हिन्दुओ, आपातकाल में जीवित रहने के लिए साधना करने के साथ-साथ स्वरक्षा की तैयारी करें !

सनातन के ३ गुरुओं का गुरुपूर्णिमा के निमित्त संदेश !

सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. आठवले

‘गुरुपूर्णिमा के दिन साधक तथा शिष्य को आध्यात्मिक उन्नति के लिए आवश्यक साधना करने हेतु गुरु आशीर्वाद देते हैं । वर्तमान में आपातकाल चल रहा है, इस कारण साधना करना कठिन है । आनेवाले कुछ महीनों में आपातकाल की तीव्रता बढती जाएगी । प्राकृतिक आपदाएं, युद्ध एवं गृहयुद्ध के कारण जनजीवन अस्त-व्यस्त हो जाएगा । ऐसे आपातकाल में यदि जीवित रहे, तो आगे शरीर से साधना कर पाएंगे । एक सुवचन है, ‘शरीरमाद्यं खलु धर्मसाधनम् ।’ अर्थात ‘धर्माचरण के लिए शरीर ही प्रथम साधन है ।’ तात्पर्य यह है कि साधना के लिए देह की आवश्यकता है । इसलिए आपातकाल में साधक तथा शिष्य का जीवित रहना आवश्यक है । भक्तियोग के अनुसार ‘न मे भक्तः प्रणश्यति ।’ (श्रीमद्भगवद्गीता, अध्याय ९, श्लोक ३१), अर्थात ‘मेरे भक्त का नाश नहीं होता’, ऐसा भगवान का वचन है । कर्मयोग के अनुसार स्वयं का नाश न हो, इसके लिए कृति करना आवश्यक होता है; इसलिए हिन्दुओं को आपातकाल में जीवित रहने के लिए भक्तियोग तथा कर्मयोग, दोनों योगमार्ग से प्रयास करने चाहिए । वर्तमान आपातकाल में ईश्वर की भक्ति करने के साथ-साथ कराटे, लाठी चलाना आदि स्वरक्षा विद्या प्राप्त करना आवश्यक है । इसलिए हिन्दुओ, अभी से स्वरक्षा विद्या ग्रहण कर उसे आपातकाल में जीवित रहने के लिए उपयोग में लाओ । आपातकाल के पश्चात हिन्दू राष्ट्र की स्थापना हेतु हिन्दुओं को शरीर से उत्तम साधना करना तथा शीघ्र आध्यात्मिक उन्नति करना संभव होगा ।’

– सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. जयंत आठवले, संस्थापक, सनातन संस्था