सर्वोच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति नाथ का प्रदूषण पर वक्तव्य

नई देहली – देहली में प्रदूषण का स्तर दिन-प्रतिदिन बढता जा रहा है। यह अस्वीकार्य है कि, हमारे बच्चे ऐसे वातावरण में बडे हों, जहां उन्हें बाहर खेलने के लिए भी मास्क पहनना पडे और छोटी आयु में ही उन्हें श्वसन तंत्र संबंधी व्याधियों की चिंता से ग्रस्त रहें । मैं देश की नदियों की स्थिति को लेकर भी चिंतित हूं। वे गंदगी से भरी हुई हैं। जब मैं इन नदियों के तटों को देखता हूं तो मुझे पुरानी बातें स्मरण होती हैं। यह पानी कभी बहुत जीवंत और शुद्ध था। सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश न्यायमूर्ति नाथ ने दुख जताते हुए कहा, “हम उनका अभिमान नहीं बचा सकते, यह चिंता का विषय है।” वह यहां विज्ञान भवन में आयोजित ‘राष्ट्रीय पर्यावरण सम्मेलन- २०२५ ‘ के उद्घाटन समारोह में बोल रहे थे। इस कार्यक्रम की मुख्य अतिथि राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू थीं।
न्यायमूर्ति नाथ ने आगे कहा,
१. औद्योगिक अपशिष्ट का प्रसंस्करण, अपशिष्ट जल अवसंरचना का विस्तार, तथा स्थानीय समुदायों को नदी की स्वच्छता बनाए रखने के लिए प्रोत्साहित करना महत्वपूर्ण है।
२. वर्ष २०१० में अपनी स्थापना के उपरांत से राष्ट्रीय हरित अधिकरण आशा की किरण बनकर उभरा है। उन्होंने पर्यावरण विवादों को सुलझाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। सरकार को हरित प्रौद्योगिकी को बढावा देना चाहिए। उद्योगों को अपने पर्यावरणीय प्रभाव के संबंध में चिंतित होना चाहिए।
३. हमें उत्सर्जन को विनियमित करने, स्वच्छ प्रौद्योगिकी में निवेश करने और टिकाऊ परिवहन विकल्पों को बढावा देने के लिए एक साथ आना होगा, ताकि हमें श्वास लेने वाली हवा के साथ समझौता न करना पडे।