हिन्दुओ, आपातकाल में जीवित रहने के लिए साधना करने के साथ-साथ स्वरक्षा की तैयारी करें !

वर्तमान आपातकाल में ईश्वर की भक्ति करने के साथ-साथ कराटे, लाठी चलाना आदि स्वरक्षा विद्या प्राप्त करना आवश्यक है ।

ईश्वरस्वरूप सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. जयंत आठवलेजी साधक को ध्यान में आई कुछ विशेषताएं तथा प्रतीत हुई अवतारत्व से संबंधित उनकी लीलाएं !

सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. आठवलेजी (गुरुदेवजी) के ईश्वरत्व के विषय में विश्लेषण !