जळगांव (महाराष्ट्र) – सर्वोच्च न्यायालय ने १९ अप्रैल को निर्णय दिया कि जिले के एरंडोल ताल्लुका की ‘मस्जिद’ की चाबियां नगर परिषद के पास ही रहेंगी ।’ वास्तविक यह कथित मस्जिद हिन्दुओं का पांडववाडा है । सर्वाेच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति सूर्यकांत एवं के.वी. विश्वनाथन् ने निर्णय देते हुए कहा कि स्थानीय नगर परिषद सवेरे की नमाज आरंभ होने से कुछ समय पूर्व प्रवेशद्वार खोलने के लिए एक अधिकारी नियुक्त करेगी । यह अधिकारी नमाजपठन होने तक वह (द्वार) खुला रखेगा । इसी के साथ मंदिर अथवा स्मारक से प्रवेश अथवा बाहर जाने के लिए कोई भी प्रतिबंध नहीं होगा एवं बिना किसी कष्ट के सर्व धर्म के लोगों को भेंट देने की अनुमति होगी । सर्वाेच्च न्यायालय ने आगे कहा कि मस्जिद के स्थान के संदर्भ में यथास्थिति स्थायी रहेगी एवं आगे का आदेश आने तक वह वक्फ बोर्ड अथवा याचिकाकर्ता सोसाइटी के नियंत्रण में रहेगी । न्यायमूर्ति सूर्यकांत एवं के.वी. विश्वनाथन् के खंडपीठ ने मुंबई उच्च न्यायालय के निर्णय विरुद्ध जुम्मा मस्जिद ट्रस्ट समिति द्वारा प्रविष्ट की गई याचिका अस्वीकार कर दी है ।
पांडववाडा की भूमि प्रशासन को नियंत्रण में लेनी चाहिए ! – प्रसाद दंडवते, शिकायतदार
पांडववाडा संघर्ष समिति के शिकायतकर्ताश्री. प्रसाद मधुसूदन दंडवते ने दैनिक ‘सनातन प्रभात’ के प्रतिनिधि से बात करते हुए कहा, ‘मैंने पांडववाडा संघर्ष समिति की स्थापना की है एवं अध्यक्ष के रूप में जिलाधिकारी से पांडववाडा के अनधिकृत निर्माणकार्य एवं अतिक्रमण हटाए जाएं, ऐसा निवेदन सेक्शन ५३ के अंतर्गत व्यक्तिगत नाम से दिया है । पांडववाडा में हिन्दू आते हैं, मुस्लिम नहीं ।
वहां ७-८ मुसलमान नमाजपठन करते हैं । शुक्रवार को उनकी संख्या ३०० तक रहती है । वह स्थान अथवा वास्तु उनका नहीं है । पांडववाडा के संदर्भ में हमारे पास वर्ष १ सहस्र ६०० तक के प्रमाण हैं । यह वाडा ५ सहस्र वर्षाें पूर्व का होगा । अंदर के सभी अतिक्रमण नगरभूमापन अधीक्षक ने अपने विवरण में पंजीकृत किए हैं । उसके अनुसार वे अतिक्रमण ध्वस्त किए जाएं, ऐसा मेरा मत है ।’
| हिन्दू जनजागृति समिति एवं पांडववाडा संघर्ष समिति समान हिन्दू दल ‘वक्फ मंडल’ की घुसपैठ से पांडववाडा को मुक्त करने के लिए संघर्ष कर रहे थे । |

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