Crimson Crescent – Mayank Jain : फिल्म निर्माता मयंक जैन के चित्रपट (डॉक्यूमेंट्री) का प्रोमो ‘क्रिमसन क्रेसेंट – द लास्ट क्वार्टर’ प्रदर्शित 

वृत्तचित्र (डॉक्यूमेंट्री) में मदरसों की धार्मिक कट्टरता, घुसपैठ तथा हिंसा का समर्थन करने वाली विचारधाराओं पर प्रकाश डाला गया है ।

नई दिल्ली – प्रसिद्ध फिल्म निर्माता मयंक जैन के १०५ मिनट के नए वृत्तचित्र (डॉक्यूमेंट्री) का प्रोमो ‘क्रिमसन क्रेसेंट – द लास्ट क्वार्टर’ हाल ही में प्रदर्शित हुआ है । इस वृत्तचित्र में पाकिस्तान समर्थित ‘ISI’ की बढ़ती आतंकवादी गतिविधियों, मदरसों में पनपती धार्मिक कट्टरता, घुसपैठ, साथ ही हिंसा का समर्थन करने वाली नाजीवाद, साम्यवाद एवं जिहादवाद जैसी विचारधाराओं को उजागर किया गया है । मयंक जैन का यह वृत्तचित्र वर्ष २००५ में वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी स्व. के.पी.एस.गिल, प्रकाश सिंह और स्व.आर.के. ओहरी द्वारा प्रदर्शित ‘बांग्ला क्रेसेंट’ नामक डॉक्युमेंट्री पर आधारित है ।

चित्रपट निर्माते मयंक जैन

१. ‘बांग्ला क्रेसेंट’ डॉक्युमेंट्री बांग्लादेश तथा पाकिस्तान में बढ़ती धार्मिक कट्टरता पर आधारित थी, जबकि ‘क्रिमसन क्रेसेंट – द लास्ट क्वार्टर’ में इस विषय की सीमा और भी व्यापक की गई है । वृत्तचित्र में यूरोप, मध्य पूर्व, अफ्रीका तथा पाकिस्तान से हो रहे भारी पैमाने पर पलायन से उत्पन्न अस्थिरता तथा सामाजिक संघर्ष को भी दिखाया गया है ।

(सौजन्य : Mayank Jain)

२. इस वृत्तचित्र में नाजीवाद, साम्यवाद तथा जिहादवाद विचारधाराओं का तुलनात्मक विश्लेषण भी प्रस्तुत किया गया है । ये तीनों विचारधाराएं सत्ता, पूर्ण नियंत्रण और असहमति को दबाने – इस त्रिसूत्रीय आधार पर टिकी हुई हैं । मयंक जैन कहते हैं, “ये विचारधाराएं हिंसा को बढ़ावा देती हैं और उसे महिमामंडित करती हैं । ये धर्म अथवा क्रांति के नाम पर अंधविश्वास फैलाकर तर्कशक्ति को कुंद करती हैं । जबकि तर्कशक्ति मानवता का सबसे बड़ा हथियार है । शिक्षा, विचार-विमर्श तथा खुला संवाद – यही कट्टरता के विरुद्ध खरे समाधान हैं ।” यह विचार वृत्तचित्र के माध्यम से प्रस्तुत किया गया है ।

3. इसके साथ ही वृत्तचित्र में यह भी दिखाया गया है कि इस्लाम में कुछ सहिष्णु तथा तर्कसंगत विचारकों व वैज्ञानिक दृष्टिकोण रखने वाले मुसलमानों ने कट्टरता को चुनौती दी है ।