Eknath Shinde : शास्त्रों के बल पर भारत पुन: विश्वगुरु बनेगा ! – महाराष्ट्र के उपमुख्य़मंत्री एकनाथ शिंदे

वाराणसी में देश के प्रथम ‘शास्त्र संग्रहालय’ का एकनाथ शिंदेजी के कर-कमलों द्वारा उद्घाटन।

वाराणसी (उत्तर प्रदेश) – यहां का ‘शास्त्र संग्रहालय’ हिन्दुओं के प्राचीन ग्रंथों की ज्ञान परंपरा युवा पीढी तक पहुंचाने का कार्य करेगी । उनके ज्ञान से ही देश की रक्षा हो सकेगी । हमारा देश एक बार पुनः धर्मग्रंथों एवं शास्त्रों के बल पर विश्वगुरु बनने की दिशा में आगे बढेगा । ‘वसुधैव कुटुम्बकम्’ (संपूर्ण विश्व एक कुटुम्ब है) की भावना से परिपूर्ण सनातन हिन्दू धर्म ही एकमात्र धर्म है । वही सर्वसमावेशक समाज के निर्माण का आधार है, ऐसा वक्तव्य महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदेजी ने यहां किया । २७ जून को यहां देश के पहले ‘शास्त्र संग्रहालय एवं संशोधन केंद्र’ का उपमुख्यमंत्री शिंदेजी के कर-कमलों द्वारा उद्घाटन हुआ । उस समय वे बोल रहे थे । वाराणसी के दुर्गाकुंड में स्थित धर्मसंघ भवन में यह केंद्र निर्मित किया गया है ।

प्राचीन ग्रंथों के इस प्रदर्शन में क्या-क्या देखेंगे ?

विज्ञान भैरवकल्प – शारदा लिपि, शिवपूजाविधी, ऋग्वेद संहिता सर्ग १ से ८, सामवेद संहिता – सर्ग १ एवं २, ऐतरेय ब्राह्मण – १ से ८, हनुमत संहिता, पंचिका १ से ५, गोमूत्र प्रयोग, आर्यभटीय, विवेक मार्तंड (गोरक्षशत), वसिष्ठ स्मृति, कर्मप्रकाश, तात्पर्य आलोचना, शारंगधर संहिता जैसे अनेक ग्रंथों का समावेश ।

संपादकीय भूमिका 

हिन्दुओं के धर्मशास्त्रों का प्रचार एवं प्रसार करके, उनकी सीख विद्यालयों में देना आवश्यक है । इसके लिए सरकार को प्रयत्न करना चाहिए, यह अपेक्षा है !