राज्य सरकार श्रीगणेशमूर्तियों को प्राकृतिक जलस्रोतों में विसर्जित करने की नियमावली घोषित करे ! – अधिवक्ता नरेश दहिबावकर

‘बृहन्मुंबई सार्वजनिक गणेशोत्सव समन्वय समिति’ के अध्यक्ष अधिवक्ता नरेश दहिबावकर की मांग

अधिवक्ता नरेश दहिबावकर

मुंबई, १५ जून (संवाददाता) – मुंबई उच्च न्यायालय ने राज्य सरकार को प्लास्टर ऑफ पैरिस की मूर्तियां किस प्रकार विसर्जित करनी चाहिएं ?, इस संबंध में ३० जून तक जानकारी प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं । श्रीगणेशमूर्ति विसर्जन के समय होनेवाली प्रचंड भीड को ध्यान में लेकर ‘राज्य सरकार प्राकृतिक जलस्रोतों में गणेशमूर्तियों को विसर्जित करने के विषय में नियमावली घोषित करे’, ऐसी मांग ‘बृहन्मुंबई सार्वजनिक गणेशोत्सव समन्वय समिति’के अध्यक्ष अधिवक्ता नरेश दहिबावकर ने की । उन्होंने दैनिक ‘सनातन प्रभात’ के प्रतिनिधि को जानकारी देते हुए कहा, ‘‘मैं बहुत शीघ्र इस विषय में सरकार को पत्र लिखूंगा ।’’

अधिवक्ता नरेश दहिबावकर ने आगे कहा, ‘‘मुंबई में सार्वजनिक गणेशोत्सव विसर्जन शोभायात्राओं में लाखों की संख्या में श्रद्धालु आते हैं । विसर्जन के लिए बनाए जानेवाले अस्थाई तालाबों के पास इतनी बडी संख्या में जुटनेवाली इतनी बडी भीड का व्यवस्थापन करना संभव नहीं होता । सार्वजनिक गणेशोत्सव मंडल की मूर्तियां आकार में भी बडी होती हैं, जिससे बडी मूर्तियों को अस्थाई तालाबों में विसर्जित करना कठिन होता है । अतः सरकार सार्वजनिक गणेशोत्सव मंडलों के लिए मूर्तियों की ऊंचाई सुनिश्चित करे, साथ ही मूर्तियों को समुद्र में विसर्जित करने की अनुमति दे । अस्थाई तालाबों के पास भीड होने की संभावना होती है । ऐसी स्थिति में भगदड मचना अथवा अन्य अप्रिय घटनाएं न हो, इसकी ओर सरकार ध्यान दे । गणेशोत्सव के सुव्यवस्थापन की दृष्टि से क्या करना चाहिए ?’, इसके लिए हमने मुंबई के सार्वजनिक गणेशोत्सव मंडलों से सूचनाएं मांगी हैं । वो प्राप्त होने पर अगले सप्ताह में हम उन्हें सरकार के सामने रखेंगे ।’