प्रयागराज उत्तर प्रदेश में गंगा, यमुना एवं सरस्वती (यह नदी अदृश्य है ।) के पवित्र ‘त्रिवेणी संगम’ पर स्थित तीर्थस्थान है । कुम्भ मेला भारत की सांस्कृतिक महानता के केवल दर्शन ही नहीं, अपितु सन्तसंग प्रदान करनेवाला आध्यात्मिक सम्मेलन है । कुम्भ मेले की आध्यात्मिक तथा सांस्कृतिक महिमा अनन्य है । गंगास्नान, साधना, दानधर्म, पितृतर्पण, श्राद्धविधि, सन्तदर्शन, धर्मचर्चा जैसी धार्मिक कृति करने के लिए करोडों श्रद्धालु यहां आते हैं । यह श्रद्धालुओं का पर्व ही है । साथ ही, देवता, ऋषि, सन्त एवं तैंतीस करोड तीर्थ भी कुम्भ पर्व में सम्मिलित होते हैं, जो एक अद्वितीय घटना है ।
‘हिन्दू-एकता’ कुम्भ मेले की घोषणा है । विदेशी नागरिकों को, यह मेला हिन्दू धर्म के अन्तरंग के दर्शन कराता है । वास्तव में इस पर्व का आध्यात्मिक लाभ, कुम्भ मेले में धर्मश्रद्धायुक्त आचरण करनेवाले श्रद्धालुओं को ही होता है । अतएव इस विशेषांक में हमारे पाठकों के लिए मुख्यरूप से कुम्भ मेले एवं कुम्भ पर्व क्षेत्र की महिमा का विवेचन किया है ।

सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. जयंत आठवलेजी के चरणों में कोटि-कोटि प्रणाम !
संपादकीय : आर्थिक अनुशासन
हिन्दू जनजागृति समिति के हिन्दू राष्ट्र संपर्क अभियान अंतर्गत राष्ट्रीय मार्गदर्शक सद्गुरु डॉ. चारुदत्त पिंगळेजी की मध्य प्रदेश यात्रा !
ज्ञानमूर्ति, निर्गुण तत्त्व की नित्य अनुभूति देनेवाले एवं ब्रह्मानंद में निमग्न रहनेवाले सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. आठवलेजी
सच्चिदानंद परब्रह्म गुरुदेवजी द्वारा ३० वर्ष पूर्व दिए गए आशीर्वचन को साधक क्षण-क्षण अनुभव कर रहे हैं !
सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. आठवलेजी एकमेवाद्वितीय एवं अवतारी पुरुष क्यों हैं ?