|
(‘पैरोल’ का अर्थ है आरोपी को मिलनेवाला संचित अवकाश )

आळेफाटा (जिला पुणे) : गुजरात में घटित बहुचर्चित गोधरा हत्याकांड में आजीवन कारावास का दंड भोग रहा आरोपी सलीम उपाख्य सलमान जर्दा ‘पैरोल’ के समय फरार हुआ । उसने पैरोल की अवधि में महाराष्ट्र में जाकर चोरी की । उसने रात के समय नगर-कल्याण महामार्ग पर स्थित पेट्रोल पंप पर खडे टेम्पो से ४ लोगों की सहायता से चोरी की । आळेफाटा पुलिस ने इस घटना की गहन जांच कर मुख्य आरोपी सहित साहिल पठान, सुफीयान चंदकी, आयुब सुनठीया तथा इरफान दुरवेश को बंदी बनाया है । उन्होंने पुणे जिले के मंचर पुलिस थाने तथा नासिक जिले के सिन्नर पुलिस थाने की कार्यकक्षा में अपराध करने की बात स्वीकार की है तथा उस पर महाराष्ट्र में ३, जबकि गुजरात में ऐसे कुल १६ अपराध पंजीकृत होने की बात इस जांच में उजागर हुई है ।
Godhra Massacre Accused Commits Theft in Maharashtra While on Parole!
Main accused arrested along with 5 other Mu$l!ms!
16 cases registered against the Accused—3 in Maharashtra, 13 in Gujarat! How do criminals convicted of serious crimes get parole so easily?
Repeat offenders… pic.twitter.com/9aKKasDnuk
— Sanatan Prabhat (@SanatanPrabhat) February 3, 2025
इन आरोपियों से टेम्पो सहित चोरी किया गया १४ लाख ४० सहस्र ८७८ रुपए का माल जब्त किया गया है । गोधरा हत्याकांड के मुख्य आरोपी सलमान जर्दा को आजन्म कारावास का दंड मिला है तथा कारावास भोगते समय ८ बार पैरोल की अवधि समाप्त होने पर भी पुनः कारागृह में उपस्थित न होकर, वह गिरोह बनाकर चोरी के अपराध करता था, यह बात पुलिस जांच में सामने आई है ।
संपादकीय भूमिकागंभीर अपराध में दंडित अपराधी को पैरोल मिलता ही कैसे है ?, यह सामान्य जनता के मन में उठनेवाला प्रश्न है । अपराधी पैरोल पर बाहर आकर बार-बार आपराधिक कृत्य करता है तथा उसे बार-बार पैरोल मिलना तथा देश की व्यवस्था से उसका विरोध न होना अचंभित करनेवाला है ! |
Sinhagad Pune : सिंहगढ पर लगाए ‘यह किला हिन्दुओं का है, यहां मुसलमानों को प्रवेश नहीं’ के फलक !
(और इनकी सुनिए…) ‘श्रीकृष्ण मुसलमान थे तथा ५ समय की नमाज पढते थे !’ – Maulana Jarjis Ansari
Dabur : ‘डाबर’ प्रतिष्ठान के पैकेटबंद मौसमी जूस में काला फफूंद मिला ।
Karnataka AI University : बेंगलुरु में देश का पहला सरकारी ‘एआई’ विश्वविद्यालय प्रारम्भ किया जाएगा ।
हिन्दु विवाह अधिनियम के अनुसार विवाह को वैध ठहराने के लिए केवल विवाह प्रमाणपत्र होना पर्याप्त नहीं है ।– Gujrat High Court
जम्मू न्यायालय ने पुलिस से अभिलेख की मांग की ।