशासन से मिला है । इस पर श्री. नाईक ने ‘यह घुसपैठी अभी भी भारत में कैसे रह रहे हैं?’, यह सीधा प्रश्न उठाया है ।

घुसपैठियों से संबंधित प्रकरणों को ‘राष्ट्रीय सुरक्षा’ का विषय माना जाए !

इस उत्तर की पृष्ठभूमि पर श्री. प्रदीप नाईक ने आगे किहा कि बांग्लादेशी घुसपैठ केवल गैरकानूनी ही नहीं हैं, अपितु वे राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए भी बडा संकट है । तब भी उन पर ठोस कार्यवाही करने के संबंध में प्रशासन की गंभीर लापरवाही दिखाई देती है । इन घुसपैठियों कर शीघ्रगति न्यायालयों में अभियोग चलाकर उन्हें उनके देश में वापस भेजा जाना चाहिए । ऐसे प्रकरणों में विलंब न कर तुरंत कार्यवाही हो; इसके लिए केंद्र सरकार एवं सर्वोच्च न्यायालय को प्रधानता लेनी चाहिए, यह मांग भी श्री. नाईक ने की है। इन घुसपैठियों के प्रकरण को ‘राष्ट्रीय सुरक्षा’ को खतरा मानकर उसका निपटारा किया जाए, यह अपेक्षा भी उन्होंने व्यक्त की ।

न्यायालय के आदेश के अनुसार ही आगे की कार्यवाही की जाती है ! – पुलिस का स्पष्टीकरण

इस पर पुलिस प्रशासन ने यह स्पष्टीकरण दिया गया है कि पकडे गए बांग्लादेशी नागरिकों के संदर्भ में न्यायालयीन प्रक्रिया पूरी हुए बिना उन्हें वापस भेजना संभव नहीं होता । इसमें न्यायालय के आदेश के अनुसार ही आगे की कार्यवाही की जाती है । (बांग्लादेशी घुसपैठिए केवल गैरकानूनी ही नहीं, अपितु ‘राष्ट्रीय सुरक्षा’ के लिए भी संकटकारी हैं, यह सर्वविदित होते हुए भी ऐसे गंभीर प्रकरणों में वर्षाें तक चलनेवाली प्रक्रिया ‘घातक लापरवाही’ है ! – संपादक)

संपादकीय भूमिका 

  • ऐसी मांग करनी ही क्यों पडती है ? सूचना अधिकार से सामने आई यह वास्तविकता केवल स्थानीय प्रशासन की कार्यक्षमता पर ही नहीं, अपितु देश की सीमावर्ती सुरक्षा पर भी प्रश्नचिन्ह उठानेवाली है !
  • प्रशिक्षित आतंकियों से भी यह घुसपैठिया खतरनाक होने के कारण अन्य देशों की भांति घुसपैठ के विरोध में कठोर दंड का प्रावधान कर उसकी कार्यवाही की जानी चाहिए। घुसपैठ से संबंधित प्रकरणों को ‘राष्ट्रीय सुरक्षा’ का सूत्र मानकर उससे संबंधित अभियोगों को शीघ्रगति न्यायालयों में चलाकर घुसपैठियों को तत्काल भारत से बाहर निकाला जाए !