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मुंबई, २५ जून (संवाददाता) : देश में चलाई जानेवाली योजनाओं में होनेवाला पैसों का अपव्यय रोककर किस प्रकार जनता के पैसों का उपयोग उचित ढंग से किया जा सकेगा, इस पर चर्चा करने के लिए महाराष्ट्र में आयोजित केंद्रीय परिषद में आए ६०० से अधिक अधिक विशेष मान्यवर मुंबई में ४ दिन तक पांचसितारा होटल में रहे । उनके निवास एवं भोजन पर करोडों रुपए खर्च किए गए; परंतु जिस उद्देश्य के लिए ये सभी मान्यवर यहां आए थे, उस परिषद का कामकाज २ दिन में केवल साढेचार घंटे ही चल पाया । इन साढेचार घंटों में से अधिकांश समय उद्घाटन सत्र तथा उसमें दिए गए भाषणों में व्यर्थ हुआ । देश को आर्थिक स्थिरता प्राप्त कर देने के महत्त्वपूर्ण विषय पर विचारमंथन करने के लिए पूरे देश से आए इन मान्यवरों ने कुल २ दिनों में एक पूरा दिन भी इस परिषद के लिए नहीं दिया । परिषद में विचारमंथन करने के स्थान पर मुंबई के महत्त्वपूर्ण प्रेक्षणीय स्थल देखने में ही इन लोगों ने अपना अधिकांश समय बिताया । इसे देखते हुए नागरिकों ने ‘जनता के पैसों का अपव्यय टालने हेतु आयोजित इस परिषद पर ही करोडों रुपए का अपव्यय हुआ ?’, यह प्रश्न उठाया है ।
लोकसभा, सभी राज्यों तथा केंद्रशासित प्रदेशों की अनुमना समितियां अधिक सशक्त बनें, इसके लिए २३ एवं २४ जून को महाराष्ट्र के विधानभवन में इस केंद्रीय परिषद का आयोजन किया गया था । इस परिषद में लोकसभा अध्यक्ष ओम् बिडला, राज्यसभा के सभापति तथा केंद्रीय अनुमान समिति के अध्यक्ष उपस्थित थे । लोकसभासहित सभी राज्यों एवं केंद्रशासित प्रदेशों की अनुमान समितियों के सदस्य तथा संबंधित अधिकारी इस परिषद में भाग लेने हेतु महाराष्ट्र आए थे । प्रत्येक राज्य की अनुमान समितयों के अध्यक्ष, उनके साथ ४ विधायक तथा कुछ सांसद भी इस परिषद में उपस्थित थे । ऐसे ३०० से अधिक जनप्रतिनिधियों की व्यवस्था ‘ताज’ होटल में, जबकि उनके साथ आए ३०० से अधिक अधिकारियों की व्यवस्था ‘ट्राइडेंट’ होटल में की गई थी ।
अनुमान समिति के सदस्यों की व्यवस्था पर ही करोडों रुपए का खर्चा !इस परिषद में भाषण करते हुए लोकसभा अध्यक्ष ओम् बिडला ने ‘देश के प्रत्येक पैसे का उपयोग जनता के कल्याण के लिए करने हेतु यह अनुमान समिति काम करेगी’, ऐसा प्रतिपादित किया था; परंतु इस अनुमान समिति के सदस्यों की व्यवस्था करने पर ही करोडों रुपए खर्च किए गए हैं । परंतु उसकी तुलना में इस परिषद में कामकाज बहुत ही अल्प हुआ है ! |
परिषद में अधिक समय कामकाज किया जा सकता था ! – अजित भोळे, सचिव, महाराष्ट्र विधिमंडल
इस परिषद के कामकाज के विषय में हमने लोकसभा को कार्यक्रम पत्रिका भेजी थी । उसमें कामकाज के लिए अधिक समय भी दिया गया था; परंतु ऐन समय पर कार्यक्रम पत्रिका में परिवर्तन किया गया । इससे पूर्व ऐसी परिषदें ३-४ दिन चलती थी तथा उसमें परिषद का अंतिम दिन प्रेक्षणीय स्थल देखने के लिए रखा जाता था । इस परिषद में कामकाज के लिए और अधिक समय दिया जा सकता था, ऐसी प्रतिक्रिया महाराष्ट्र विधिमंडल के सचिव जितेंद्र भोळे ने दैनिक ‘सनातन प्रभात’के प्रतिनिधि को दी ।
संपादकीय भूमिकाराष्ट्र के पैसों की यह लूट रोकने का काम करनेवाले लोग ही यदि इस प्रकार से पैसों का अपव्यय करते हों, तो यह काम कैसे होगा ? |
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