ईश्वर का अस्तित्व न माननेवाले अंधश्रद्धा निर्मूलन समितिवालों का (अंनिसवालों का) ‘संविधान समता फेरी’ की आड में पंढरपुर की वारी में प्रवेश !

  • संत तुकाराम महाराज का सदेह वैकुंठगमन न माननेवाले लोग अब संत तुकाराम महाराज पालकी समारोह में होंगे सहभागी !

  • ‘संविधान समता फेरी’ में इससे पूर्व सहभागी होनेवाले कुछ लोगों पर नक्सली गतिविधियों में सहभागी होने के कारण पंजीकृत हैं अपराध !

पुणे, १९ जून (संवाददाता) : हिन्दुओं के देवताओं, संतों तथा आस्था के केंद्रों का निरंतर अनादर एवं उपहास करनेवाले, केवल इतना ही नहीं, अपितु ईश्वर का अस्तित्व ही न माननेवाले अंनिवालों ने अब ‘संविधान समता फेरी’ इस मधुर नाम की आड में पंढरपुर की आषाढी-एकादशी बारी में प्रवेश किया है ।

जगद्गुरु संत तुकाराम महाराज के सदेह वैकुंठगमन को न माननेवाले, साथ ही संत तुकराम महाराज के ग्रंथों के पानी पर तैरने का चमत्कार न माननेवाले अंनिसवाले संत तुकाराम महाराज के पालकी समारोह में सहभागी हुए हैं । उनका यह पाखंड ध्यान में न आए; इसके लिए यही नास्तिकतावादी तथा आधुनिकतावादी गिरोह ‘संविधान समता फेरी’ के नाम से वारी में सक्रिय हुए हैं । इससे पूर्व ‘संविधान समता फेरी’ में सहभागी कुछ लोगों पर नक्सली गतिविधियों में संलिप्त होने के कारण अपराध भी पंजीकृत हुए हैं ।

‘संविधान समता फेरी’ की कार्यक्रम पत्रिका
‘संविधान समता फेरी’ की कार्यक्रम पत्रिका

‘संविधान समता फेरी’ की ओर से २१ जून से ६ जुलाई की अवधि में पुणे से पंढरपुर की फेरी में सहभागिता की पत्रिका प्रसारित की गई है । इस पत्रिका पर ‘संयोजक’ के रूप में जिनके नाम दिए गए हैं, उनमें से अधिकांश लोग अंनिस के कार्यकर्ता हैं, जबकि कुछ अंनिस के कार्य से जुडे हुए हैं । विशेष बात यह कि अंनिस के पदाधिकारी तथा कार्यकर्ता सामाजिक माध्यमों द्वारा ‘संविधान समता फेरी’ का प्रसार कर रहे हैं । कुछ दिन पूर्व कथित कीर्तनकार बाळकृष्ण वसंत गडकर ने अपने कीर्तन में संत तुकाराम महाराज का सदेह वैकुंठगमन, साथ ही इंद्रायणी नदी में डुबाए गए संत तुकाराम महाराज के ग्रंथों के तैरने के चमत्कार पर प्रश्न उठाए थे । बाळकृष्ण गडकर अंनिस से जुडे हुए हैं । उनकी भांति ही अंनिस के साथ जुडे तथा स्वयं को ‘ह.भ.प.’ (हरिभक्त परायण) कहलानेवाले लोग ‘संविधान समता फेरी’ में सहभागी होकर संतों के अभंगों का (भक्तिरचनाओं का) अपनी सुविधा के अनुसार उपयोग कर नास्तिकतावाद का ‘एजेंडा’ आगे बढा रहे हैं ।

यह लीजिए इन लोगों का नक्सली गतिविधियों में संलिप्त होने का प्रमाण !

अंधश्रद्धा निर्मूलन समिति के पदाधिकारी अविनाश पाटिल का सामाजिक माध्यम के द्वारा ‘संविधान समता फेरी’ का प्रसार

‘एक दिन तो वारी का अनुभव करें’, इस घोषवाक्य की आड में संविधान के मूल्यों के प्रसार हेतु इस उपक्रम में वर्ष २०२२ में वामपंथी विचारोंवाले संगठन ‘कबीर कला मंच’ के कार्यकर्त्री शीतल साठे सहभागी हुईं थीं । वारी में घुसकर संविधान के मूल्यों की बातें करनेवाली शीतल साठे पर वर्ष २०१३ में ‘अनलॉफुल एक्टिविटीज (प्रिवेंशन) एक्ट’ (युएपीए) के अंतर्गत माओवादियों से संबंध होने का आरोप लगा था । इसमें उनके पति सचिन माळी का भी नाम था । उस समय इन दोनों ने न्यायालय के सामने आत्मसमर्पण किया था । इस प्रकरण में उन्हें बंदी भी बनाया गया था ।

अंनिसवालों ने ही पंढरपुर की वारी को अंधविश्वास प्रमाणित करने का किया था प्रयास !

राज्य में जब कांग्रेस के गठबंधन की सरकार थी, तब से अर्थात वर्ष २००४ से अंनिस के तत्कालिन अध्यक्ष डॉ. नरेंद्र दाभोलकर ने राज्य में अंधश्रद्धा निर्मूलन कानून लागू करने हेतु प्रयास आरंभ किए । सरकार ने इस कानून का प्रारूप डॉ. दाभोलकर की सहायता से तैयार किया । इस कानून के मसौदे में ‘शारीरिक, आर्थिक एवं मानसिक’ कष्ट पहुंचानेवाली कृति को अंधविश्वास प्रमाणित करने के अनुच्छेद का समावेश था ।

वारकरी शारीरिक परिश्रम उठाकर अर्थात पैदल चलते हुए पंढरपुर जाते हैं, इस बात को ध्यान में लेकर ही अंनिसवालों ने जानबूझकर इस अनुच्छेद का इस कानून में समावेश किया था । इसमें चमत्कारों को भी अंधविश्वास माना गया था । उसके कारण जगद्गुरु संत तुकाराम महाराज के अंभगों का (भक्तिरचनाओं का) इंद्रायणी नदी से ऊपर आना, संतश्रेष्ठ ज्ञानेश्वर महाराज का भैंसे के मुख से वेद बुलवा लेना तथा दीवार चलाना, ये सभी चमत्कार अंधविश्वास की कक्षा में आते थे । उसके कारण समस्त वारकरियों, हिन्दू जनजागृति समिति तथा सभी हिन्दुत्वनिष्ठ संगठनों ने इस कानून के विरोध में राज्यव्यापी आंदोलन चलाया । उसके कारण सरकार को इस कानून से ऐसे आपत्तिजनक अनुच्छेद हटाने पडे थे । इस कानून के माध्यम से वारकरियों की श्रद्धा पर प्रहार करने में असफल रहे अंनिसवाले अब सीधे बारी में घुसकर यह काम करने का षड्यंत्र रच रहे हैं ।

नक्सलियों से संबंध रखनेवाली अंनिस पर प्रतिबंध लगाएं ! – हिन्दू जनजागृति समिति

महाराष्ट्र अंधश्रद्धा निर्मूलन समिति नाम लगाने से पूर्व अंनिसवाले ‘महाराष्ट्र मानवीय नास्तिक मंच’के नाम से कार्यरत थे । इस नाम के कारण लोगों का समर्थन नहीं मिलता, यह जानकर इन नास्तिकतावादी लोगों ने अपने संगठन को ‘अंधश्रद्धा निर्मूलन समिति’, यह मीठा नाम लगाया; परंतु अनेक प्रकरणों में उनके आर्थिक घोटाले तथा भ्रष्टाचा उजागर हुए हैं । पिछले महिने में उनका एक कार्यकर्ता महाराष्ट्र के रायगढ जिले के डोणगांव में नक्सली गतिविधियों में पकडा गया है । इससे पूर्व गोंदिया एवं नागपुर में भी नक्सली गतिविधियों से संबंधित अंनिस के कार्यकर्ताओं को बंदी बनाया गया है ।

नक्सलियों का समर्थन करनेवाले तथा ‘अर्बन नक्सलवाद’ का कार्य करनेवाले इस संगठन पर प्रतिबंध लगा देना चाहिए तथा इस संगठन पर करनेवाले संगठन पर प्रशासक की नियुक्ति की जानी चाहिए, ऐसी मांग हिन्दू जनजागृति समिति के महाराष्ट्र एवं छत्तीसगढ राज्य संगठक श्री. सुनील घनवट ने की है ।

 

संपादकीय भूमिका

  • भोले-भाले वारकरियों का बुद्धिभ्रम कर उन्हें नास्तिक बनाने का प्रयास करनेवालों पर सरकार को तत्काल कठोर कार्रवाई करनी चाहिए ! इसके लिए समस्त वारकरियों, हिन्दुत्वनिष्ठों तथा राजनीतिक दलों में कार्यरत हिन्दुओं को प्रयास करने चाहिए !
  • समस्त हिन्दुओं को अब तो संगठित होकर हिन्दू धर्म के अस्तित्व पर संकट बने लोगों का लोकतांत्रिक पद्धति से विरोध करना चाहिए !
  • ऐसे लोगों के धर्मविरोधी दुष्प्रचार का शिकार न होने हेतु हिन्दुओं को धर्म की शिक्षा लेकर स्वयं में धर्माभिमान बढाने की है आवश्यकता !
  • क्या ऐसे धर्मविरोधी लोग कभी अन्य पंथियों के धार्मिक कार्यक्रमों में इस प्रकार से सहभागी होते हैं ?, यह प्रश्न अब हिन्दुओं को ऐसे लोगों से पूछना चाहिए !