यदि साधकों के पास सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. आठवलेजी का मार्गदर्शन अथवा सुवचन संग्रहित हों, तो उन्हें समष्टि को उपलब्ध कराने हेतु गोवा के ग्रंथ-संकलन विभाग में भेजें !

साधकों के लिए सूचना

सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. जयंत आठवलेजी

‘सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. आठवलेजी ने राष्ट्र, धर्म तथा अध्यात्म जैसे विभिन्न विषयों पर सहस्रों साधकों का मार्गदर्शन किया है । उनका प्रत्येक वाक्य चिरंतन मार्गदर्शक सिद्धांत होता है । विभिन्न अवसरों पर उनके द्वारा किए गए मार्गदर्शन का उपयोग समष्टि को, साथ ही आगे की पीढियों को हो; इसके लिए हम उन्हें संग्रहित कर उसे नियतकालिक, ग्रंथ, जालस्थल आदि विभिन्न माध्यमों में प्रकाशित कर रहे हैं ।

जिस समय सनातन संस्था की स्थापना हुई, उस समय सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. आठवलेजी ने अनेक स्थानों का भ्रमण कर स्वयं अध्यात्मप्रसार किया, साधकों की शंकाओं का समाधान किया तथा साधकों का मार्गदर्शन भी किया । उनमें से कुछ प्रसंगों का चित्रीकरण किया गया । इसमें अनेक प्रसंगों का चित्रीकरण करना संभव नहीं हुआ । उस स्थिति में साधकों ने उनके मार्गदर्शन में समाहित सूत्र लिखकर लिए थे ।

अतः किसी के पास सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. आठवलेजी के दैनिक, ग्रंथ, दृश्य-श्रव्य चक्रिकाएं (वीडियो सीडी) आदि विभिन्न माध्यमों से अब तक प्रकाशित न हुए मार्गदर्शक सूत्र संग्रहित हों, तो उन्हें समष्टि को उपलब्ध कराने हेतु आगे दिए पते पर लिखकर भेजें ।

लेखन भेजते समय द्विरुक्ति टालने की दृष्टि से ध्यान रखनेयोग्य सूत्र

१. सार्वजनिक सभाएं, सार्वजनिक प्रवचन तथा रामनाथी, गोवा के सनातन के आश्रम में संपन्न सत्संगों में बताए गए सूत्रों का ध्वनिमुद्रण अथवा चित्रीकरण किया गया है; इसलिए ऐसे सूत्र लिखकर न भेजें ।

२. जिले के साधकों का यदि एकत्रित रूप से मार्गदर्शन किया गया हो, तो संभवतः जिले का एक ही साधक सूत्र संकलित कर भेजे ।

३. किसी प्रसंग अथवा कार्यक्रम में कुछ चुनिंदा साधक ही हों, तो उनमें से कोई साधक दायित्व लेकर उन सूत्रों को लिखकर भेजें ।

लेखन भेजने हेतु पता 

ई-मेल : [email protected]

डाक पता : श्री. अमोल बधाले, द्वारा ‘सनातन आश्रम’, २४/बी, रामनाथी, बांदिवडे, फोंडा, गोवा, पिन – ४०३४०१